शोर से अधिक एकांत का असर होता है, शोर में एकांत नहीं सुनाई देता -पर एकांत मे काल,शोर,रिश्ते,प्रेम, दुश्मनी,मित्रता, लोभ,क्रोध, बेईमानी,चालाकी … सबके अस्तित्व मुखर हो सत्य कहते हैं ! शोर में मन जिन तत्वों को अस्वीकार करता है - एकांत में स्वीकार करना ही होता है
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ब्लॉग से इंस्टाग्राम तक की सभ्यता *****
हमने अपनी क़लम की दुनिया ब्लॉग से शुरू की थी। वह समय ऐसा था जैसे किसी शांत दोपहरी में अपनी डायरी खुली छोड़ दी जाए और कोई अनदेखा पाठक चुपचाप ...
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गंगा ! तुम परंपरा से बंधकर बहती, स्त्री तो हो किंतु परंपरा से अलग जाकर अबला अर्थ नहीं वहन करती वो रुपवती धारा हो जिसका वेग कभी लुप्त नही...
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सपने में भी अतीत के साए मुझे डराते हैं अलग-अलग रास्तों पर दहशत बनकर खड़े रहते हैं ! चीख ..अन्दर ही घुटकर रह जाती है खुली आँखों में फिर नींद ...
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एक अच्छी शुरुआत ... बहुत बहुत शुभकामनायें ...
जवाब देंहटाएंशुभकामनाऐं ।
जवाब देंहटाएंआपकी सोच बेहतरीन हे होगी , शुभकामनायें.
जवाब देंहटाएंअम्मा की स्मृति को नमन और आपकी इस पहल को तालियाँ. अम्मा के लिये इससे अच्छी कोई श्रद्धांजलि नहीं हो सकती. शुभकामनाएँ!!
जवाब देंहटाएंसच है इससे बेहतरीन माँ के लिए और कोई श्रद्धांजलि नहीं हो सकती
जवाब देंहटाएंइस सुन्दर प्रयास के लिए बहुत बहुत शुभकामनाएं !
अम्मा की स्मृतियों के अद्भुत संगम के साथ ''सरस्विता पुरस्कार'' निश्चित रूप से आपको बधाई का पात्र बनाता है ... आपका यह प्रयास सफलता के शिखर तक पहुँचे
जवाब देंहटाएंइन्हीं शुभकामनाओं के साथ
.... सादर
एक बेहतरीन प्रयास के लिए बधाई इससे उचित श्रद्दांजलि और हो ही नही सकती ……शुभकामनायें ।
जवाब देंहटाएंबहुत बहुत शुभकामनायें ...!!!!!
जवाब देंहटाएंअम्मा को शत शत नमन .....
जवाब देंहटाएंसुंदर प्रयास. शुभकामनाएँ
जवाब देंहटाएंअच्छी शुरुआत के लिए बधाईयाँ...
जवाब देंहटाएंबहुत अच्छा प्रयास है ! शुभकामनायें ....
जवाब देंहटाएंएक बहुत अच्छा प्रयास...हार्दिक शुभकामनायें...
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