20 अगस्त, 2011

तो चलो भी !



खामोशियों की चादरें
मैंने समेट दी हैं
चलो कहीं शोर करें ...
सो चुकी हैं संवेदनाएं
शिथिल हैं कर्तव्य सारे
चलो जागरण के गीत गायें ...
तय है - लोग बेरुखी से देखेंगे
कड़वे बोल बोलेंगे
बुरा नहीं ,
बहुत बुरा लगेगा
पर बीते दिनों को लौटाने का
और कोई रास्ता नहीं रहा
सोये रिश्तों को जगाने का
कोई विकल्प नहीं रहा ....
परेशान चेहरों की धुंध में
अपने भी बेगाने लगने लगे हैं
कभी पहचान मिले तो
अनजान बन गुजर जाते हैं
वक़्त ही वक़्त है
पर दिल नहीं
चलो एक धड़कता दिल ले आएँ
समझदारी के भारी भरकम चादर से निकलकर
कुछ बेवकूफाना हरकत करें
किसी खोये चेहरे से अकस्मात् पूछें -
'हुआ क्या है ' ...
चलो किसी चेहरे पर विश्वास की रेखा खींचें

अहम् की उपजाऊ धरती पर
दूरी के बीज डालना बन्द करो
इंतज़ार मत करो किसी के आने का
अपनी पुकार उसे दे दो
तरीका भी एक हद तक अच्छा लगता है
तरीके की जकड़न से निजात पाओ
खुलकर हंसो
बिना किसी विज्ञापन के
चेहरा चमक उठेगा ....
खिली खिली धूप में
खुली खुली साँसों में ही वजूद मिलेगा
तो चलो भी !

38 टिप्‍पणियां:

  1. अहम् की उपजाऊ धरती पर
    दूरी के बीज डालना बन्द करो
    इंतज़ार मत करो किसी के आने का
    अपनी पुकार उसे दे दो
    तरीका भी एक हद तक अच्छा लगता है
    तरीके की जकड़न से निजात पाओ
    खुलकर हंसो
    बिना किसी विज्ञापन के
    चेहरा चमक उठेगा ....
    खिली खिली धूप में
    खुली खुली साँसों में ही वजूद मिलेगा
    तो चलो भी !

    वाह, हमेशा की तरह बहुत सुंदर,
    विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

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  2. ज्यादा बेवकूफियां , थोड़ी सी समझदारी
    खुल कर हँसना ...
    जरुरी है !

    जीवन भरपूर जीने के लिए बेवकूफियां भी जरुरी है!
    सुन्दर बात!

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  3. आपके आह्वान से हमें इत्तेफ़ाक है। हम साथ हैं

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  4. मैं साथ हूँ ... चलो कोई बेवकूफाना हरकत करें ..कम से कम लोगों के चेहरे पर हंसी तो आएगी ...सब जैसे अपने अपने खोल में छिप गए हैं ... मन में उत्साह भरती अच्छी प्रस्तुति ..

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  5. बहुत सरलता से ..बहुत गंभीर बात लिखी है आपने...ख़ामोशी का आवरण हटा कर ...अच्छा-बुरा भूल कर ....क्यों न कुछ सच्चे दिल की बात करें ....थोड़ा हंस लें..थोड़ा बोल लें और ..थोड़ा रो भी लें ....सच्चा जीवन तो यही है ...सब भावनाएं समेट कर ...मैं फिर आ रही हूँ आपके पास.....!!!!

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  6. खुली खुली साँसों में ही वजूद मिलेगा
    तो चलो भी !

    हर शब्‍द एक आवाज लगाता हुआ मन के द्वार पर ...तुम पहल तो करो ...भावमय शब्‍दों के साथ बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

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  7. परेशान चेहरों की धुंध में
    अपने भी बेगाने लगने लगे हैं
    कभी पहचान मिले तो
    अनजान बन गुजर जाते हैं...

    बहुत सच कहा है...कभी कभी बेबकूफियाँ करना भी जीवन में ताज़गी और एक नयी ऊर्ज़ा भर देता है..ज़िंदगी को कभी नियम और कायदों से बाहर आकर भी जीना चाहिए. बहुत उत्कृष्ट प्रस्तुति..

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  8. अहम् की उपजाऊ धरती पर
    दूरी के बीज डालना बन्द करो

    यही तो मुश्किल है दीदी, हर कोई यही करते रहता है ...

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  9. रिश्तों को परिभाषित करती एक अच्छी कविता...

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  10. अहम् की उपजाऊ धरती पर
    दूरी के बीज डालना बन्द करो
    इंतज़ार मत करो किसी के आने का
    अपनी पुकार उसे दे दो
    तरीका भी एक हद तक अच्छा लगता है
    तरीके की जकड़न से निजात पाओ
    खुलकर हंसो
    बिना किसी विज्ञापन के
    चेहरा चमक उठेगा ....
    खिली खिली धूप में
    खुली खुली साँसों में ही वजूद मिलेगा
    तो चलो भी !
    बहुत सुंदर पंक्तियाँ ! सीधी दिल तक जाती हुईं!

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  11. अहम् की उपजाऊ धरती पर
    दूरी के बीज डालना बन्द करो
    theek kah rahi hain ....yahi ek upaye hai khush rahne ka .

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  12. कभी -कभी नियमों को तोड़ना अच्छा रहता है ......बहुत खूब

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  13. आत्मीयता के बीज बोये जायें, देश लहलहा जायेगा।

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  14. तरीका भी एक हद तक अच्छा लगता है
    तरीके की जकड़न से निजात पाओ.........सारे नियम तोड़ दो ..नियम पे चलना छोड़ दो...कभी कभार यूँ भी करना चाहिए

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  15. बहुत ही सुंदर कविता बधाई रश्मि जी

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  16. wowwwwwwwwwwww
    THIS
    IS
    THE
    SPIRIT

    :):):)

    CHALO ME TAIYAAR HUN.....

