06 दिसंबर, 2013

कुछ झूठ कुछ लीपापोती सबसे बड़ी पूजा होती है






अम्मा का लिखा हर दिन टाइप करती हूँ  … 

जितनी बार किसी किताब को पढ़ो 
अर्थ उतने ही स्पष्ट होते हैं !
एक क्षण में हम निर्णयात्मक धारणा नहीं बना सकते 
यूँ वह तो वर्षों तक नहीं बनाया जा सकता 
क्योंकि हमारी किसी भी सोच में 
कई सोच का छौंक लगा होता है 
.... !!! पर, जब पूरी पुस्तक खत्म हो जाती है 
तो एक सार जो रह जाता है 
वह सिर्फ अपना होता है 
और वही सार उस व्यक्ति,उसके व्यक्तित्व की 
असलियत होती है - हमारे लिए !
हाँ तो रोज एक याद को टाइप करते 
मैं स्वतः अम्मा बन जाती हूँ (अगर तुम टाइप करो तो तुम भी बन जाओगे)
और साल 64 से 
एक विक्षिप्त माँ की सोच को 
जिसका 4 साल का बेटा 
कहकर गया -'ठहरो माँ,मैं अभी आया'
और  … 
हर सुबह,हर दिन 
हर शाम,हर रात महसूस करती हूँ !
.... 
ज़िन्दगी में जब हम किसी गहरे आघात से गुजरते हैं 
तो उसके छींटे 
ख़ुशी,दुःख सबमें नज़र आते हैं 
नहीं चाहते हुए भी कई बार मुँह से निकल जाता है !
इसमें सही-गलत की परिभाषा नहीं लागू हो सकती 
 क्योंकि थोडा-बहुत हर कोई इस रास्ते पर होता है 
.... 
पापा कहते थे -
किसी गहराई को मापने के लिए 
उस जगह खुद को रखो 
रखते रखते उम्र निकल गई 
और हम वहीँ अडिग नहीं खड़े रह सके 
जहाँ होना चाहिए था 
उल्टे हम उन लोगों की तरफ से बोलने लगे 
जिनकी नियत थी - हम उलझ जाएँ !
आह - 
हम उलझते गए 
और अपना मूल्यवान वक़्त खोते गए 
और सबकुछ होते हुए भी 
अम्मा की तरह खोने के गम जैसे धागे से 
कुछ बुनते गए 
यह कुछ - कितना खोखला है 
इससे न ठण्ड जाती है 
न ओढ़कर मीठे सपने आते हैं 
.... 
अब जाना, 
तुम भी जानो 
(सम्भवतः जानते भी होगे)
कि लीपापोती एक ज़रूरी पूजा है 
झूठ के अर्घ्य से यदि हम खुलकर हंस लेते हैं 
तो हर्ज ही क्या है मान लेने में 
!
ज़िन्दगी की चाल बड़ी तेज और रहस्यात्मक है 
कहीं जगमगाती धरती मिलती है 
तो कभी - एक क्षण में पैरों के नीचे से धरती हट जाती है 
किस उहापोह में हम अपने ही आगे मकड़ जाल बुन रहे हैं 
कौन फँसेगा ? 
फंस भी गया तो न हर्ष मना सकोगे 
न दुःख  … 
क्योंकि फिर हम तुम 
किसी और धारा में बह जायेंगे !!!!!!!!!!!!!!!!!!

श्रेष्ठता की चाभियों का गुच्छा 
कमर से लगाकर क्या होगा 
यदि एक झूठ को झूठ जानते हुए भी 
सच मानकर 
हम गले लगकर रो नहीं सके 
तो - सबकुछ व्यर्थ है 
रिश्तों की मजबूती धैर्य देती है 
और इसके लिए कुछ झूठ 
कुछ लीपापोती सबसे बड़ी पूजा होती है 
 

36 टिप्‍पणियां:

  1. अब जाना,
    तुम भी जानो
    (सम्भवतः जानते भी होगे)
    कि लीपापोती एक ज़रूरी पूजा है
    झूठ के अर्घ्य से यदि हम खुलकर हंस लेते हैं
    तो हर्ज ही क्या है मान लेने में
    !

