23 नवंबर, 2008

मन के रास्ते और ईश्वर !


मैं मन हूँ,
सिर्फ़ मन !
शरीर की परिधि से
बहुत अलग,बहुत ऊपर........
आम बातें मैं कर लेती हूँ कभी,
पर मन की राहों में सफर करना
मेरा सुकून है !
मन के रास्ते गीले होते हैं,
गिरने का डर होता है ,
तो अक्सर लोग
सूखे,बेमानी रास्तों में उलझ जाते हैं........
आंसुओं की भाषा में गिरना
उन्हें मुनासिब नहीं लगता !
उनकी जुबान में
ईश्वर तक बेमानी शक्ल ले लेता है,
सात्विक चेहरे से अलग
हीरे,मोतियों में जड़ हो जाता है !
हतप्रभ ईश्वर-
उस पिंजड़े को छोड़ जाता है
और मेरे
मुझ जैसों के संग-
भीगे रास्तों पर।
आम परिवेश में चलता है
....... ईश्वर अपनी करुणा के आंसू
इन्हीं रास्तों पर बहाता है !!!!!!!

26 टिप्‍पणियां:

  1. सच में मन् की दुनिया सब से उपर होती है...
    इसके गीली रास्ते मन् को सुकून और ठंडक प्रदान करते है...
    हर कोई समज नहीं पता इससे लेकिन..
    इश्वर इससे समजता है और हमेशा साथ भी देता है मन् के रास्तो पे चलनेवालों का...

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  2. ईश्वर अपनी करुणा के आंसू इन्ही रास्तों पर बहाता है ..बहुत खूब ..बहुत बढ़िया लिखा है आपने

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  3. अपने मनोभावों को सुन्दर शब्द दिए है।बढिया लिखा है।बधाइ।

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  4. bahut sundar bhav hain-ishwar apani karuna ke aansoon inhi raaston par bahata hai.......mann tak pahunchane wali baat.

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  5. मन के रास्ते गीले होते हैं और गिरने का डर होता है ........
    आसुओं की भाषा में गिरना उन्हें मुताबिक नहीं लगता ............
    इश्वर अपनी करुणा के आंसूं इन्ही रास्तों पर गिराता है ..............



    मन में इश्वर बसा है....वो मन की राहें जो गीली हैं ..
    जो ले जाती हैं इश्वर के घर तक
    वो घर जिनमे दो द्वार हैं नयनो के
    और जो सुरक्षित है पलकों की छाओं से
    वो घर जो लीपा गया है इश्वर के उन करुणामय
    आंसुओं से.......
    मन के रास्ते खोज लो ये घर तुम्ही मे बसा है तुम्ही में छिपा है
    इस घर के तुम्ही रखवाले और तुम्ही मालिक हो.....
    इस घर की नींव है आस्था वो आस्था
    जो खो गई है तुममे ही कहीं ......
    आस्था खोज लो मन की राहें खुद
    उस घर तक तुम्हे ले आएँगी.......
    जहाँ इश्वर का वास है .....
    आपकी प्रेरणा से आपके लिए......
    आपका शैतानु.......


    मेरे ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है आने के लिए
    आप
    ๑۩۞۩๑वन्दना
    शब्दों की๑۩۞۩๑
    इस पर क्लिक कीजिए
    आभार...अक्षय-मन

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  6. दीदी ,
    इस बार तो कमाल कर दिया .
    सच में ईश्वर को समर्पित है ये रचना ......
    ज़िन्दगी में हम सब कभी न कभी ईश्वर के आशीर्वाद प्राप्त करतें है , और आपकी रचना इसी बात को इंगित करती है .


    बहुत बहुत बधाई

    विजय

    Note : pls visit my blog : www.poemsofvijay.blogspot.com , इस बार कुछ नया लिखा है ,आपके comments की राह देखूंगा .

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  7. बहुत बढ़िया दीदी....मन की राहें गीली होती हैं इसीलिए इससे जो भी गुज़रता है या इस पर जो भी बीतता है एक छाप छोड़ जाता है....!!

