15 सितंबर, 2009

प्यार का सार !


दस्तकें यादों की
सोने नहीं देतीं
दरवाज़े का पल्ला
शोर करता है
खट खट खट खट.......
सांकल ही नहीं
तो हवाएँ नम सी
यादों की सिहरन बन
अन्दर आ जाती हैं
पत्तों की खड़- खड़
मायूस कर जाती हैं !
कुछ पन्ने मुड़े-तुड़े लेकर
अरमानों की आँखें खुली हैं
एक ख़त लिख दूँ.....
संभव है दस्तकों की रूह को
चैन आ जाए
हवाएँ एक लोरी थमा जाए
भीगे पन्ने
प्यार का सार बन जायें ...............................

42 टिप्‍पणियां:

  1. waah ..........adbhut , gahan ahsason se bharpoor rachna.
    seedhe dil mein utar gayi.

    pls read my blog:
    http://ekprayas-vandana.blogspot.com
    http://vandana-zindagi.blogspot.com

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  2. "dastakon ki yadein sone nahi deti"mein bhavon komurt hote dekhna bahut hi achcha laga.Images bhi bhav ko kafi sanjeedagi se sametpaye hain.sunder prastutike liye badhai

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  3. bahut sunder,ehsaason se bhara ek khat hi pyar ka saar ban jata hai.

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  4. हा यही उम्मीद है - - - - -
    भीगे पन्ने -
    प्यार का सार बन जाये ,
    कुछ तो -
    जीने का आधार मिल जाये ...!

    गहरी सोच लिए बेहद खुबसूरत बात ... ILu ..!

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  5. वाह रश्मि जी बहुत ही बेहतरीन बहुत ही अचछी लगी आपकी कविता प्‍यार का सार बहुत ही गहरी सोच झलक रही है इसमें

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  6. वाह ! वाह ! वाह ! लाजवाब ...........

    बहुत ही सुन्दर आपकी यह रचना मन को छू गयी...

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  7. आपकी रचना में बसा एहसास अपना असर छोड़ जाता है

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  8. आत्मा को छू गयी यह रचना .....बहुत बहुत आभार .

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  9. bahut nam kar dene wali kavita ! yaadon ko sanjon koi aapki kavitaaon se seekhe !

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  10. वाह बहुत खुबसूरत रचना बधाई

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  11. लाजवाब रचना के लिए बधाई। हिन्दी दिवस की हार्दिक बधाई।

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  12. socha tha ki kuch panktiyan alag ker lungi , ki ye bahut achchi lagi...magar ye poori rachna bahut khubsurat likhi hui hai...kitne narm komal ehsaas....

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  13. भीगे पन्ने -
    प्यार का सार बन जाये ,

    बहुत ही गहन भावों की है आपकी यह रचना. पढ़ कर. आतुर मन, कातर मन, प्रेम में डूबा मन, प्रतीक्षित मन हर आहट, ध्वनि में क्या खोजता और पता है, बहुत ही सही चित्रण झलकता है.

    हार्दिक बधाई.

    चन्द्र मोहन गुप्त
    जयपुर
    www.cmgupta.blogspot.com

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  14. रशिम जी जबाब नही कविता का बहुत सुंदर.
    धन्यवाद

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  15. YAADON KI YEH KAHAANI SEEDHE DIL MEIN UTAR GAYEE ... AKSAR YAADEN KAHEE NA KAHEE, ANJAANE HI CHALI AATI HAIN .... KHOOBSOORAT EHSAAS HAI IS RACHNA MEIN ...

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  16. दस्तकें यादों की
    सोने नहीं देतीं
    दरवाज़े का पल्ला
    शोर करता है
    बहुत सुन्दर रचना भावपूर्ण आभार

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  17. wow wat a thought! again beautiful creation....keen observer hai aap ... Khuda kare jore kalam aur zyada :-)

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  18. संभव है दस्तकों की रूह को चैन आ जाए ....
    बहुत सुन्दर भावों को शब्द प्रदान किये हैं आपने ....

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  19. khat likhne ka khayal achha yha shayad bechain rooh ko aaraam aa jaye.....khoobsurat rachna...

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  20. भीगे पन्ने -
    प्यार का सार बन जाये
    y panne aksar bhig hi jaya karte hai ............ kai bar hamare apno tak pahuch jate hai kai bar nhi pahuch pate ....awesome

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  21. बहुत सुन्दर लिखा है आपने ..अच्छा लगा पढ़ना

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  22. सुन्दर कहूंगा तो कम होगा अति सुन्दर कहूंगा तो भी बात नहीं जमेगी आखिर क्या कहूँ आपकी रचना को !!!! सोचना पडेगा !!!

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  23. एक खत लिख दूँ .. सही है अब भी अभिव्यक्ति के लिये खत ही है । अच्छी रचना

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  24. रश्मीजी
    आपके प्यार के सार ने तन मन प्यार से भिगो दिया |
    बहुत सुंदर रचना |

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  25. Mummyji........ yeh kavita kitni ehsaas se bhari hai....... kuch panne mude-tude lekar, armaanon ki aankhen khuli hai...... is line ne dil chhoo liya mummy........


    My mom is great.........

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  26. आदरणीया रश्मि जी,
    बहुत सुन्दर है प्रेम कविता आपकी।भावनाओं और प्रक्रिति का अनूठा सामन्जस्य…बधाई।
    पूनम

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  27. आपकी रचनाएँ सीधे दिल पर दस्तक देती हैं..भाषा और भावः दोनों अद्भुत होते हैं आपकी रचनाओं में...इस अप्रतिम रचना के लिए ढेरों बधाईयाँ स्वीकार करें...
    नीरज

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  28. भीगे पन्ने -
    प्यार का सार बन जाये ,

    bahut khoobsurat ehsaas...badhai

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  29. dastaken yaadon ki sone nahin detin, Darwaze ka palla shor karta hai . .. waah .. sunder rachna ... Badhaai ..... Surinder

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  30. एक बहुत ही सहज सरल शब्दों में लिखी गयी प्रेम कविता …॥बधाई ।
    हेमन्त कुमार

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  31. रश्मिप्रभा जी,

    हवायें नम सी यादों की सिहरन बन .....

    बहुत ही सुन्दर उपमा है।

    अहसासों में डूबी हुई कविता।

    सादर,


    मुकेश कुमार तिवारी

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  32. क्या कहूँ.....
    वाह के सिवा कुछ निकल ही नही रहा......

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  33. रश्मी जी,
    आपकी कविता मन में कहीं गहरे दस्तक दे गई, बहुत बधाई और शुभकामनायें!

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  34. बहुत सुन्दर भावों को शब्द प्रदान किये हैं

    sanjay bhaskar

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