    बहुत सुंदर , बहुत सुंदर

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  2. "हम गले लगकर रो नहीं सके
    तो - सबकुछ व्यर्थ है "
    .........

    आपकी अनुभूतियों को प्रणाम... सुन्दर जीवन दर्शण बुनती आपकी लेखनी को नमन !

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  3. मन के गहन द्वंद्व को दर्शाती बहुत ही अर्थपूर्ण रचना ! जीवन में कभी-कभी ऐसी स्थिति भी आती है जब सत्य को स्वीकारना असह्य हो जाता है तब झूठ की गोद में शरण लेना ही श्रेयस्कर लगता है चाहे अस्थाई रूप से ही सही कुछ समय के लिये मन मस्तिष्क को विश्राम मिल जाता है और कुछ समय पाकर असह्य सत्य भी ग्राह्य और सुपाच्य हो जाता है ! मननीय रचना !

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  4. जितना समझती हूँ
    उतना ही
    समझ से परे हो जाती है
    आपकी लिखी बाते
    सारगर्भित रचना
    !!

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  5. हम गले लगकर रो नहीं सके
    तो - सबकुछ व्यर्थ है
    रिश्तों की मजबूती धैर्य देती है
    और इसके लिए कुछ झूठ
    कुछ लीपापोती सबसे बड़ी पूजा होती है

    बहुत सुन्दर रचना.
    नई पोस्ट : आंसुओं के मोल

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  6. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (07-12-2013) "याद आती है माँ" “चर्चामंच : चर्चा अंक - 1454” पर होगी.
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है.
    सादर...!

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  7. सार्थक...लीपापोती से मन शांत हो जाए तो जरूरी है यह...
    बहुत ही अलग हटकर रचना...

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  8. दी कितनी अर्थपूर्ण कितनी गहन बातें हैं.....
    बार बार पढ़ रही हूँ.....इसे अपनी रचना बना रही हूँ......
    सादर
    अनु

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  9. अम्मा सोच लेना
    ही बहुत होता है
    अम्मा बनना
    होता होगा आसान
    किसी केलिये पर
    मेरे बस में नहीं होता है
    कैसे सोच सकता हूँ
    कैसे हो सकता हूँ
    इस जनम क्या
    सात जनम तक भी
    नहीं हो सकता हूँ
    पूरा आकाश कैसे
    मैं तो उसका एक
    टुकड़ा भी कभी
    नहीं हो सकता हुँ ! :(

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  10. बहुत सुन्दर प्रस्तुति..
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आप की इस प्रविष्टि की चर्चा शनिवार 07/12/2013 को चलो मिलते हैं वहाँ .......( हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल : 054)
    - पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया पधारें, सादर ....

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  11. बहुत कुछ कहती सारगर्भित रचना .......

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  12. झूठ अच्छाई के लिए हो तो उस सत्य से बेहतर हैं , जिससे किसी का भी भला न हो !
    माँ जानती है यह !

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  13. प्रशंसा से परे अमूल्य जीवन-दर्शन है आपकी यह रचना.

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  14. माँ और पिताजी दोनों सही है | हम अपने को पीड़ित की जगह पर रखकर ही उसकी पीड़ा को महसूस कर सकते हैं ,तटस्थ होकर नहीं|
    नई पोस्ट नेता चरित्रं
    नई पोस्ट अनुभूति

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  15. रिश्तों की मजबूती धैर्य देती है
    और इसके लिए कुछ झूठ
    कुछ लीपापोती सबसे बड़ी पूजा होती है
    SACH YAHI TO KATU SATYA HAI ...RASHMI JEE ...

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  16. रिश्तों की मजबूती धैर्य देती है
    और इसके लिए कुछ झूठ
    कुछ लीपापोती सबसे बड़ी पूजा होती है
    और ऐसे झूठ , को सत्य मानने में कोई हर्ज नहीं है..
    गहन अनुभव लिए रचना..

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  17. आपकी रचना को सुन्दर है कहूं तो बात छोटी लगती है !
    गहरा अनुभव होता है हर बार आपकी रचना में, दो तिन बार रचना शब्द न शब्द पढ़ती हूँ
    देर तक सोचते रह जाती हूँ ! उथला उथला पढना समझ में कहाँ आता है शब्दों के भीतर डुबकी लगानी पड़ती है तभी अर्थ स्पष्ट होते है !

