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मेरे एहसास इस मंदिर मे अंकित हैं...जीवन के हर सत्य को मैंने इसमे स्थापित करने की कोशिश की है। जब भी आपके एहसास दम तोड़ने लगे तो मेरे इस मंदिर मे आपके एहसासों को जीवन मिले, यही मेरा अथक प्रयास है...मेरी कामयाबी आपकी आलोचना समालोचना मे ही निहित है...आपके हर सुझाव, मेरा मार्ग दर्शन करेंगे...इसलिए इस मंदिर मे आकर जो भी कहना आप उचित समझें, कहें...ताकि मेरे शब्दों को नए आयाम, नए अर्थ मिल सकें ...

05 January, 2012

मेरे ख्वाब



सघन मेघों की तरह कुछ मेरे ख्वाब हैं
जो बरसना चाहते हैं
पनपना चाहते हैं
किसी मीठे फल की तरह !
कुछ ख्वाब हैं इन्द्रधनुषी
जिनसे एक यादगार होली खेलना चाहती हूँ !
एक ख्याल है हिन्दुस्तां की राजकुमारी जैसे
जो जिल्लेइलाही के खून की सज़ा
माफ़ कर देना चाहती है
क्योंकि सलीम में ही वो आग नहीं थी
उसके कान ही हल्के थे
चाहता गर सलीम
तो होश में आते उन दीवारों को गिरा देता
जिसमें अनारकली चुनी गई थी !
एक वजूद है अलादीन के चिराग सा
जादुई छड़ी है
धरती को आसमां
आसमां को धरती बनाने का
बियाबान रास्तों में बिखेरने के लिए
कुछ खिलखिलाते बीज हैं
जिसकी खनक हर दरख्तों पे होगी
गानेवाली एक चिड़िया है
जो कभी खामोश नहीं होगी
प्रकृति के सन्देश देती रहेगी
सूर्योदय की चहक बन
चनाब से सोहणी को पुकारेगी
महिवाल की जीत बन
प्रेम को अमर कर जाएगी ...

31 टिप्पणियाँ:

अमित श्रीवास्तव ने कहा…

"सच्चा प्यार तो अमर ही होता है "

dheerendra ने कहा…

प्रेम को अमर कर जायेगी,सुंदर पन्तियाँ,एक अच्छी रचना,,,

WELCOME to new post--जिन्दगीं--

vidya ने कहा…

वाह रश्मि जी बहुत खूबसूरत रचना..
बेमिसाल ख़्वाबों से सजी..
सादर.

Anju ने कहा…

bahut hi khoobsurat .........!!!!!!!!!!!!

पी.सी.गोदियाल "परचेत" ने कहा…

माफ़ कर देना चाहती है
क्योंकि सलीम में ही वो आग नहीं थी
उसके कान ही हल्के थे
चाहता गर सलीम
तो होश में आते उन दीवारों को गिरा देता
जिसमें अनारकली चुनी गई थी बहुत बढ़िया प्रस्तुति!

कुश्वंश ने कहा…

चारो तरफ घूमती हुयी आपकी लेखनी प्रभाव छोड़ जाती है बेहतरीन बिम्बों के साथ बधाई

dinesh aggarwal ने कहा…

सुन्दर अभिव्यक्ति।
नये वर्ष की शुभकामनायें।

डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति ने कहा…

bahut sundar rachna ..prem me kitna apnapan kitna junoon tha .. isko bhi darshati rachna ...Prithak see..sundar

Rss Vaishali ने कहा…

ऊपर से गुजरती हुई खूबसूरत रचना !

वाणी गीत ने कहा…

सलीम में ही वह आग नहीं थी , उसके कान हल्के थे ...
एक पंक्ति में कितनी बड़ी बात छिपी है !

M VERMA ने कहा…

ख़ामोशी में ख्वाब उभरते हैं पर ख्वाब खामोश नहीं होते ...

सदा ने कहा…

इन ख्‍यालों से ही तो कुछ बातें आज भी क़ायम हैं ...बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

ऋता शेखर 'मधु' ने कहा…

क्योंकि सलीम में ही वो आग नहीं थी
उसके कान ही हल्के थे
चाहता गर सलीम
तो होश में आते उन दीवारों को गिरा देता
जिसमें अनारकली चुनी गई थी !

सुंदरता से कही गई सार्थक बात...

कुमार संतोष ने कहा…

बहुत खूब
सुन्दर अभिव्यक्ति ...

Anita ने कहा…

आप इसी तरह ख्वाबों को देखती रहें कुदरत उन्हें सच करती रहेगी...आमीन!

Suman ने कहा…

bahut achhi rachna ....

ASHA BISHT ने कहा…

WAAH...

rashmi ravija ने कहा…

सूर्योदय की चहक बन
चनाब से सोहणी को पुकारेगी
महिवाल की जीत बन
प्रेम को अमर कर जाएगी ..

सुन्दर रचना

रेखा ने कहा…

खूबसूरत अभिव्यक्ति ...

दीपिका रानी ने कहा…

सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर और खूबसूरत कविता

कविता रावत ने कहा…

गानेवाली एक चिड़िया है
जो कभी खामोश नहीं होगी
प्रकृति के सन्देश देती रहेगी
सूर्योदय की चहक बन
चनाब से सोहणी को पुकारेगी
महिवाल की जीत बन
प्रेम को अमर कर जाएगी ...
..prakriti aur pyar kabhi nahi mitta..
bahut badiya prernadayee rachna...

Patali-The-Village ने कहा…

बहुत खूबसूरत प्रस्तुति, आभार|

विशाल ने कहा…

एक ख्याल है हिन्दुस्तां की राजकुमारी जैसे
जो जिल्लेइलाही के खून की सज़ा
माफ़ कर देना चाहती है

bahut khoob.

NISHA MAHARANA ने कहा…

bahut khub.achcha likha hai

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

जग से सोखे,
बादल बनकर,
जग में फिर,
बरसा आयेंगे।

Mamta Bajpai ने कहा…

रश्मि जी ....बेमिसाल कितने खूबसूरत हैं भाव

संध्या शर्मा ने कहा…

एक वजूद है अलादीन के चिराग सा
जादुई छड़ी है
धरती को आसमां
आसमां को धरती बनाने का

महसूस किया हमने इसे अभी-अभी... आभार

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ ने कहा…

बहुत ख़ूब!!

Vaanbhatt ने कहा…

ख्वाब कुछ ऐसे ही होने चाहिए...जैसा हम चाहें वैसा ही देखें...

साकेत शर्मा ने कहा…

अच्छी प्रस्तुति

Pallavi ने कहा…

प्रकृति और सच्चा प्यार कभी नहीं मिटता...बहुत ही प्रभावशाली रचना ...