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मेरे एहसास इस मंदिर मे अंकित हैं...जीवन के हर सत्य को मैंने इसमे स्थापित करने की कोशिश की है। जब भी आपके एहसास दम तोड़ने लगे तो मेरे इस मंदिर मे आपके एहसासों को जीवन मिले, यही मेरा अथक प्रयास है...मेरी कामयाबी आपकी आलोचना समालोचना मे ही निहित है...आपके हर सुझाव, मेरा मार्ग दर्शन करेंगे...इसलिए इस मंदिर मे आकर जो भी कहना आप उचित समझें, कहें...ताकि मेरे शब्दों को नए आयाम, नए अर्थ मिल सकें ...

19 January, 2010

मुश्किल है !


टूटते तारे ने कहा
'मांगो मुझसे
जो चाह लो, मिलेगा '
मैंने कहा -
'तुम फिर से अपनी जगह पर आ जाओ'
धरती में समाहित तारा
बोला- मुश्किल है !

( कहने का तात्पर्य यह कि बड़ी-बड़ी इच्छाओं को पूरी करनेवाला भी खुद के लिए असमर्थ होता है )

29 टिप्पणियाँ:

Babli ने कहा…

आपने चंद पंक्तियों में इतनी खूबसूरती से जीवन के अर्थ को समझाया है कि आपकी इस रचना के बारे में जितनी भी तारीफ की जाये कम है! बहुत खूब!

Dipak 'Mashal' ने कहा…

Ek seekh de gayi ye laghu kavita Mammy ji...
Jai Hind...

ρяєєтι ने कहा…

yahi jivan hai- is jivan ka
yahi hai,
yahi hai,
yahi hai rang rup......ILu...!

Apanatva ने कहा…

bahut sunder! accha sandesh liye.

अजय कुमार ने कहा…

कम शब्दों में बड़ी गहरी बात

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

सबकी अपनी-अपनी होती मजबूरी हैं!
इच्छाएँ सब होती नही कभी पूरी हैं!!

shikha varshney ने कहा…

hmm aapne samjha dia achcha kia...varna mujhe to samjh nahi aata :) ...sahi baat kahi hai.

sangeeta swarup ने कहा…

रश्मि जी,

आपकी रचना जहाँ ये बता रही है की कभी कभी इच्छा पूरी करने वाला भी असमर्थ होता है वहाँ आपके कोमल मन को भी दर्शा रही है जो चाहता है की तारा अपनी जगह वापस आ जाये ,और कुछ नहीं चाहिए....भावप्रधान रचना...

Apanatva ने कहा…

baht bahut bahut sunder! aur vo bhe sanbesh detee huee.

jenny shabnam ने कहा…

शाश्वत सत्य की सहज सुन्दर अभिव्यक्ति, बधाई रश्मि जी!

अनिल कान्त : ने कहा…

kya khoob baat kahi aapne

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

बहुत खूब ..सच बात सुन्दर

दिगम्बर नासवा ने कहा…

गहरी बात ......... सच कहा .... कुछ ही सबदों में जीवन का गहरा दर्शन सिमेट दिया है .........

Einstein ने कहा…

क्या खूब कही हैं आपने इस लघु कविता के माधयम से बृहत् जिंदगी कि कशमकश को ...आभार ...

Avinash ने कहा…

hamesha ki tarah...man ko roshan karti hui rachna

Priya ने कहा…

ham to ye soch rahe hai ki aapne taare se kaha ki tum apni jagah par aa jao...and this is very meaningful :-)

मनोज कुमार ने कहा…

बहुत अच्छी रचना। बधाई।

sakhi with feelings ने कहा…

kya baat hai..bahut sunder bhav..phir se jaisa hai vaisa hona bahut mushkil hai har baat ke liye

राज भाटिय़ा ने कहा…

असमर्थ किसी की इच्छा क्या पुरी करेगा, बहुत सुंदर भाव.
धन्यवाद

अल्पना वर्मा ने कहा…

कविता के माध्यम से कितनी गहरी बात कह दी...बहुत ही अच्छी लगी यह कविता.

वाणी गीत ने कहा…

इच्छा पूरी करने वाला भी कभी विवश होता है ....
बहुत खूब लिखा ....कहा ....!!

संत शर्मा ने कहा…

सच कहा मासी जी, सामर्थ्यवान व्यक्ति भी निजी परिदृश्य में कई मामलों में असमर्थ होता है, हों सकता है | सच्ची कविता |

वन्दना ने कहा…

chand shabdon mein bahut hi gahri baat kah di..........ati sundar.

शोभना चौरे ने कहा…

bahut achhi rachna
hamari mangne ki prvrti to dekhiye
toote huo ko shara dena to door unhi se mangne lge .

richa ने कहा…

अपनी इक्षायें पूरी करने की काबिलियत हम सब में होती है बस आत्म-विश्वास नहीं होता की हम उन्हें पूरा कर सकते हैं इसीलिए कभी उस टूटते तारे, तो कभी भगवान का सहारा लेते हैं उन्हें पूरा करवाने के लिये... इक्षायें वो टूटता तारा नहीं पूरी करता बल्कि हमारा द्रढ़ निश्चय पूरी करता है... जिस दिन ये बात समझ जायेंगे क्या पता वो टूटा तारा भी वापस अपनी जगह वापस आ जाये :-)

संजय भास्कर ने कहा…

इच्छा पूरी करने वाला भी कभी विवश होता है ....
बहुत खूब लिखा ....कहा

Mithilesh dubey ने कहा…

रश्मि दीदी चरण स्पर्श
बहुत ही उम्दा व लाजवाब रचना लगी। बधाई स्वीकार करें

मस्तानों का महक़मा ने कहा…

जीवन को कुछ ही शब्दों मे समझ पाने की कोशिश सी दिखती है और शायद ये कोशिश ही जीवन को समझ पाना है। जिससे कि चंद शब्दों में कोई बात कही जा सके।

Dilbag Virk ने कहा…

chhoti-si kvita aur bhav kitne gahre

bdhaai ho