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  18. is rachna ko padhkar lagta hai....jeevan ka saar...jeevan jeenay ki kala padh li.....shabd nahi mere pass....mehsus jaroor kar sakti hun

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  19. रचना के माध्याम से गहरी बात कही आप ने | बधाई आप को इस सुन्दर प्रस्तुति के लिए

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  20. बहुत सही कहा आपने ...
    प्रेरक रचना

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  21. जीवन की गहरी अनुभूतियाँ जी कर ही कही और सही जाती हैं ...
    देखिये अमा जाते जाते भी कितना कुछ करा रही है ... कर्मयोगी की तरह ...

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  22. ज़िन्दगी की चाल बड़ी तेज और रहस्यात्मक है
    कहीं जगमगाती धरती मिलती है
    तो कभी - एक क्षण में पैरों के नीचे से धरती हट जाती है
    किस उहापोह में हम अपने ही आगे मकड़ जाल बुन रहे हैं
    कौन फँसेगा ?
    फंस भी गया तो न हर्ष मना सकोगे
    न दुःख …
    क्योंकि फिर हम तुम
    किसी और धारा में बह जायेंगे !!!!!!!!!!!!!!!!!!
    वाह ! जीवन के सनातन दर्शन को निचोड़ कर चाँद पंक्तियों में रख दिया .. बहुत बढ़िया ..

    उत्तर देंहटाएं
  23. श्रेष्ठता की चाभियों का गुच्छा
    कमर से लगाकर क्या होगा
    यदि एक झूठ को झूठ जानते हुए भी
    सच मानकर
    हम गले लगकर रो नहीं सके
    तो - सबकुछ व्यर्थ है
    रिश्तों की मजबूती धैर्य देती है
    और इसके लिए कुछ झूठ
    कुछ लीपापोती सबसे बड़ी पूजा होती है

    कमाल कर दिया..जिस फ्लो में कविता जा रही थी उसे देख लगा नहीं कि अंत में इस निष्कर्ष पर पहुंचेगी...लेकिन जिस तरह से काव्य की धारा को मोड़कर आपने गहरे अर्थ के समंदर में पहुंचाया है वो बरबस ही वाह कहने को मजबूर करता है..लेकिन वाह कहने के बाद ये शब्द भी नाकाफी लगता है...अद्भुत, गहन अर्थलिये हुई रचना।।।

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  24. विगत को पुनः जीना और उसे इस प्रकार एक अभिव्यक्ति देना वास्तव में बड़ा कठिन होता है. लेकिन आपकी कवितायें सदा यह साहस करती हैं. दीदी, बस मन से महसूस करता हूँ!!

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  25. बहुत उम्दा भावपूर्ण प्रस्तुति...बहुत बहुत बधाई...

    नयी पोस्ट@ग़ज़ल-जा रहा है जिधर बेखबर आदमी

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  26. अधिकतर रिश्ते निभाये जा रहे हैं ! माँ के प्रति श्रद्धा को नमन !!

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  27. हम्म्म ……… कुछ उलझी कुछ सुलझी सी एक अबूझ पहेली सी ज़िंदगी कभी झूठ के सहारे झूलती तो कभी सचाई का दामन पकड़ घसीटती ये ज़िंदगी |

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  28. गहन अनुभव को प्रेषित करती आपकी यह रचना ..... ज़िंदगी में कुछ पल हंस या रो सकें भले ही झूठ के सहारे ....

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  29. अम्मा का लिखा हर दिन टाइप करती हूँ …

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  30. यदि एक झूठ को झूठ जानते हुए भी
    सच मानकर
    हम गले लगकर रो नहीं सके
    तो - सबकुछ व्यर्थ है
    रिश्तों की मजबूती धैर्य देती है
    और इसके लिए कुछ झूठ
    कुछ लीपापोती सबसे बड़ी पूजा होती है .....वाह!!! दी क्या बात है। देखा जाए तो सच ही तो है बिना झूठ और लीपापोती है के भी ज़िंदगी चल नहीं सकती।

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  31. संबंध स्थिरता दें, स्थायित्व दें, कुछ व्यक्त करें, कुछ लुप्त करें।

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