31 अगस्त, 2009

इमरोज़



सपनों में दबे पांव कोई आता है
मेरी खिड़की पर एक नज़्म रख
चला जाता है
आँख खुलते नज़्म इमरोज़ बन जाती है

40 टिप्‍पणियां:

  1. bahut khoob......... izzat pesh karne ka anootha andaaz.........


    Regards.......

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  2. रश्मिप्रभा जी,

    एक सजदा किये जाने वाले रिश्ते को बड़े ही बेहतरीन अंदाज में प्रस्तुत किया और उन पंक्तियों ने तो जैसे पूरा फसाना ही कह दिया हो।

    सादर,

    मुकेश कुमार तिवारी

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  3. wah Rashmi ji....nazm aur usaka imroz ban jaana....bahut khoob....
    khoobsurut tassuvar ...badhai

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  4. सुन्‍दर शब्‍दों में व्‍यक्‍त यह चन्‍द पंक्तियां बहुत कुछ कहती हुई, बधाई

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  5. अमृता की नज़्म इमरोज़ के बिना पूरी ही नहीं हो सकती थी ..!!

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  6. मुझे बहुत पसंद आयीं ये पंक्तियाँ

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  7. चन्द पंक्तियो मे भावनाओ की संसार सिमट गई हो मानो ........वाह वाह

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  8. इमरोज़ को समझना और इमरोज़ का जिंदगी में आना हर किसी का नसीब नहीं ... इमरोज़ वो शख्स - जिसके प्यार में खुदा का स्पर्श है ... आपकी इस् नज़्म में वही स्पर्श महसूस होता है ...ILu...!

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  9. भावनाओ को सीमित शब्दों में आपने अच्छी तरह से अभिव्यक्त किया है......बहुत सुंदर.....

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  10. रश्मि जी... उम्र और तजुर्बे दोनों में बहुत छोटी हूँ आपकी रचना पर कुछ भी टिपण्णी करने के लिये... पर चंद शब्दों में जिस खूबसूरती से आपने इमरोज़ जी को तराशा है वो बहुत ही सुंदर है... पढ़ कर मन प्रसन्न हो गया... और नज़्म के साथजो फोटो लगाया है आपने वो दिल को छू लेने वाला है... अगर मैं गलत नहीं हूँ तो वो अमृता जी हैं उनके साथ फोटो में... अमृता जी के बारे में तो बहुत कुछ कहा और सुना गया है पर इमरोज़ जी की शख्सियत से लोग कम ही वाक़िफ़ हैं... उनसे रु-ब-रु करवाने का शुक्रिया...

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  11. प्यार का एक प्यारा सा अहसास ...कभी कभी बहुत थोड़े से शब्द इतनी खूबसूरत बात कह जाते हैं जो पूरी जिन्दगी नहीं कह पाती

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  12. बेहद खुबसूरत और नाजुक एहसासात लिए ..... वाकई निशब्द हो गया हूँ आज इस छोटे से लेख पे.... सलाम

    अर्श

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  13. इसे कहते है नई कविता ,एक बिलकुल अनूठा बिम्बविधान ! बहुत सुन्दर रश्मि जी ! अमृता प्रीतम को भावभीनी आदरांजलि !

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  14. aaj amrita ji ke janmdivas par amrita ji ke chahne walon ne panne bhar diye.....par aapki is rachna hi ham dil se tareef karte hai .......bas ab khamosh rahna hi uchit hoga....bilkul gulzaar sa'b ki trivani ki tarah.....Ishwar aapke lekhan ko aur shakti pradaan kare

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  15. आपके शब्दों ने तो ..वाकई निशब्द कर दिया .
    हेमंत कुमार

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  16. bat kahe pls ...........kon great hai amrita ya imroz .......... amrita ne sahir se payar kiya n imroz ne amrita se ........... imroz ne nibhaya ,pooja ,ibadat ki amrita ki ............ aaj shayad amrita bhi na kah pati jo aapke in shabdio mai kah diya awesome

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  17. क्या बात है. चार पंक्तियों में क्या क्या नहीं ?

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  18. पढ़ कर मोटी मोटी किताबों की व्यर्थता पर तरस आता है..अद्भुत!

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  19. Rashmi Di .. Sach hi kaha hai aapne bahut sundar abhivyakti hai kuch meri or se bhi --

    Imroz kahaan sab ko naseeb hota hai
    uske andar pyaar nahin ..
    masihaai hai
    wo tumhaare har dard ko marham de sakta hai
    kyun ki wo farishta hai ..

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  20. VAAH ..... AMRITA JI KE JANM DIN PAR KAHI ITNI KHOOBSOORAT BAAT ...... SACH MEIN SHABD GOONGE HO JATE HAIN AISE MEIN ....

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  21. बहुत कम ही लोग चंद लफ्जों में बहुत कुछ कह देने की काबिलियत रखते है . उनमे से आप एक है रश्मि जी ! बहुत शुक्रिया !!

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  22. इमरोज़ की मोहब्बत के ज़ज्बे को सच्चा सम्मान...

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  23. चंद पंक्तियाँ निःशब्द कर गईं.
    हार्दिक आभार इस अति भावनात्मक अभिव्यक्ति के लिए.

    चन्द्र मोहन गुप्त
    जयपुर
    www.cmgupta.blogspot.com

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  24. शब्दों में बुना हुवा एक ,प्रेम का जाल जो भावनाओ को बरबस ही बाया करता हे !बधाई .....
    महेश नागर "चिराग"

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  25. बेहद ख़ूबसूरत, लाजवाब और शानदार प्रस्तुती! चंद पंक्तियों में आपने इतना सुंदर वर्णन किया है की तारीफ के लिए अल्फाज़ कम पर गए!
    मेरे नए ब्लॉग पर आपका स्वागत है-
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com

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  26. इतने कम शब्दों मे इससे बेहतर नहीं कहा जा सकता. बहुत सुन्दर रश्मि जी

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  27. sirf teen panktiyan..sari kahani keh gayi....
    imroz prem ka paryay ban gaye hain..
    bahut sunder rachana......

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