14 फ़रवरी, 2011

आओ एक अपना घर बना लें हम भी !



कच्ची मिटटी से
जो ख़्वाब कल बनाए थे,
चलो आज पका लें उनको
आओ एक अपना घर बना लें हम भी !

रिश्तों की उम्र बड़ी छोटी है
कोई एक पल के लिए
कोई दो पल के लिए
वक़्त खो जाये उससे पहले
आओ एक अपना घर बना लें हम भी !

आदतन कोई वादा मत करना
वादे कभी साथ नहीं चलते
वक़्त जब सामने खड़ा होता है
अपना ही ऐतबार होता है
वादे टूट जाएँ उससे पहले
आओ एक अपना घर बना लें हम भी !

कितने सालों दिन महीनों से
हरी पगडंडियों के पाँव भी मचलते हैं
सितारे आसमां से लटके हैं
हवाएँ खिलखिलाके चलती हैं
जाने कब आखिरी मौसम आए
आओ एक अपना घर बना लें हम भी !

40 टिप्‍पणियां:

  1. वादे टूट जाएँ उससे पहले
    आओ एक अपना घर बना लें हम भी !

    :)..kya kahne hain di!!

    उत्तर देंहटाएं
  2. कितने सालों दिन महीने से
    हरी पगडंडियों के पाँव भी मचलते हैं ...

    बहुत ही खूबसूरत सा ख्‍याल है ...हर पल को संजोना और फिर उसे हकीकत में बदलना भावमय करते शब्‍द ।

    उत्तर देंहटाएं
  3. Wow.....how cute, how sweet, how lovable & how adorable:-)

    उत्तर देंहटाएं
  4. Haaa,
    Aao apna ek ghar bana le, jaha bas pyaar hi pyaar pale...Ilu

    उत्तर देंहटाएं
  5. कच्ची मिटटी से
    जो ख़्वाब कल बनाए थे,
    चलो आज पका लें उनको
    आओ एक अपना घर बना लें हम भी !
    har line baar-baar padh rahee hoon...man hi nahin bhar raha...

    उत्तर देंहटाएं
  6. तभी तो मैंने हाँथ छुपाए थे...
    क्योंकि वो उसी माटी में सने थे जो मैं घर बनाने के लिए लाई थी...
    बहुत ही प्यारी कविता है...

    उत्तर देंहटाएं
  7. मंत्रमुग्ध कर दिया इस कविता ने.

    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  8. वाह !बहुत ही सुन्दर भावों को संजोया है…………सब कुछ लुटा कर होश मे आने से पहले एक घर बनाना जरूरी है………सुन्दर अभिव्यक्ति।

    उत्तर देंहटाएं
  9. रिश्तों की उम्र बड़ी छोटी है
    कोई एक पल के लिए
    कोई दो पल के लिए
    वक़्त खो जाये उससे पहले
    आओ एक अपना घर बना लें हम भी !


    Bahut hi bhawpoorn poem di hai didi aapne.
    badhai.

    उत्तर देंहटाएं
  10. देहरादून से प्रकाशित 'सरस्वती सुमन' पत्रिका के लघु-कथा विशेषांक का अतिथि संपादन मेरे द्वारा किया जा रहा है. आपकी लघुकथाओं की प्रतीक्षा बनी रहेगी.

    उत्तर देंहटाएं
  11. आदतन कोई वादा मत करना
    वादे कभी साथ नहीं चलते
    वक़्त जब सामने खड़ा होता है
    अपना ही ऐतबार होता है
    वादे टूट जाएँ उससे पहले
    आओ एक अपना घर बना लें हम भी !



    काश ऐसा सब सोच पाते ....

    उत्तर देंहटाएं
  12. अपना घर अपना होता है,
    जीवन का सपना होता है।

    उत्तर देंहटाएं
  13. आदतन कोई वादा मत करना
    वादे कभी साथ नहीं चलते
    वक़्त जब सामने खड़ा होता है
    अपना ही ऐतबार होता है
    वादे टूट जाएँ उससे पहले
    आओ एक अपना घर बना लें हम भी !

