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मेरे एहसास इस मंदिर मे अंकित हैं...जीवन के हर सत्य को मैंने इसमे स्थापित करने की कोशिश की है। जब भी आपके एहसास दम तोड़ने लगे तो मेरे इस मंदिर मे आपके एहसासों को जीवन मिले, यही मेरा अथक प्रयास है...मेरी कामयाबी आपकी आलोचना समालोचना मे ही निहित है...आपके हर सुझाव, मेरा मार्ग दर्शन करेंगे...इसलिए इस मंदिर मे आकर जो भी कहना आप उचित समझें, कहें...ताकि मेरे शब्दों को नए आयाम, नए अर्थ मिल सकें ...

09 February, 2010

कुछ कह दो


कुछ भी पुराना नहीं
कुछ भी अनजाना नहीं
कुछ भी अनकहा नहीं
कुछ भी अनसुना नहीं
फिर भी क्यूँ हैं हम अजनबी से
क्यूँ ओढ़ ली है हमने
ख़ामोशी की चादरें
क्यूँ हमने अपनी-अपनी सरहदें बना ली हैं

प्यार की बातें भी तो
हमने ही की थीं
एहसास की बातें
हमने ही की थीं
तो फिर क्यूँ
-
आज आँखें वीरान हैं
क्यूँ दिलों की धरती
बाँझ हुई जाती है
मौन तोड़ो
कुछ कह भी दो !

36 टिप्पणियाँ:

संजय भास्कर ने कहा…

बहुत सुंदर पंक्तियों में पिरोई गई........ एक बहुत ही सुंदर रचना....

संजय भास्कर ने कहा…

Bahut hi manbhawan rachna.

Babli ने कहा…

बहुत ख़ूबसूरत रचना लिखा है आपने! बधाई!

arun c roy ने कहा…

"maun todo
kuch keh bhi do"

rishton ke beech maun naa apne liye naa samaj ke liye achha hai... vyapak sandarbh ke baat ko kitni sahjta se kehti hain aap !

महफूज़ अली ने कहा…

मम्मी जी......बहुत ही सुंदर शब्दों में पिरोई गई.....एक बहुत सुंदर रचना.....

shikha varshney ने कहा…

bas shayad vaqt ki kasauti hoti hai....bahut bhavpurn likha hai di!

संत शर्मा ने कहा…

आज के दौर में दिलों में बढती दूरियों से पीड़ित मनःस्थिति को सुन्दर शब्द दिया आपने | सुन्दर कविता |

kase kahun?by kavita. ने कहा…

bahut sunder bhav bahut gahari baat.

M VERMA ने कहा…

मौन भी तो बहुत कुछ कहता है
सुन्दर भाव और अभिव्यक्ति की कविता

वन्दना ने कहा…

maun todo
kuch kah bhi do

uff ! ye panktiyan dil cheer gayin ......sab kuch ankah sama gaya hai inhi mein.

अमिताभ मीत ने कहा…

"मौन तोड़ो
कुछ कह भी दो ....."

क्या बात है. बेहतरीन है. बहुत बढ़िया.

वाणी गीत ने कहा…

कुछ भी अनकहा नहीं...
कुछ भी अनसुना नहीं ..
इसलिए ही तो नहीं खिंच गयी कहीं सरहदें ...
ज्यादा नजदीकियां बन गयी दूरियों का सबक कही ...
भीतर जितना कोलाहल था बाहर उतना घटा मौन ....
घुटने दम लगा मेरा जब गहराया मौन ....!!

विचारों का दर्पण ने कहा…

बहुत सुंदर रचना ...

Ravi Rajbhar ने कहा…

Very nice poem di, aur ek aajka sach bhi.

निर्मला कपिला ने कहा…

क्या कहें आपकी कविता ही बहुत कुछ कह रही है। सुन्दर रचना के लिये बधाई

निर्मला कपिला ने कहा…

क्या कहें आपकी कविता ही बहुत कुछ कह रही है। सुन्दर रचना के लिये बधाई

मनोज कुमार ने कहा…

आज कविता और पाठक के बीच दूरी बढ़ गई है। संवादहीनता के इस माहौल में आपकी यह कविता इस दूरी को पाटने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।

Dr. RAMJI GIRI ने कहा…

बुद्धिजीवियों की गणना और प्रकार में बढ़ोत्तरी हो गई है ,इसलिए .....

