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मेरे एहसास इस मंदिर मे अंकित हैं...जीवन के हर सत्य को मैंने इसमे स्थापित करने की कोशिश की है। जब भी आपके एहसास दम तोड़ने लगे तो मेरे इस मंदिर मे आपके एहसासों को जीवन मिले, यही मेरा अथक प्रयास है...मेरी कामयाबी आपकी आलोचना समालोचना मे ही निहित है...आपके हर सुझाव, मेरा मार्ग दर्शन करेंगे...इसलिए इस मंदिर मे आकर जो भी कहना आप उचित समझें, कहें...ताकि मेरे शब्दों को नए आयाम, नए अर्थ मिल सकें ...

22 सितंबर, 2009

अकेलापन........


अकेलापन..........
घंटों मुझसे बातें करता है
भावनाओं को तराशता है
जीने के लिए
मुठ्ठियों में
चंद शब्द थमा जाता है...........

45 टिप्‍पणियां:

  1. शब्दों का बेहतरीन प्रयोग एक सुंदर सूक्ष्म कविता में..बधाई..

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  2. वाह क्या बात है। छोटी सी रचना और इतनि लाजवाब , बहुत खुब। हर एक शब्द में अर्थ निहित है। बहुत सुन्दर

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  3. rashmi ji,

    ye chandd shabd hi hain jo hamse baat kiya karate hain...bahut khoobsurati se aapne akelepan ko kaha hai.....badhai

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  4. rashmi ji
    akelapan .....
    sirf 6 line jisne thma diya ...poora astitv..
    aap ko badhai ----- sundar rachna ke liy.shabdo ka vishaal sagar jo hame aatm manthan ke liy karta hai majboor.......

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  5. tanhai hame bahut kuch sikha deti hai,sunder kavita uar pic bhi.

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  6. akelapan jab muzmai samata hai
    ek naya astitv samne lata hai
    kabhi chuupi ki lahre to kabhi aansuo ki jhari lagata hai akelapan jab bhi muzmai samata hai
    kitne bhule nam ,chehre ,shbad
    khoon k ansoo rulate hai
    kitne purane vakye barbas hasate hai
    sannate mai wo man ki awaz spasht sunai deti hai
    tab y nivi andar andar .kitne sapne bunti hai ..ek hawa k jhoke sa duniya ka rola rappa aata hai
    akelepan ki duniya se hako khich k wapas lata hai
    man hi man mai udas si ham jor jor se hasti hai
    chand shabd hamare apne hote hai jinmai jindgi palti hai .
    jinmai jindgi palti hai ................. rashmi aapki post awesome hai .hats off

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  7. सुन्दर अभिव्यक्ति है शुभकामनायें

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  8. sahi baat hai akelapan bhi baate karta hai...or kabhi sath nahi chhodhta....amrita pritam ji ne kahi likha tha..akelepan ka shraap jisne bhi jhela hai uske aage sazde me sir jhuk jata hai...chand shabdo me aap ne jeevan ka saar kah diya...top woman ke award ke liye congrts....hansta hua chehra achha lagta hai...alwayz b happy....

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  9. bahut bahut sunadar
    mae svyam akela hu
    i know about it

    मेरी भीतर मेरे दर्दो से भींगा कया खारा जल है ,आंसू से नम हुआ समर्पण फीर किसलिए ,मै एक कण ..मरुथल सा , प्यासा,शुष्क अधर लीये ,/ घूम रहा होऊ जन्मो से ,पृथ्वी सा तन्हा , रीक्त आकाश में जैसे मानव आकार लीये ,/स्नेह पाना है तो ,जलना ही होगा ,...हाँ मै तप सकता हूँ ..फीर सदीयो तक ...प्रिये ! तेरा प्यार लीये ... (प्यार का मतलब है भक्ती} ......{किशोर कुमार खोरेंद्र }

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  10. इस अकेलेपन की शिकार आप अकेली नहीं है , अकेलापन बहुत खलता है

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  11. Aur wahi shabd aap hum sabke samaksh rakhti hain....akelapan kahan hai didi hum sab aapke saath hai :)
    .
    Gaurav

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  12. घंटों बातें करने के बाद भी चंद शब्द...जाने दीजिये इस अकेलेपन को ...!!

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  13. ऐसा अकेलापन सब को कहा नसीब होता है | सुन्दर अभिव्यक्ति |

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  14. yahi to hota hai ye na khatam hone wala silsila shabd bhi khatam nahi hone deta.
    acha likha hai

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  15. अद्भुत रचना रश्मि जी....वाह...कम शब्दों में इतनी गहरी बात...
    नीरज

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  16. रश्मिप्रभा जी,

    एकाकी होने को कितनी खूबसूरती से एक नई पहचान दी है इन पंक्तियों के साथ।

    बहुत अच्छी, सटीक रचना।

    सादर,


    मुकेश कुमार तिवारी

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  17. ्रशिम जी बहुत ही सुंदर लगी आप की कविता.
    धन्यवाद

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  18. waah bahut khub......chand shabdo badi hi sunadarta se wyakt kari hai......bahut bahut aabhar

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  19. मुट्ठी में बंद जो शब्द निकले हैं वो अद्वितीय हैं...

