08 नवंबर, 2013

अम्मा तुम गीता का एक महत्वपूर्ण पन्ना हो




पहलू ….
किसी का भी एक नहीं होता
कृष्ण के भी कई पहलू हैं
अलग अलग पहलुओं का जिम्मेदार
न भगवान् होता है न इंसान !
कृष्ण के पहलू यशोदा की दृष्टि से जो होंगे
वो नन्द बाबा की दृष्टि से अलग ही होंगे
गोपिकाओं की अपनी बात
राधा का अपना प्रेम
ऊधो का अपना ज्ञान
ताड़का,कंस,शकुनी की अपनी सोच !
दुर्योधन ने तो बाँध लेने की धृष्टता दिखाई
कृष्ण के पहलू को कमज़ोर समझा !!
जिस कृष्ण के आगे पूरी सभा स्तब्ध थी
वहां दुर्योधन ने उन्हें 'ग्वाला' कहकर सोचा
कि वह श्रेष्ठ है !!!
कृष्ण तो गीता हैं
और मेरी अम्मा तुम उस गीता का एक महत्वपूर्ण पन्ना हो
जिसने पढ़ा ही नहीं
वह व्याख्या क्या करेगा
और कितनी करेगा !!!
हम तो गोपिकाओं की तरह तुम्हारी शिकायत भी करते रहे
और रहे प्रतीक्षित
कि कब तुम हमारी मटकी का उद्धार करो
ऊधो का ज्ञान हमारे लिए निरर्थक था
हम तो गोपिकाओं की झिड़कियों पर निहाल थे
…………।

अब जब तुम गोकुल छोड़ गई हो
तो जाना - तुम्हारे बिना कैसे रहेंगे !!!!!!!!!!!!!!!

24 टिप्‍पणियां:

  1. अम्मा कहाँ छोड़ पाती है
    महसूस तो होता रहता है
    कई कई बार जब जरूरत होती है
    वो दूर नहीं कहीं अपने ही
    आस पास होती है
    अम्मा सिर्फ एक पन्ना
    नहीं वो तो पूरी एक गीता होती है !

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  2. आज ज्यादा कमी खलती है
    अब तो मेरे जाने का दिन आता जा रहा है

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  3. इन पंक्तियों को पढ़कर अतिवेल नीरवता सी छा गयी है. बिलकुल निशब्द हूँ.

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  4. कृष्ण गोपियों के माध्यम से ... गोकुल नन्दन का विछोह और उसको सहना ... अम्मा की यादों से जुड़े रहने का प्रयास ... नमन है मेरा ...

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  5. बहुत सुन्दर भावों द्वारा नमन किया है।

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  6. गीता जीवन कि व्याख्या है...और माँ के बिना जीवन का उदभव ही सम्भव नहीं...

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  7. गहन अभिव्यक्ति..माँ को नमन..

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  8. माकी कमी तो पूरी नहीं होती..
    पर उनका प्रेम और आशीर्वाद सदैव अपने बच्चों के साथ है..
    माँ को नमन...

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  9. rashmi ji aap ke sunder bhav aur shabd man ko chhu gaye
    sunder prastuti
    rachana

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  10. माँ सारी पुस्‍तकों का सार है।

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  11. हर माँ यशोदा का रूप होती है और यशोदा कभी अपना गोकुल छोड़कर नहीं जाती...वह कल भी आस पास थी वह आज भी करीब है।

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  12. @और मेरी अम्मा तुम उस गीता का एक महत्वपूर्ण पन्ना हो
    जिसने पढ़ा ही नहीं
    वह व्याख्या क्या करेगा
    और कितनी करेगा !!!
    माँ गीता का महत्वपूर्ण पन्ना ही नहीं
    माँ संपूर्ण गीता है जिसे हर कोई अपने
    बुद्धि के अनुसार व्याख्या करता है
    पर वह किसी की व्याख्या में कहाँ समाती है !

    सार्थक रचना !

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  13. शब्द रहित गीता आलोकित है..

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  14. गीता की ही तरह माँ भी जीवन का सार है !
    अद्भुत उपमा !

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  15. निशब्द करती पोस्ट । अम्मा सदा आपके साथ रहेंगी |

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  16. आपके सोच और शब्दों में अम्मा हमेशा साथ है

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  17. सदर नमन .....कितने सुखद ............माँ का होना ........माँ के साथ होना ..........माँ के पास होना ......माँ का आस -पास .होना ....... .........सबसे दुखद .........माँ को खोना

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  18. मेरी अम्मा तुम उस गीता का एक महत्वपूर्ण पन्ना हो
    जिसने पढ़ा ही नहीं
    वह व्याख्या क्या करेगा
    और कितनी करेगा !!!
    माँ तो बस नि:शब्‍द कर जाती है ......

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