दीपक 'मशाल' ने कहा…

us qalam ki tareef karoon ya syahi ki ya un hathon ki jisne ye kavita likhi??? chitra bhi bahut sundar lagaya mammy ji...

GAURAV VASHISHT ने कहा…

Sambandho ki khamoshi ko
bahut hi sundar dhang se
keh diya di aapne
badhai

jenny shabnam ने कहा…

hamesha ki tarah uttam kriti, badhai rashmi ji.

दिगम्बर नासवा ने कहा…

मौन तोडो
कुछ कह भी दो ...

रश्मि जी .. नमस्कार
सच है कभी कभी मौन असहनीय हो जाता है ...... चीख कर सब कुछ कहना और सुनना चाहता है .... बहुत हो गहरे ज़ज्बात लिए रचना ......

रंजना ने कहा…

अपनों के बीच संवादहीनता के उपजी टीस को बखूबी आपने शब्द दिए हैं...
भावुक करती सुन्दर रचना...

लोकेन्द्र ने कहा…

मौन रह के ही कुछ कहना चाहूँगा......

Apanatva ने कहा…

Bahut sunder rachana..........

Pankaj Trivedi ने कहा…

रश्मिजी,
आपकी कविताओ मे जो संवेदना है,
जीवन के हर पहलु की अनुभूती की शब्दमाला बनाने क
सामर्थ्य है, वाकई काबिले तारीफ है. हालांकी मै तो उसमे
शब्दस्वामी पन्तजी के आशीर्वाद को ही देखता हू.
मगर आशीर्वाद के साथ् खुद का भी तो कुछ होना चाहिए.
जो ईश्वरने खुले हाथो से दिया है...
- पंकज त्रिवेदी

Pankaj Trivedi ने कहा…

रश्मिजी,
आपकी कविताओ मे जो संवेदना है,
जीवन के हर पहलु की अनुभूती की शब्दमाला बनाने क
सामर्थ्य है, वाकई काबिले तारीफ है. हालांकी मै तो उसमे
शब्दस्वामी पन्तजी के आशीर्वाद को ही देखता हू.
मगर आशीर्वाद के साथ् खुद का भी तो कुछ होना चाहिए.
जो ईश्वरने खुले हाथो से दिया है...
- पंकज त्रिवेदी

Devendra ने कहा…

संवाद से कई समस्याएं हल हो जाती हैं.
...अच्छा सन्देश देती कविता...बधाई.

Babli ने कहा…

महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें!

richa ने कहा…

लफ़्जों का पुल हर रिश्ते को बांधे रखता है... एक हँसते खिलखिलाते रिश्ते के बीच ये मौन कब, कैसे, क्यूँ आ जाता है... पता नहीं... पर वो हम ही थे जिसने वो रिश्ता सजाया था और वो हम ही हैं जो उसे बचा सकते हैं इस मौन को तोड़ के...

रचना दीक्षित ने कहा…

बहुत प्रभावशाली रचना सुंदर दिल को छूते शब्द . सच ही कहा है. कुछ लोग आदतन ही सब कुछ जान कर अनजान बनते हैं या ये सिर्फ एक इत्तिफाक होता है?????????????????

श्रद्धा जैन ने कहा…

bahut sunder abhivayakti
kuch kah bhi do
kavita dil tak gahre jaakar chhuti rahi

JHAROKHA ने कहा…

आदरणीया रश्मि जी, बहुत सुन्दर शब्दों में आपने बेहतरीन रचना लिखी है।---साथ ही चित्र भी आकर्षक लगा है। शुभकामनायें। पूनम

manav vikash vigan aur adhatam ने कहा…

aap ka mere blog par aakar utsah baradan karana achcha laga aap ke rachana uttam hai muka mila to ise jaroor padunga

Pankaj Upadhyay ने कहा…

aapkee ek aur kavita hi iska javab deti hai...

waah 'kuch kah do'... waah

Mrs. Asha Joglekar ने कहा…

आज के दौर में संवाद हीनता एक बडी समस्या है क्यूं कि हम रिश्ते में अनबन का सामना करने से बचते हैं ।
इसी भाव को शब्दों में ढालती है आपकी यह कविता