आपका स्वागत है...

आपका स्वागत है...
मेरे एहसास इस मंदिर मे अंकित हैं...जीवन के हर सत्य को मैंने इसमे स्थापित करने की कोशिश की है। जब भी आपके एहसास दम तोड़ने लगे तो मेरे इस मंदिर मे आपके एहसासों को जीवन मिले, यही मेरा अथक प्रयास है...मेरी कामयाबी आपकी आलोचना समालोचना मे ही निहित है...आपके हर सुझाव, मेरा मार्ग दर्शन करेंगे...इसलिए इस मंदिर मे आकर जो भी कहना आप उचित समझें, कहें...ताकि मेरे शब्दों को नए आयाम, नए अर्थ मिल सकें ...
14 July, 2009

मिसाल !

- रश्मि प्रभा...


रिश्ते निभाने के बावजूद
रिश्ते तुमने भी खोए
रिश्ते हमने भी खोए
तुम्हारा अपना दर्द है
हमारा अपना दर्द है
प्रश्न तुम्हारे अन्दर भी हैं
प्रश्न हमारे अन्दर भी हैं
पर परिणाम अलग हैं........
तुम टूट गए
हम मजबूत हो गए
तुमने खुशियों के द्वार बंद कर डाले
हमने नई खुशियों का स्वागत किया
तुम मंथन करते
हमने विष को भी
अमृत की तरह पी लिया
तुम बेमौत मारे गए
हम मिसाल बन गए .........

10 July, 2009

शुक्रगुजार !

- रश्मि प्रभा...


दर्द ने मुझे तराशा है,
दर्द देनेवालों की
मैं शुक्रगुजार हूँ........
यदि दर्द ना मिलता
तो सुकून का अर्थ खो जाता,
खुशियों के मायने बदल जाते,
अपनों की पहचान नहीं होती,
गिरकर उठना नहीं आता,
आनेवाले क़दमों में
अनुभवों की डोर
नहीं बाँध पाती.........
मैं शुक्रगुजार हूँ,
उन क्रूर हृदयों का
जिन्होंने मुझे सहनशील होना सिखाया,
सिखाया शब्दों के अलग मायने
सिखाया अपने को पहचानना ........
तहेदिल से मैं शुक्रगुजार हूँ,
दर्द की सुनामियों की
जिसने मुझे डुबोया
और जीवन के सच्चे मोती दिए...........

30 June, 2009

हम बस चाहते हैं !

- रश्मि प्रभा...


जब हम
निरंतर कोई कल्पना करते हैं
तो,
उड़ान,चाहत,आदान-प्रदान
सिर्फ़ हमारा होता है !
फिर व्यर्थ हम
दुःख में गोता लगाने लगते हैं,
फिर एक निष्कर्ष निकालते हैं
और समझौता कर लेते हैं !
कल्पना में जो तस्वीर होती है
उसकी चाभी
हमारे हाथ में होती है...
उससे परे
उसकी कल्पना का सूत्र
दूसरे के हाथ में होता है या नहीं
इसे नहीं समझ पाते
ना समझना चाहते हैं.......
हम सिर्फ़ चाहते हैं
आकलन करते हैं
और दुखी होते हैं !!!!!!!!!!!!!!!

10 June, 2009

कीमत !

- रश्मि प्रभा...


शब्दों की कीमत होती,
तो मेरे शब्द
अनमोल होते....
मेरी आवाज़ की कीमत होती,
तो मेरी आवाज़ में कोई बात होती....
ऐसा जब उसने कहा,
तो मैं अवाक रह गई !
शब्द पागलों की तरह हंसने लगे,
पैसे के तराजू पर
उसके भावपूर्ण अर्थ हल्के हो गए....
मैंने तो कीमत देखी
आंखों में,
चेहरे की मुखरता में,
दिल की गहराइयों में -
इनको ही अपनी आत्मा की तिजोरी में
कैद किया,
क्रमवार जेहन में रखा,
जिनके अन्तर से मेरा नाम निकला,
इसकी क्या कीमत लगाओगे तुम ???

01 June, 2009

जीत निश्चित है !

- रश्मि प्रभा...



बाल-विवाह , सती-प्रथा ,

अग्नि-परीक्षा........................
जाने कितने अंगारों से गुजरी
ये मासूम काया !
यातनाओं के शिविर में,
विरोध की शिक्षा ने ,
उसे संतुलन दिया ,
शरीर पर पड़े निशानों ने
'स्व' आकलन का नजरिया दिया !
हर देहरी पर ,
'बचाव' की गुहार लगाती,
अपशब्दों का शिकार होती,
लान्छ्नाओं से धधकती नारी ने
अपना वजूद बनाया.........
माँ सरस्वती से शिक्षा,
दुर्गा से नवशक्ति ली ,
लक्ष्मी का आह्वान किया-
प्रकाशपुंज बनकर ख़ुद को स्थापित किया !
समाज का दुर्भाग्य -
उसकी शक्ति,उसकी क्षमताओं से परे
ह्त्या पर उतर आया !
आज फिर ,
कुरुक्षेत्र का मैदान है ,
और कृष्ण नारी सेना के सारथी............
यकीनन,
जीत निश्चित है !


29 May, 2009

टिकाटिप्पणी

- रश्मि प्रभा...


मैं उनके घर की नहीं ,
लेकिन हर रोज
वे मुझे खाने की मेज़ पर सजाते हैं,
बड़े चाव से अपनी प्लेट में मुझे परोसते हैं
और टिकाटिप्पणी शुरू ............
" इसमें अपना कोई स्वाद और रूप नहीं है !
नमक थोड़ा और ज्यादा हो
तो ठीक रहेगा...........
धीमी आंच पर ही इसे बनाना चाहिए.......
पता नहीं क्यूँ,
कुछ जले जैसा टेस्ट रहता है इसका ...."
अनवरत कमी !
पर अपनी मेज़ पर मुझे लाना नहीं भूलते
.........
बिना टिका टिप्पणी के
उनका पेट नहीं भरता,
या यूँ कहें ,
दिन नहीं बनता !

19 May, 2009

अनोखी भाषा !

- रश्मि प्रभा...


मृत्यु की दहलीज़ तक होती है माँ ,
जब नई ज़िन्दगी
जन्म लेने को आतुर होती है !
एक मासूम रुदन,
माँ s s s s s से स्वर में,
संजीवनी बन
कानों से दिल तक उतरती है ........
माँ के आंसुओं से मंत्रोच्चार होता है,
आशीष बन बरसता है,
खून की एक-एक बूंद ,
दूध बन जाती है,
आँचल में सुरक्षा की शक्ति
और मन में जीने की दृढ़ता होती है...........
एक मासूम ज़िन्दगी के साथ माँ भी जन्म लेती है,
नई ज़िन्दगी,नए रूप में,दोनों साथ-साथ जीते हैं !
आहट,करवट,खामोशी,उद्विग्नता
माँ पहचान लेती है,
सारथी बन जीवन के अर्थ देती है....
इस रिश्ते को कह सकते हो ' त्रिवेणी ',
बच्चे और माँ के मध्य एहसासों की धारा
सरस्वती -सी बहती है...
गर्भनाल की भाषा बड़ी अनोखी होती है !!!