26 अगस्त, 2013

मुझे पंख चाहिए




मुझे पंख चाहिए 
वैसे पंख - 
जो मन के पास होते हैं 
और वह अपनी जगह से हमेशा कहीं और होता है  … 
मैं भी घूमना चाहती हूँ 
कहाँ ? इस पर क्या सोचना,
सीमित ही है सबकुछ 
फिर भी,
सुबह से रात तक की परिक्रमा कर लूँ 
तो मन के पंखों को कुछ आराम मिल जायेगा !
मन की आँखों को 
या उसके आने को 
हर कोई नहीं देख पाता 
न समझ पाता है 
और अगर देख लिया 
समझ लिया 
तो निःसंदेह मानसिकता की बात हो जाएगी !
आना-जाना सत्य के आधार पर प्रमाणित होता है 
यूँ महीनों,सालों मन से कहीं रह लो,
जी लो 
- कोई नहीं मानता 
प्रमाण चाहिए 
और प्रमाण के लिए मुझे असली पंखों की ज़रूरत है 
हाँ,हाँ - परियों वाले पंख !
…………………। 
अब प्रश्न उठेगा कि मिलते कहाँ हैं 
तो इस बात से तो सभी भिज्ञ हैं 
कि दुनिया आश्चर्यों की मिसाल है -
कहीं किसी अनोखे झरने के पास परियां रहती होंगी 
पंखों का अद्भुत मेला सजाये 
हमें बस कोलम्बस,वास्कोडिगामा होना है 
फिर मन से शरीर की उड़ान आसान हो जाएगी 
पर !!!  ………. 
इसमें प्रत्यक्ष गवाह की कठिनाइयां पैदा होंगी !!!
परियों की सुरक्षा ख़तरे में पड़ जाएगी  …
समझ में नहीं आता कि अपनी चाह को क्या नसीहत दूँ !
पंख तो मुझे चाहिए 
तो एक तथ्य उभरा है दिमाग में 
कि पाप हो या पुण्य 
तर्क से दोनों को तब्दील किया जा सकता है 
वचनं किं दरिद्रतम !
तर्क से पुण्य पाप 
पाप पुण्य 
होता है न ?!
तो परियों पर आफ़त आ जाने पर कह देना है 
"होनी काहू बिधि ना टरै"
और गवाह की ऐसी की तैसी 
वह तो यूँ भी बिकाऊ ही होता है 
………। 
तो सम्पूर्ण कहे का सार है - मुझे पंख चाहिए 

37 टिप्‍पणियां:

  1. उड़ने को आसमान और सशक्त पंख, आवारगी कहीं भी उड़ जाने की।

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  2. gar mil jaye pankh kahi , gar milte ho pankh kahun ...mujhe bhi chahiye

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  3. मुझे भी चाहिए....
    चाहे जैसे भी....
    :-)


    सादर
    अनु

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  4. sundar manobhaav....

    par kuchh meree bhee sun lo
    मैं खुद के बनाए
    पिंजरे में बंद पंछी सा हूँ
    जो पिंजरे की
    जालियों के पार
    देख तो सकता है
    पिंजरे के
    नियम कायदों से
    मन में छटपटाहट
    भी होती है
    कई बार खुद को बेबस
    महसूस करता हूँ
    स्वछन्द उड़ना चाहता हूँ
    पर पिंजरे से
    इतना मोह हो गया
    कोई दरवाज़ा खोल भी दे
    तो चाह कर भी
    उड़ नहीं पाऊंगा

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  5. आप तो विचारों के पंख से उड़ान भर लेती हैं .... सुंदर प्रस्तुति

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  6. पंख मिल जायेंगे ..आशा और विश्वास भरे पंख !

    शुभकामनाये!

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  7. जो मन के पास होते हैं
    न समझ पाता है
    कोई नहीं मानता
    कि दुनिया आश्चर्यों की मिसाल है
    कि पाप हो या पुण्य
    तर्क से दोनों को तब्दील किया जा सकता है
    और गवाह की ऐसी की तैसी
    वह तो यूँ भी बिकाऊ ही होता है
    तो सम्पूर्ण कहे का सार है - मुझे पंख चाहिए
    आपको मिल जाये तो पता मुझे भी बताइएगा
    मुझे भी जरूर पंख चाहिए
    !!

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  8. मन की उड़ान तो सबसे तेज़ है ....पलों में मीलों की दूरी और क्षणों में सदियों का फासला तै कर लेता है ....पंख तो अपने आप लग जाते हैं बस सिर्फ डोर को ढील देदो देखो ..मन बिना पंखों के ही परवाज़ पा जाता है .....

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  9. वाह क्या बात है ! पंखों के इस अद्भुत खजाने को ढूँढने के लिये कोलम्बस और वास्कोडिगामा बनने के गुर कौन सिखायेगा यह भी तो बताइये ! पंख तो मुझे भी चाहिये ! बिलकुल असली वाले ! मन को सहला कर जागृत करती प्यारी सी रचना !

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  10. मन की उड़ान तो सबसे तेज़ है ....पलों में मीलों की दूरी और क्षणों में सदियों का फासला तै कर लेता है ....पंख तो अपने आप लग जाते हैं बस सिर्फ डोर को ढील देदो देखो ..मन बिना पंखों के ही परवाज़ पा जाता है .....

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  11. सम्पूर्ण कहे का सार लिए जा रहे हैं इस पन्ने पर बार बार लौटने के लिए!
    बहुत सुन्दर भावयात्रा!

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  12. आपकी इस उत्कृष्ट रचना की चर्चा कल मंगलवार २७ /८ /१३ को चर्चा मंच पर राजेश कुमारी द्वारा की जायेगी आपका हार्दिक स्वागत है।

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  13. आपकी यह रचना कल मंगलवार (27-08-2013) को ब्लॉग प्रसारण पर लिंक की गई है कृपया पधारें.

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  14. बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा - बुधवार- 28/08/2013 को
    हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः7 पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया आप भी पधारें, सादर .... Darshan jangra

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  15. पंख
    पाने को हमारा मन भी बहुत ललचाता है!

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  16. बहुत सुंदर
    आपको पंख मिलें आमीन !

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  17. पंखों का अद्भुत मेला सजाये
    हमें बस कोलम्बस,वास्कोडिगामा होना है
    फिर मन से शरीर की उड़ान आसान हो जाएगी
    जहाँ शब्‍दों में इतनी सशक्‍तता हो, विचारों में ऐसी बुलंदगी हो तो हर एक सोच कब क्षितिज़ के पार जा पहुँचती है पता ही नहीं चलता ....

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  18. मन की उडा़न भरने के लिए आप से हैसलों का पंख मुझे भी चाहिए..

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  19. वैसे पंख -
    जो मन के पास होते हैं
    और वह अपनी जगह से हमेशा कहीं और होता है …

    लाजवाब |

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  20. मुझे पंख भी चाहिए.. बहुत सुन्दर प्रस्तुति। ।

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  21. wahh lajawab prastuti ... pankh chahiye har kisi ko man ke sath ud chale jo ..
    subhkamnaye .

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  22. मुझे पंख चाहिए..बेहद खूबसूरत रचना..

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  23. जादुई अहसास लिए ये पंख ...

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  24. Ek Sachhi प्यार की कहानी Ka Varnan Is Kavita Mein Hai. Being in love is, perhaps, the most fascinating aspect anyone can experience.

    Thank You.

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  25. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" गुरुवार २६ मई 2016 को में शामिल किया गया है।
    http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप सादर आमत्रित है ......धन्यवाद !

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