19 जनवरी, 2010

मुश्किल है !


टूटते तारे ने कहा
'मांगो मुझसे
जो चाह लो, मिलेगा '
मैंने कहा -
'तुम फिर से अपनी जगह पर आ जाओ'
धरती में समाहित तारा
बोला- मुश्किल है !

( कहने का तात्पर्य यह कि बड़ी-बड़ी इच्छाओं को पूरी करनेवाला भी खुद के लिए असमर्थ होता है )

29 टिप्‍पणियां:

  1. आपने चंद पंक्तियों में इतनी खूबसूरती से जीवन के अर्थ को समझाया है कि आपकी इस रचना के बारे में जितनी भी तारीफ की जाये कम है! बहुत खूब!

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  2. yahi jivan hai- is jivan ka
    yahi hai,
    yahi hai,
    yahi hai rang rup......ILu...!

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  3. सबकी अपनी-अपनी होती मजबूरी हैं!
    इच्छाएँ सब होती नही कभी पूरी हैं!!

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  4. hmm aapne samjha dia achcha kia...varna mujhe to samjh nahi aata :) ...sahi baat kahi hai.

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  5. रश्मि जी,

    आपकी रचना जहाँ ये बता रही है की कभी कभी इच्छा पूरी करने वाला भी असमर्थ होता है वहाँ आपके कोमल मन को भी दर्शा रही है जो चाहता है की तारा अपनी जगह वापस आ जाये ,और कुछ नहीं चाहिए....भावप्रधान रचना...

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  6. शाश्वत सत्य की सहज सुन्दर अभिव्यक्ति, बधाई रश्मि जी!

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  7. गहरी बात ......... सच कहा .... कुछ ही सबदों में जीवन का गहरा दर्शन सिमेट दिया है .........

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  8. क्या खूब कही हैं आपने इस लघु कविता के माधयम से बृहत् जिंदगी कि कशमकश को ...आभार ...

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  9. ham to ye soch rahe hai ki aapne taare se kaha ki tum apni jagah par aa jao...and this is very meaningful :-)

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  10. kya baat hai..bahut sunder bhav..phir se jaisa hai vaisa hona bahut mushkil hai har baat ke liye

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  11. असमर्थ किसी की इच्छा क्या पुरी करेगा, बहुत सुंदर भाव.
    धन्यवाद

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  12. कविता के माध्यम से कितनी गहरी बात कह दी...बहुत ही अच्छी लगी यह कविता.

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  13. इच्छा पूरी करने वाला भी कभी विवश होता है ....
    बहुत खूब लिखा ....कहा ....!!

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  14. सच कहा मासी जी, सामर्थ्यवान व्यक्ति भी निजी परिदृश्य में कई मामलों में असमर्थ होता है, हों सकता है | सच्ची कविता |

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  15. chand shabdon mein bahut hi gahri baat kah di..........ati sundar.

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  16. bahut achhi rachna
    hamari mangne ki prvrti to dekhiye
    toote huo ko shara dena to door unhi se mangne lge .

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  17. अपनी इक्षायें पूरी करने की काबिलियत हम सब में होती है बस आत्म-विश्वास नहीं होता की हम उन्हें पूरा कर सकते हैं इसीलिए कभी उस टूटते तारे, तो कभी भगवान का सहारा लेते हैं उन्हें पूरा करवाने के लिये... इक्षायें वो टूटता तारा नहीं पूरी करता बल्कि हमारा द्रढ़ निश्चय पूरी करता है... जिस दिन ये बात समझ जायेंगे क्या पता वो टूटा तारा भी वापस अपनी जगह वापस आ जाये :-)

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  18. इच्छा पूरी करने वाला भी कभी विवश होता है ....
    बहुत खूब लिखा ....कहा

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  19. रश्मि दीदी चरण स्पर्श
    बहुत ही उम्दा व लाजवाब रचना लगी। बधाई स्वीकार करें

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  20. जीवन को कुछ ही शब्दों मे समझ पाने की कोशिश सी दिखती है और शायद ये कोशिश ही जीवन को समझ पाना है। जिससे कि चंद शब्दों में कोई बात कही जा सके।

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