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  8. शरीर की परिधि से ऊपर मन का होना और उसी की राहों में सफर करना मेडिटेशन की पद्धति ओशो ने भी और महर्षि महेश योगी ने भी बतलाई है जब कि गीता मन को बश में करने की बात कहती है यह बहुत गंभीर चिंतन का विषय है /जहाँ तक हीरे मोतियों से जडा भगवान् जड हो जाता है यह तो कतई मानने लायक नहीं है /हाँ जहाँ करुना है ,आंसू है वहां ईश्वर की कृपा बरसना स्वाभाविक है किंतु मोतियों से जड़े की आलोचना भी नहीं की जा सकती वहां यदि आडम्बर नहीं है दिखावा नहीं है सच्ची श्रध्धा है तो उनकी वहां उपस्थिति को कैसे नकारा जा सकता है /मन के साथ सफर करने की बात पर मुझे जैन मुनि के प्रवचन याद आरहे है एक स्थान पर बैठ जाओ मन जिधर जाता है उसे रोको मत देखते रहो उसके साथ चलते चले जाओ और वाकई कुछ देर बाद एक अच्छा सा हल्कापन सा महसूस किया गया /मन के रस्ते गीले वाली बात समझ में नहीं आई /उनमे गिरने का डर किसको ?/मार्ग तो दो ही है या तो मन के साथ बहो या उसे बश में करो

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  9. मन की ईश्वर तक की यात्रा कठिन है. सांसारिक आकर्षणों से विमुक्त होना साधना है. कविता चिंतन की गलियों में विचरण कराने लगती है.
    आपके व्यक्तित्व को झलकाती है.

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  10. बहुत ही सुंदर कविता,
    धन्यवाद

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  11. shai baat..ishawar bhi aam rasto ko chunna hi chahate hai apne seedhe bhakto ke sath....

    bhaut acha laga

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  12. Achchhaa darshanik prushutitikarana, mana ko Achchha lagaa. Isake liye aap badhaayee ki patra hain. Krupayaa pranaam sweekar karein.

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  13. ...bahut sundar bhaav vyaqt kiye hain aapne in chand linon me....

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  14. सहज शब्दों मे गंभीर बात रखी है आपने. बधाई.

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  15. नहीं दीदी ,मन के रास्ते कभी गीले नहीं होते ,जो रास्ते मन के तिलिस्म से होकर नहीं जाते उनमे ही गिरने का डर होता है ,हाँ आप मन की राहों में सकूँ महसूस कर सकती हो आप क्या सब करते हैं ,जिन रास्तों में गिरने का डर हो |ये बात सही है ,इश्वर भी उन्ही रास्तों में कहीं न कहीं खडा मिलता है |लेकिन ये बात भी आपको स्वीकार करनी होगी इश्वर भले इन आडी तिरछी पगडंडियों में अपनी हथेली खोल के खडा हो ,जिन्हें गीले रास्तों पर चलने की आदत हो उन्हें ये हथेलियाँ भी नजर नहीं आती |ये उनकी कुंठा नहीं ,हीरे मोती में जड़े इश्वर की सत्ता के सामने खुद के अस्तित्व को स्थापित करने की विधि है |शायद ऐसा करते करते कभी न कभी वो खुद इश्वर बन जाए |लेकिन इन सबके बावजूद इश्वर की करुना अगर कहीं बरसती है तो इन्ही यायावरों पर बरसती है |हो सके तो मन का रास्ता कभी न चुनो \

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  16. बहुत खूब लिखा है आपने रश्मि जी...सार्थक रचना...
    नीरज

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  17. 'ईश्‍वर अपनी करूणा के आंसु इन्‍हीं रास्‍तों पर बहाता है।'

    सुन्‍दर विचार, बधाई।

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  18. मैंने मरने के लिए रिश्वत ली है ,मरने के लिए घूस ली है ????
    ๑۩۞۩๑वन्दना
    शब्दों की๑۩۞۩๑

    आप पढना और ये बात लोगो तक पहुंचानी जरुरी है ,,,,,
    उन सैनिकों के साहस के लिए बलिदान और समर्पण के लिए देश की हमारी रक्षा के लिए जो बिना किसी स्वार्थ से बिना मतलब के हमारे लिए जान तक दे देते हैं
    अक्षय-मन

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  19. how b;fully, how deeply, u think di.

    A great description of mind.
    Its true what we want our mind think. I think the whole universe is created by mind only.

    MY GOD IS LIVING IN MY THOUGHTS ONLY..[:)]

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  20. बन्दों को राह दिखने के बजाय अगर "ईश्वर" ही हतप्रभ हो उनको छोड़ दे ,तो वो "खुदा" कैसा??????

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  21. yeh man hee to hai sabhee bhawon ka rachaita. man naheen hotaa to naheen lagtaa hai ki kuchha bhee ho pataa.

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शाश्वत कटु सत्य ... !!!

जब कहीं कोई हादसा होता है किसी को कोई दुख होता है परिचित अपरिचित कोई भी हो जब मेरे मुँह से ओह निकलता है या रह जाती है कोई स्तब्ध...