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  20. Atee ,Sunder
    Rashmi Prabha Ji,
    "Akelapan" vastava mein khud ka hi ahshash karata hai.

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  21. वाह वाह वाह .......क्या बात कह दी आपने,इतने ही शब्दों में...

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  22. bahut khoobsurat di
    tanhai !!!
    dunai mei sabsee jayada faily huei hai
    chand lines mei aapki abhivaykati dil ko chu gai

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  23. मैं तो आपकी उर्जा को देखकर चकित हूँ रश्मि जी ,कितना कुछ कर लेती हैं आप ! अकेलेपन से भी शब्द चुरा लिए आपने और गढ़ दी एक सार्थक रचना ! बहुत सुन्दर !

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  24. आपके यह चंद शब्द - बहूत मायने रखते है अकेलेपन के लिए , क्युकी वो भी तो अकेला है आपके भावपूर्ण शब्दों बिना [:)]....तभी तो वो घंटो बाते करता है , करना चाहता है ...Ilu..!

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  25. इस से अच्छा और क्या हो कि ऐसा अकेलापन नसीब हो [:)]

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  26. Mummy ji.......... akelapan..... ke upar bahut hi kavita hai..... poora describe karte huye......
    waaqai mein akelapan hamse baaten bhi karta hai.....

    bahut behtareen....

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  27. रश्मि दी ! गागर में सागर भर दिया है आपने ...इतने कम शब्दों में पूरे अकेलेपन को समेट लिया.बहुत सुंदर है.

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  28. कम शब्दों में बड़ी बात ...ये सिर्फ आप ही कर सकती हैं

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  29. रश्मि जी,
    इतने कम शब्दों में अकेलेपन को व्याख्यायित कर देना----अपने में एक बड़ा बौद्धिक मन्थन ही कहा जायेगा ।
    हेमन्त कुमार

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  30. संग में भाव हों, तो अकेलापन भी महसूस नहीं होता, महसूस तो तब वो "शब्द" होते हैं जो दिल और मष्तिष्क से होते हुए कागज़ पर उतर आते हैं.............

    एक छोटी पर गहरे भावों से युक्त अच्छी कविता से रूबरू करवाया.

    हार्दिक आभार.

    चन्द्र मोहन गुप्त
    जयपुर
    www.cmgupta.blogspot.com

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  31. बहुत सुन्दर रचना
    शब्द जब चुक जाते है तो मौन मुखरण हो जाता है |

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  32. akelapan ko bahut kam sabdon mein bandha hai aapne. Bahut achha laga.
    Badhai.
    Kavita Rawat, Bhopal

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  33. akelepan ko kam sabdon mein bhandhkar bahut achhi prastuti.
    Badhai.
    Kavita Rawat

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  34. bahut sunder .......srajan akant mangta hai aur phir akant se jo prasffutit hota hai ....wo ek nai soch deta hai...aur dikhai bhi deta hai

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  35. Rashmiji,
    Bahut hi kam sabdon mai aapne akele pan ki jo bayan kiya hain wo behad sachaa hain...ye akela pan kabhi dost kitarah se to kabhi dushman ki tarah hota hain bus pal pal badalna eshk ka swabhav hain...kab kyaa hojaye kaun jane...
    Bahut achaa..Subhkamnayen

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  36. रश्मि जी,
    इतने कम शब्दों में अकेलेपन को व्याख्यायित कर देना-
    BAHUT BADI BAAT HAI

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  37. ऐसा अकेलापन सब को कहा नसीब होता है

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  38. akelapan hota hi itna khoobsurat hai ki...insaan akela hokar bhi akela nahin hota....

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  39. akelapan hota hi itna khoobsurat hai ki...insaan akela hokar bhi akela nahin hota....

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  40. उमर का ये पडाव कैसा है?
    जहां सब कुछ तो है, फिर भि अकेलेपन का दिल पे घाव कैसा है?

    अपना तो हर कोई है आंखो के सामने,
    फिर भि आंखो मे एक इंतेजार कैसा है?

    चाहते तो है सबको एक बराबर इसी दिल से,
    फिर भि ये चाहत का एक नया अंदाज कैसा है?

    बचपन से आज तक जो रोता था मै आंखो मे आंसुओ को लेकर,
    आज मेरा ये दिल ही दिल मे रोने का अंदाज कैसा है?

    जो कभी ना बोल पाया अपने चाहने वालो से,
    वो आज बोलने को मेरा दिल तरसता है,

    ये आज अचानक ये मेरे दिल का हाल कैसा है?

    लेखक : रोशन धर दुबे
    सायरी लिखने का सहि समय: 16 नवम्बर 2011 (दोपहर 3:14)
    http://rdshayri.blogspot.com/2011/11/blog-post_16.html

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