आपका स्वागत है...

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मेरे एहसास इस मंदिर मे अंकित हैं...जीवन के हर सत्य को मैंने इसमे स्थापित करने की कोशिश की है। जब भी आपके एहसास दम तोड़ने लगे तो मेरे इस मंदिर मे आपके एहसासों को जीवन मिले, यही मेरा अथक प्रयास है...मेरी कामयाबी आपकी आलोचना समालोचना मे ही निहित है...आपके हर सुझाव, मेरा मार्ग दर्शन करेंगे...इसलिए इस मंदिर मे आकर जो भी कहना आप उचित समझें, कहें...ताकि मेरे शब्दों को नए आयाम, नए अर्थ मिल सकें ...
14 July, 2009

मिसाल !

- रश्मि प्रभा...


रिश्ते निभाने के बावजूद
रिश्ते तुमने भी खोए
रिश्ते हमने भी खोए
तुम्हारा अपना दर्द है
हमारा अपना दर्द है
प्रश्न तुम्हारे अन्दर भी हैं
प्रश्न हमारे अन्दर भी हैं
पर परिणाम अलग हैं........
तुम टूट गए
हम मजबूत हो गए
तुमने खुशियों के द्वार बंद कर डाले
हमने नई खुशियों का स्वागत किया
तुम मंथन करते
हमने विष को भी
अमृत की तरह पी लिया
तुम बेमौत मारे गए
हम मिसाल बन गए .........

31 टिप्पणियाँ:

sangeeta ने कहा…

wah rashmi ji...Wah...

bahut sakaratmak soch....misaal banae ki...bahut sundar rachna....

zindagi men utaarane laayak...bahut bahut badhai

अनिल कान्त : ने कहा…

बहुत खूब लिखा है आपने...बहुत अच्छी

Amar ने कहा…

bahut hi achchhi kavita hai ye.....margdarsan karati hai ki hamesha jeena sikho chahe kitni bhi kathinai kyun na samne aaye....ek safal prayas hai....

vandana ने कहा…

bahut badhiya rachna.

Nirmla Kapila ने कहा…

वाह रश्मिजी वो कभी हुआ करते थे हम अब भी हैं बहुत खूब्सूरत और सकारात्मक अभिव्यक्ति है बधाई

Murari Pareek ने कहा…

वाह अति सुन्दर मिशाल है !! अडिग रहने और लड़ने की मिशाल ! लाजवाब बेमिशाल !!

रंजना ने कहा…

वाह रश्मि जी वाह !!!!!! क्या बात कही आपने.....
जिन्दगी का नजरिया अगर यह हो तो फिर तकलीफ के लिए जगह ही कहाँ बचती है......
सकारात्मक भाव लिए बहुत ही सुन्दर इस रचना के लिए आभार.

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत उम्दा!!

रिश्तों और नातों के
बीच कुछ
इस तरह से
बंट गया हूँ मैं..
कि
खुद से..
कट गया हूँ मैं....

दिगम्बर नासवा ने कहा…

अपना अपना दुख को जीने का ढंग है.......... किसी के लिए हिम्मत किसी के लिए टूटन............. बहूत ही लाजवाब लिखा है ..

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

बहुत सुन्दर ढंग से आपने यह बात कही है बढ़िया लगी आपकी यह रचना

Preeti_Surat ने कहा…

तोड़ने वाला हमेशा टुटा ही है … जो निभाता है वो देर से ही सही पर निभ जाता है …
और क्या कहे ? हर रचना कुछ समझा जाती है , सीखा जाती है …ILu ….!

mukesh ने कहा…

बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति !
सचमुच आप मिसाल बन्ने के योग्य है

राज भाटिय़ा ने कहा…

वाह क्या बात है, रशिम जी शव्दो को तरतीव से जोडना कोई आप से सीखे, बहुत सुंदर रचना.
धन्यवाद

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

सुंदर रचना

hem pandey ने कहा…

जो व्यक्ति ऐसी दृढ इच्छा शक्ति रखेगा वह मिसाल तो बनेगा ही.

