04 सितंबर, 2020

#कुछचेहरे


#कुछचेहरे

कई चेहरे बहुत मुखर होते हैं, उनकी आंखें बोलती हैं, होठों पर टिकी,आंखों के कोने से टपकती मुस्कान बोलती है _ इतना कि तोहमतें दामन पकड़ लेती हैं,अफ़वाहों के बाज़ार में कुछ असली,कुछ नकली चीजें बिक जाती हैं और प्यार हो जाता है ।
उम्र की उड़ान और माशाअल्लाह सर से पांव तक नन्हीं सी चिड़िया जैसे अंदाज, आंखों से उतरती आग, बेबाक खिलखिलाहट में कालिदास की कलम का मेघदूत ... बात कितनी भी मुश्किल हो, बन ही जाती है ।











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घड़ी

  घड़ी सिर्फ़ समय नहीं बताती, वह चेतावनी भी देती है। आंखें दिखाती है, बार-बार, बिना चिल्लाए । मगर हम हैं कि करवट बदल लेते हैं  जैसे समय गलत ...