    बहुत सटीक और सार्थक बात ...सुन्दर रचना

    उत्तर देंहटाएं
  14. बढ़िया प्रेम अभिव्यक्ति के लिए बधाई !

    उत्तर देंहटाएं
  15. आदतन कोई वादा मत करना ...
    वाह !
    चलो एक घर बनायें ..
    क्या कहना है !

    उत्तर देंहटाएं
  16. कच्ची मिटटी से
    जो ख़्वाब कल बनाए थे,
    चलो आज पका लें उनको
    आओ एक अपना घर बना लें हम भी !

    बहुत बढ़िया ! सच है ... घर केवल दीवारों से तो नहीं बनता है ...

    उत्तर देंहटाएं
  17. सुन्दर भाव और चित्र भी क्या खूब लगाया है ..

    उत्तर देंहटाएं
  18. कितने सालों दिन महीनों से
    हरी पगडंडियों के पाँव भी मचलते हैं
    सितारे आसमां से लटके हैं
    हवाएँ खिलखिलाके चलती हैं
    जाने कब आखिरी मौसम आए
    आओ एक अपना घर बना लें हम भी ...
    .....सुन्दर रचना.

    उत्तर देंहटाएं
  19. कितने सालों दिन महीने से
    हरी पगडंडियों के पाँव भी मचलते हैं ...

    bahut hi khoobsurat khayal hai. bahut badiya rachna

    उत्तर देंहटाएं
  20. कितने सालों दिन महीनों से
    हरी पगडंडियों के पाँव भी मचलते हैं
    सितारे आसमां से लटके हैं
    हवाएँ खिलखिलाके चलती हैं
    जाने कब आखिरी मौसम आए
    आओ एक अपना घर बना लें हम भी !

    बहुत भावपूर्ण सुन्दर प्रस्तुति..

    उत्तर देंहटाएं
  21. छोटा सा घर होगा,बादलों की छांव में...।

    उत्तर देंहटाएं
  22. कितने सालों दिन महीनों से
    हरी पगडंडियों के पाँव भी मचलते हैं
    सितारे आसमां से लटके हैं
    हवाएँ खिलखिलाके चलती हैं
    जाने कब आखिरी मौसम आए
    आओ एक अपना घर बना लें हम भी

    bahut sunder bhaav h rashmi ji..badhai aapko..

    उत्तर देंहटाएं
  23. वाह जी बहुत ही सुंदर कविता कही आप ने धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  24. आदरणीय रश्मि प्रभा जी
    नमस्कार !
    बहुत सटीक और सार्थक बात ...सुन्दर रचना

    उत्तर देंहटाएं
  25. कितने सालों दिन महीनों से
    हरी पगडंडियों के पाँव भी मचलते हैं
    सितारे आसमां से लटके हैं
    हवाएँ खिलखिलाके चलती हैं
    जाने कब आखिरी मौसम आए
    आओ एक अपना घर बना लें हम भी !

    बहुत भावपूर्ण सुन्दर प्रस्तुति..

    उत्तर देंहटाएं
  26. अंतर को झकझोरने वाली कविता , बेहतरीन शब्द विन्यास बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  27. लाजवाब रचना रश्मि जी ...बधाई...

    नीरज

    उत्तर देंहटाएं
  28. बहुत सुंदर भावना कहती हुई सुंदर रचना -
    सच में कुछ और बदल जाए उससे पहले घर बना लेना ही उचित है .

    उत्तर देंहटाएं
  29. अच्छी लगी ये रचना ...शुभकामना

    उत्तर देंहटाएं

पुनरावृति

दिए जा रहे हैं बच्चों को सीख  ! "ये देखो वो देखो ये सीखो वो सीखो देखो दुनिया कहाँ से कहाँ जा रही है ! गांव घर में खेती थी ...