संत शर्मा ने कहा…

सच है, यदि सोच सकारात्मक हों, सबल हों, तो विपरीत परिस्थितया आत्मबल को तोड़ नहीं पाती, वल्कि और मजबूत बना डालती है, मिशाल बना डालती है |

Harkirat Haqeer ने कहा…

बहुत सुंदर ...प्रेरणा व् आत्मबल बढाती देती कविता ......!!

mehek ने कहा…

sahi positive thoughts liye ek sunder kavita.

M VERMA ने कहा…

रिश्ते और नाते के बीच कभी कभी खुद को बांटना पडता है.
बेहतरीन

RAJNISH PARIHAR ने कहा…

बहुत ही अच्छी रचना......

सैयद | Syed ने कहा…

बहुत सुंदर !!

creativekona ने कहा…

रश्मि जी ,
रिश्तों की टूटन और ..उस टूटन पर विजय का बहुत सरल शब्दों में चित्रण .
अच्छी कविता .
हेमंत कुमार

शोभना चौरे ने कहा…

a sha vadi vicharo ki prerna deti sundar kavita .
aajkal aapne hmare ghar aana bhula diya hai .aaiye

मुकेश कुमार तिवारी ने कहा…

रश्मि प्रभा जी,

प्रश्‍नों के साथ जीवन कि नियति को बहुत ही गंभीरता से एक नयी परिभाषा दी है, आपने इस कविता के माध्यम से।

आखिरी बंद कि तुम बेमौत मारे गये और हम मिसाल बन गये बहुत ही अच्छा बन पड़ा है। कि हममें से हर एक जीवन में प्रश्नों का सामना करता है फिर भी साहस से अपनी परिभाषा गढ़ना ही जीवन में उन्नयन की निशानी है।

सादर,

मुकेश कुमार तिवारी

गौतम राजरिशी ने कहा…

"तुम बेमौत मारे गये , हम मिसाल बन गये"

कविता को मैं ने अपने करीब पाया...आप ने जो कुछ भी सोच कर लिखा हो, मुझे खुद से जुड़ा लगा है मैम!

एक बहुत ही सुंदर रचना !

ललितमोहन त्रिवेदी ने कहा…

रश्मि जी ,टिप्पणी लिखने में मैं हमेशा ही पिछड़ जाता हूँ !....... इस रचना में आपका सकारात्मक सोच जीने की सही कला को दर्शाता है जोकि आपके बहुमुखी व्यक्तित्व का हिस्सा भी है ! आपकी रचना में चिंतन की एक स्पष्ट धारा दिखाई देती है और यही खूबी आपको अन्य रचनाकारों से अलग करती है ! बहुत सुन्दर और सार्थक लेखन है आपका !

संजीव गौतम ने कहा…

अनूठी रचना है सिर्फ कहन के अनोखेपन के कारण जो आपका अपना है. इसे संभालकर रखिये बहुत कीमती चीज़ है आपके पास.

श्याम कोरी 'उदय' ने कहा…

... प्रभावशाली रचना !!!

अल्पना वर्मा ने कहा…

'तुम मंथन करते...हमने विष को पी लिया!'
रिश्तों के अर्थों में उलझी खुद को सुलझाती सी
कविता बहुत अच्छी लगी.

Mumukshh Ki Rachanain ने कहा…

'तुम मंथन करते...हमने विष को पी लिया!'

शायद श्रद्धा का ही प्रतिफल है की आपको कहना पड़ा..........

"तुम बेमौत मारे गये , हम मिसाल बन गये"

सुभान अल्लाह, कितने मेल खाते विचार.......
अलख जगाएं रखें, कारवां तो बनेगा ही....................

MUFLIS ने कहा…

"...hm misaal bn gaye..."

bs isi meiN hi rachnaa ka poora saar chhipa hai....
rishtoN ke uljhaav ko naye sire se paribhaashit karti hui achhi rachna pr badhaaee svikaareiN.
---MUFLIS---

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