    CHALEEEEEEEEEEEEN ?????

    :)

    http://anamka.blogspot.com/2011/08/blog-post_20.html

    उत्तर देंहटाएं
  17. अहम् की उपजाऊ धरती पर
    दूरी के बीज डालना बन्द करो
    बहुत सुंदर पंक्तियाँ, सुंदर अभिव्यक्ति बधाई

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  18. परेशान चेहरों की धुंध में
    अपने भी बेगाने लगने लगे हैं
    कभी पहचान मिले तो
    अनजान बन गुजर जाते हैं

    बहुत ही गहरी बात
    सुन्दर कविता...

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  19. काश ..सभी एक साथ इस राह पर चलने लगे..

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  20. अहम् की उपजाऊ धरती पर
    दूरी के बीज डालना बन्द करो
    इंतज़ार मत करो किसी के आने का
    अपनी पुकार उसे दे दो

    जकडन से मुक्ति पाकर खुलकर हँसने की इच्छा हर मन में पल रही है

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  21. आ अब लौट चलें , नैन बिछाये बाहें पसारे तुझको पुकारे दिल ये तेरा ...सब लौटें दिल की तरफ

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  22. चलो एक धड़कता दिल ले आएँ
    समझदारी के भारी भरकम चादर से निकलकर
    कुछ बेवकूफाना हरकत करें
    किसी खोये चेहरे से अकस्मात् पूछें -
    'हुआ क्या है ' ...
    चलो किसी चेहरे पर विश्वास की रेखा खींचें

    Wah...Bahut hi Sunder

    उत्तर देंहटाएं
  23. भावमय शब्‍दों के साथ सुन्दर और बेहतरीन अभिव्‍यक्ति....

    उत्तर देंहटाएं
  24. अहम् की उपजाऊ धरती पर
    दूरी के बीज डालना बन्द करो
    इंतज़ार मत करो किसी के आने का
    अपनी पुकार उसे दे दो ...
    सच है कभी कभी जीवन भर इस अहम के कारण इंसान कुछ नहीं कर पाता ... अपनों से भी दूर रहता है ...

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  25. एक नयी शुरुआत.सच हर जगह कुछ समय के बाद कुछ नए के लिए जगह बनानी ही चाहिए

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  26. कोई हाथ भी ना मिलाएगा जो गले मिलोगे तपाक से...
    ये नए मिजाज़ का शहर है, ज़रा फासले से मिला करो...

    उत्तर देंहटाएं
  27. वक़्त ही वक़्त है
    पर दिल नहीं
    चलो एक धड़कता दिल ले आएँ
    समझदारी के भारी भरकम चादर से निकलकर
    कुछ बेवकूफाना हरकत करें !


    अहम् की उपजाऊ धरती पर
    दूरी के बीज डालना बन्द करो
    इंतज़ार मत करो किसी के आने का
    अपनी पुकार उसे दे दो !

    -आभार....

    उत्तर देंहटाएं
  28. चलो एक धड़कता दिल ले आएँ
    समझदारी के भारी भरकम चादर से निकलकर
    कुछ बेवकूफाना हरकत करें
    किसी खोये चेहरे से अकस्मात् पूछें -
    'हुआ क्या है ' ...
    चलो किसी चेहरे पर विश्वास की रेखा खींचें...bahut sunder,nek aur unche khyalaat.
    kaash hum sab aisa kar paayen.

    उत्तर देंहटाएं
  29. ओह आप कितना खुबसूरत लिखती हैं दीदी..... शब्द ही चुक गए मेरे तो आज.....

    बस आँखों में कुछ तिर आया
    एक कतरा सा-
    कुछ अधुरा......कुछ पूरा-सा
    रिश्तों को समझने की चरमराहट
    कल तक जो मेरे सीने में थी
    आज कहीं और भी सुन ली
    सिर्फ मेरी ही रूह का दिल नहीं धड़कता
    ये कश-म-कश तो
    रूहानी होती है__ शायद
    ____________

    बेज़ान सी ये ज़िन्दगी......बेज़ान से हम
    आ लौट के आजा
    कि तुझ बिन
    है जीना ना-मुमकिन

    गुंजन

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  30. aham hi to hai jo dooriyan bo raha hai, sabse pahale isa aham ko jala kar rakh kar den- phir dooriyan khud ba khud mit jayengi. rishte na khoon se palate hain aur na hi paise se - jahan jisake prati prem , sneh pala vahi apana aur pyara rishta ban jata hai.

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  31. बहुत सही कहा...

    खुलकर हंसो
    बिना किसी विज्ञापन के
    चेहरा चमक उठेगा ....
    खिली खिली धूप में
    खुली खुली साँसों में ही वजूद मिलेगा
    तो चलो भी !

    बहुत अच्छी रचना.

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  32. चलो कहीं शोर करें ...


    लोग बहुत खामोश हो गए हैं
    अब सच में शोर करने की जरुरत है

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  33. बहुत खूबसूरत एवं भावपूर्ण अभिवयक्ति....आभार

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  34. वक़्त ही वक़्त है
    पर दिल नहीं
    चलो एक धड़कता दिल ले आएँ
    समझदारी के भारी भरकम चादर से निकलकर
    कुछ बेवकूफाना हरकत करें
    किसी खोये चेहरे से अकस्मात् पूछें -
    'हुआ क्या है ' ...
    चलो किसी चेहरे पर विश्वास की रेखा खींचें |
    bahut khubsurat rachna |

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