17 जनवरी, 2008

अमृत



मकसदों की आग तेज हो
मनोबल की हवाएँ हो
तो वो आग बुझती नहीं है
मंजिल पा कर ही दम लेती है...
आँधियाँ तो नन्हें दीपक से हार जाती हैं
सच है ,
क्षमताओं को बढाने के लिए
आँधी तूफ़ान का होना ज़रूरी होता है...
प्रतिभाएं तभी स्वरूप लेती हैं
जब वक़्त की ललकार होती है....
जो ज़मीन बंज़र दिखाई देती हैं
उससे उदासीन मत हो....
ज़रा नमी तो दो
फिर देखो वह क्या देती है
हाथ , दिल, मस्तिष्क , दृष्टि लिए
प्रभु तुम्हारे संग हैं
सपनो की बारीकियां देखो
फिर हकीकत बनाओ....
तुम्हारे ऊपर है
हाथ को खाली देखते हो
या सामर्थ्यापूर्ण!
मन अशांत हो
तो घबराओ मत
याद रखो ,
समुद्र मंथन के बाद ही
अमृत निकलता है....

1 टिप्पणी:

  1. प्रभु तुम्हारे संग हैं
    सपनो की बारीकियां देखो
    फिर हकीकत बनाओ....
    तुम्हारे ऊपर है
    हाथ को खाली देखते हो
    या सामर्थ्यापूर्ण!
    मन अशांत हो
    तो घबराओ मत
    याद रखो ,
    समुद्र मंथन के बाद ही
    अमृत निकलता है....

    सही कहा ...रात के बाद दिन है ..दुःख के बाद ही सुख है !

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अक्षम्य अपराध

उसने मुझे गाली दी .... क्यों? उसने मुझे थप्पड़ मारा ... क्यों ? उसने मुझे खाने नहीं दिया ... क्यों ? उसने उसने उसने क्यों क्यों ...