
कहाँ से आते हैं ये ख्याल ???
आँखों से टपकते
उँगलियों में ऐंठते
पाँव में जमते -
होठों में सिले
पर शब्द - अनवरत ...
आँखों से ओझल ये कौन रोता है
कौन हथेलियों में आंसुओं के ओस रखता है
भीगे भीगे से ख्यालों की सदा
ये कौन देता है
पनपते हैं शब्द अनवरत ...
दहलीज़ पे होती है एक सरसराहट
कमरे में कोई चलता है
खिड़कियों से कोई तकता है
चुपके से कानों में कहता है ...
.... सुनते ही जान लेती हूँ
मेरे ही ख्याल , मेरे ही आंसू
मेरी पुकार खुद से खुद को
और चलना अनवरत शब्दों का
उन ख्यालों को बटोरने के लिए
जो मेरी ज़िन्दगी थे
ज़िन्दगी हैं ...
38 टिप्पणियाँ:
उन ख्यालों को बटोरने के लिए चलना अनवरत शब्दों का
जो मेरी ज़िन्दगी थे...ज़िन्दगी हैं ...
हाँ और हमेशा रहेंगे... शुभकामनाये
.... सुनते ही जान लेती हूँ
मेरे ही ख्याल , मेरे ही आंसू
मेरी पुकार खुद से खुद को
और चलना अनवरत शब्दों का
उन ख्यालों को बटोरने के लिए
जो मेरी ज़िन्दगी थे
ज़िन्दगी हैं ...
नहीं जानेंगी तो जिन्दगी को शब्द कैसे देंगी इतनी खूबसूरती से ... भावनाओं का संगम इन शब्दों में आपकी कलम से बेमिसाल है .. आभार सहित शुभकामनाएं ।
मेरी पुकार खुद से खुद को
और चलना अनवरत शब्दों का
उन ख्यालों को बटोरने के लिए
जो मेरी ज़िन्दगी थे
ज़िन्दगी हैं ...
क्यूँ लिखते हैं..कैसे लिखते हैं...सब का विश्लेषण करती पंक्तियाँ .
उन ख्यालों को बटोरने के लिए
जो मेरी ज़िन्दगी थे
ज़िन्दगी हैं ......
kitna sukun deta hai......ye khyalon ko batorna bhi.....
मेरे ही ख्याल , मेरे ही आंसू
मेरी पुकार खुद से खुद को
और चलना अनवरत शब्दों का
उन ख्यालों को बटोरने के लिए
जो मेरी ज़िन्दगी थे.... !
कल से ही सोच रही हूँ
मेरे दिल के दर्द को ,
शब्दों में ढाल ब्यान कैसे.... ??
sundar kavita bhav....usase bhi sundar sheershark..
"SHABD ANVARAT"....
शब्द सहेजें मन भावों को..
अच्छे ख्यालातों की सुंदर रचना,...बेहतरीन
नई रचना के लिए काव्यान्जलिमे click करे
आँखों से ओझल ये कौन रोता है
कौन हथेलियों में आंसुओं के ओस रखता है
भीगे भीगे से ख्यालों की सदा
ये कौन देता है
...
बहुत बहुत प्यारी सी रचना..पढ़ कर अच्छा लगा.
सादर नमन .
शब्दों के माध्यम से मृदुल कोमल भावों की सुन्दर अभिव्यक्ति
खुद से खुद की मुलाकात कराते शब्द..शब्दों के माध्यम से वही तो प्रकट होना चाहता है...
ख्यालों को शब्दों में समेटने की अद्भुत क्षमता...
bhaav hi bhasha mein bah kar shabdroop dhar leti hai...
sundar bhaav, sundar rachna!
और चलना अनवरत शब्दों का
उन ख्यालों को बटोरने के लिए
जो मेरी ज़िन्दगी थे
ज़िन्दगी हैं ...
और हमेशा रहेंगे आंटी।
सादर
बहुत सुन्दर रचना दी....
मन के अन्दर झरना कोई
अल्फाजों का झरता है
जैसे खाली होता पोखर
तक्षण ही तो भरता है
सादर.
Waah ! Bahut khoob
aapki har rachna nishabd kar deti hai .
Aabhaar..!
अपने ही तो साथ चलते हैं।
इस रचना के लिए सिर्फ एक शब्द: बेजोड़.
