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मेरे एहसास इस मंदिर मे अंकित हैं...जीवन के हर सत्य को मैंने इसमे स्थापित करने की कोशिश की है। जब भी आपके एहसास दम तोड़ने लगे तो मेरे इस मंदिर मे आपके एहसासों को जीवन मिले, यही मेरा अथक प्रयास है...मेरी कामयाबी आपकी आलोचना समालोचना मे ही निहित है...आपके हर सुझाव, मेरा मार्ग दर्शन करेंगे...इसलिए इस मंदिर मे आकर जो भी कहना आप उचित समझें, कहें...ताकि मेरे शब्दों को नए आयाम, नए अर्थ मिल सकें ...

14 February, 2010

दिल का हिस्सा


मैं दिल का वह हिस्सा हूँ
जिससे तुम कहो ना कहो
वह सुनता है
धड़कता है.....
कई बार आँखें नम होती हैं
पलकों पे ठहरी बूंद
तुम्हारी परछाईं बन जाती है

33 टिप्पणियाँ:

Pankaj Upadhyay ने कहा…

यही तो खासियत है कि आप सब सुन लेते हो... और वो कह नही पाते..

एक साइलेन्स के थ्रू बात करना सिर्फ़ प्यार मे डूबे दो दिलो को आता है..

बहुत बढिया..

sangeeta swarup ने कहा…

आंसू परछाईं बन जाते हैं....बहुत नयी सी सोच....और दिल को छूने वाली....

ρяєєтι ने कहा…

aur wahi parchayi jine ka sabab banti hai, harpal saath chalti hai...ILu...!

VIJAY TIWARI " KISLAY " ने कहा…

अच्छा लगा पढ़कर.
- विजय

sakhi with feelings ने कहा…

वो बिना कहे सब सुन एलन ही तो सच्चा पयर है जो दिल से निकलता है और धडकन बन जाता है

महफूज़ अली ने कहा…

मम्मी.... बहुत सुंदर कविता..... है....

राज भाटिय़ा ने कहा…

रशिम जी मै प्रगति मेदान नही जा सका, बस समय की कमी के कारण, वरना बहुत सी किताबे खरीद कर लाता, आप की कविता हमेशा की तरहा बहुत सुंदर

अल्पना वर्मा ने कहा…

गहन भाव लिए आप की कविता दिल में उतर जाती है..

---दिल के उस हिस्से को तलाशने जा रही हूँ.

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत गहन!!

Mrs. Asha Joglekar ने कहा…

इतनी प्यारी छोटी सी कविता और इतना गंभीर भाव ।

manav vikash vigan aur adhatam ने कहा…

bahoot khoob prabha jee pant jee kee manas putree hone ke sath aap me vo khobiya bhee hai

डिम्पल ने कहा…

khamoshi ki zuban koee koee sunta hai..

नीरज गोस्वामी ने कहा…

लाजवाब रचना...वाह रश्मि जी इसबार इतने कम शब्दों में कितनी सारी बात कह दी आपने..वाह...
नीरज

Apanatva ने कहा…

bahut bhapoorn rachana........

वन्दना ने कहा…

ek mook abhivyakti.

अनिल कान्त : ने कहा…

आपके शब्दों में हमेशा कुछ खास होता है

ज्योति सिंह ने कहा…

aapke blog par kai baar aai tippani bhi ki magar aap shayad rasta bhatak gayi yaa na khush hai ,jo gantanra divas par bhi badhai na de saki ,waise main aakar aksar padhti hoon magar sankochvash tippani nahi kar pati ,aaj man vash me nahi raha isliye padhne ke saath comment bhi karke jaa rahi hoon ,baat dilo ki rahi shayad vajah yahi hui ,haq se kah diya aage dekhe kya ....
rachna to aapki taarife kabil hi rahti hai aur baat phir dil ki hai
to kuchh kahne ki jaroort hi nahi .

परमजीत बाली ने कहा…

बहुत बढ़िया!!

संजय भास्कर ने कहा…

इतनी प्यारी छोटी सी कविता और इतना गंभीर भाव ।

दिगम्बर नासवा ने कहा…

गहरे अर्थ सिमेटे आपकी रचना .... कुछ ही शब्दों का लंबा सिलसिला ....

रोहित ने कहा…

or vaastavikta yahi hai ki wahi dil ka hissa humara atrang sathi hota hai,jo humare acche bure ka sakshi bhi hai...
aapki yeh rachna dil ko sparsh karti hai maa'm.
bahut accha laga.

jenny shabnam ने कहा…

dil kee baat dil tak pahunchi, dil ne samjha aur dil bol utha... waah...badhai rashmi ji.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

NICE.

रचना दीक्षित ने कहा…

बहुत प्रभावशाली रचना सुंदर दिल को छूते शब्द

usha rai ने कहा…

बहुत सुंदर है -दिल और आंसू के साथ की कविता ! बधाई स्वीकारें !

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

रश्मि जी दुविधाओं के बीच बहुत अंतराल से आज पोस्ट डाली ....पहला कमेन्ट आपका देख हैरानी हुई .....!!

आपके संकलन में कवितायें सिर्फ आपकी हैं या संयुक्त रूप में निकाली है ....विस्तार से नहीं लिखा आपने ....कुछ विस्तार से बताइए ....संपादन आपने किया प्रकाशक कौन है .....??

रंजना ने कहा…

वाह...क्या बात कही आपने...वाह....

MUFLIS ने कहा…

कविता ,,,,
संक्षिप्त होते हुए भी
बहुत प्रभावशाली बन पडी है
भावनाओं की गहराई स्वयं बात कर रही है
अभिवादन .

Jyotsna Pandey ने कहा…

बहुत कम शब्दों में बहुत गहरी बात ....
आंसुओं का परछाईं बन जाना दिल के करीब लाता है.......

प्रणाम के साथ शुभकामनाएँ.......

Ashish (Ashu) ने कहा…

आपकी रचना का कोई जवाब नही पर इस बार फोटो सच मे बहुत कुछ कह गई

गौतम राजरिशी ने कहा…

संक्षिप्त किंतु सुंदर।

आपकी किताब ले आये हैं मैम...उस दिन कश्मीर में इतनी बर्फबारी हुई थी कि सारे रस्ते ब्लौक थे...तो पुस्तक-मेले में दो दिन बाद पहुंच पाया था। शैलेश जी बता रहे थे विमोचन के बारे में। नुकसान मेरा ही था।

दीपक 'मशाल' ने कहा…

Jitne kam shabd utni hi sundar baat kaise kah leti hain aap mammy ji..?

anjana ने कहा…

छोटी सी लेकिन शब्दो की गहराई लाजवाब ।