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मेरे एहसास इस मंदिर मे अंकित हैं...जीवन के हर सत्य को मैंने इसमे स्थापित करने की कोशिश की है। जब भी आपके एहसास दम तोड़ने लगे तो मेरे इस मंदिर मे आपके एहसासों को जीवन मिले, यही मेरा अथक प्रयास है...मेरी कामयाबी आपकी आलोचना समालोचना मे ही निहित है...आपके हर सुझाव, मेरा मार्ग दर्शन करेंगे...इसलिए इस मंदिर मे आकर जो भी कहना आप उचित समझें, कहें...ताकि मेरे शब्दों को नए आयाम, नए अर्थ मिल सकें ...

01 जनवरी, 2015

2015 मंगलमय हो




पुराने वर्ष ने उतार दिया है अपना पुराना वस्त्र 
नई ताजगी, नए हौसलों के साथ 
2015 की आयु लिए 
खड़ा है नया वर्ष !
जन्मदिन की ढेरों बधाई वर्ष :)
बढ़ाओ अपने अनुभवी कदम 
- जिन्होंने खून की होली खेली 
तुम्हारे वस्त्रों को दागदार किया 
उन्हें दो गज ज़मीन भी न नसीब हो 
दिखा दो  … 
हर बच्चों को अपनी सी लम्बी आयु दो 
उनके भीतर हर मौसम की खासियत भर दो 
तुम बहुत सामर्थ्यवान हो वर्ष 
संकल्प लो 
खुशियों से झोली भर दोगे 
अन्याय को खत्म करोगे 
डाकिया बन एक चिठ्ठी 
सबके घर पहुँचाओगे 
हर रिश्तों के नाम  … 
ऐ वर्ष 
तुम तो बहुत बड़े हो 
दादा जी के दादा के दादा 
तुम इस भारत की तक़दीर बना दो 
ऐसी छड़ी घुमाओ 
कि दुश्मन दुश्मनी भूल जाये 
किसी का बेटा,भाई,पति  … शहीद न हो 
.... 
तुममें संभावनाओं का विस्तृत,विशाल समंदर है 
तुम चाह लो तो सब संभव है 
कहो न सबसे 
"मैं 2015 
सबके सपने पूरे करूँगा 
आतंक के साये से मुक्त करूँगा 
इतनी खुशियाँ दूँगा 
कि तुमसब निर्भय मेरे 
2016 वें वर्ष का स्वागत कर सको"