नीरज
.... सुनते ही जान लेती हूँ
मेरे ही ख्याल , मेरे ही आंसू
मेरी पुकार खुद से खुद को
और चलना अनवरत शब्दों का
उन ख्यालों को बटोरने के लिए
जो मेरी ज़िन्दगी थे
ज़िन्दगी हैं ...
sachmuch ham khayaalon me hi jiite hain ..baht sundar
उन ख्यालों को बटोरने के लिए चलना अनवरत शब्दों का
वाकई यही जिंदगी हैं.
बेहद खूबसूरत ख्याल.
बंधते एहसास खूबसूरत शब्दों में ...
अनवरत शब्दों की परिभाषा ही ऐसी है . बेहतरीन बुनी है आपने बधाई
कौन हथेलियों में आंसुओं के ओस रखता है
भीगे भीगे से ख्यालों की सदा ..बहुत खुबसूरत रचना...
सुनते ही जान लेती हूँ
मेरे ही ख्याल , मेरे ही आंसू
मेरी पुकार खुद से खुद को
....बहुत ख़ूबसूरत अभिव्यक्ति..आभार
कल 24/12/2011को आपकी कोई पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!
सुंदर अभिव्यक्ति की सुंदर रचना,....
मेरे पोस्ट के लिए "काव्यान्जलि" मे click करे
इस रचना ने दिल को छुआ!
ख्याल प्रतिरूप हैं , सपने हैं , दोस्त हैं ..पथ प्रदर्शक भी होते हैं कभी-कभी..
बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति...आभार.
Rashmi ji...
Shabd anvarat chalte rahte..
Baskar man main bane khayal...
jeevan se mrtyu tak sabse..
Karte hardam visham sawaal...
Jeevan kya hai, mrtyu kyon hai..
Khushi jo aati...Aankh kyon roti..
Koi jo chowkhat par aata...
Dil main kyon aahat si hoti...
Kyon bairi sang pyaar panapta...
Kyon sawan main agan barasti...
Kartavyon ki raah jo chalte..
Raah kathin uski kyon hoti...
Prashn kathin, uttar bikhre hain..
Shabdon se hi sab nikle hain..
Yahi falsafa humko lagta...
Shabdon se jeevan hai chalta...
Aapki kavitayen kavita na hokar jeevan yatra si mahsoos hoti hain...ek anvarrat yatra..shabdon sang, shabdon tak jaane ki..
Aapka abhaar ki aapne hame ye sumadhur kavitayen padhne ka mauka diya...
Saadar..
Deepak Shukla..
aaderniya rashmiji..aapki har rachna kee tarah yamh bhee behad lajab rachna hai..ek paheli geet ki tarah..aap poochti rahin baar baar sanket dekar..jab ant me jabab mila to kavita ka rahsya samajh aaya..sadar badhayee ke sath........सुनते ही जान लेती हूँ
मेरे ही ख्याल , मेरे ही आंसू
मेरी पुकार खुद से खुद को
और चलना अनवरत शब्दों का
उन ख्यालों को बटोरने के लिए
जो मेरी ज़िन्दगी थे
ज़िन्दगी हैं ...
कौन हथेलियों में आंसुओं के ओस रखता है,, bahut acha likhi lines..
कहाँ से आते हैं ये ख्याल ???
आँखों से टपकते
उँगलियों में ऐंठते
पाँव में जमते -
होठों में सिले
पर शब्द - अनवरत ...
आँखों से ओझल ये कौन रोता है
कौन हथेलियों में आंसुओं के ओस रखता है
भीगे भीगे से ख्यालों की सदा
............. ख्यालों की सदा मार्मिक है.
शब्दों की अनवरत और गहन अभिवयक्ति........
सुंदर भाव, अच्छी रचना
सुंदर
सुंदर भावों से सजी गहन अभिव्यक्ति....
मेरे ही ख्याल , मेरे ही आंसू
मेरी पुकार खुद से खुद को
और चलना अनवरत शब्दों का
उन ख्यालों को बटोरने के लिए
जो मेरी ज़िन्दगी थे
ज़िन्दगी हैं ...
.....और जिंदगी रहेंगे दीदी जब तक धड़कने हैं ये ख्याल भी हैं ...बरसते रहेंगे यूँ ही जीते जायेंगे हम यूँ ही !
bas yun hi anwarat...shabd aur khayaal...yahi zindagi hai.
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