शब्दों की यात्रा में, शब्दों के अनगिनत यात्री मिलते हैं, शब्दों के आदान प्रदान से भावनाओं का अनजाना रिश्ता बनता है - गर शब्दों के असली मोती भावनाओं की आँच से तपे हैं तो यकीनन गुलमर्ग यहीं है...सिहरते मन को शब्दों से तुम सजाओ, हम भी सजाएँ, यात्रा को सार्थक करें....
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मेरे एहसास इस मंदिर मे अंकित हैं...जीवन के हर सत्य को मैंने इसमे स्थापित करने की कोशिश की है। जब भी आपके एहसास दम तोड़ने लगे तो मेरे इस मंदिर मे आपके एहसासों को जीवन मिले, यही मेरा अथक प्रयास है...मेरी कामयाबी आपकी आलोचना समालोचना मे ही निहित है...आपके हर सुझाव, मेरा मार्ग दर्शन करेंगे...इसलिए इस मंदिर मे आकर जो भी कहना आप उचित समझें, कहें...ताकि मेरे शब्दों को नए आयाम, नए अर्थ मिल सकें ...
वो जो करवट ले के शायद सोई ,शायद जागी बाँहों में भरे नज्मों को पलकें उठती है धीमे से मुस्काती है बंद होठो से कुछ कहती कुछ गुनगुनाती है सुनती हूँ उसे ,जानती हूँ नज्म है खुद एक वो तभी तो अकेली कहाँ होती है नज्म बहती है रगों में उसके नज्म के साथ जीती है नज्म 'उनमे' सांस लेती है फिर.............उनके पास ? नही ,उनके भीतर ,बहुत भीतर गहराई में नज्म उनमे,वो नज्म में जीती है mere blog pr aayengi aap ? moon-uddhv.blogspot.com pr
38 टिप्पणियाँ:
दीदी चरण स्पर्श
बहुत ही उम्दा बात कह दी आपने चन्द शब्दो में , लाजवाब ।
सच...ईश्वर प्रदत्त जब ये विधा साथ हो...फिर अकेलापन कैसा??
"शुभकामनाएँ..."
प्रणव सक्सैना amitraghat.blogspot.com
bhoot khoob chotee baat me sab kah diya
bhoot khoob chotee baat me sab kah diya
वाह...वाह...वाह...
wah di,
kam shabdon me , sab keh diya
waoooooo
छोटी सी प्यारी सी तिन पंक्तियों में आपने सब कुछ कह डाला! बहुत खूब! आपकी लेखनी को सलाम!
waooooooooooooooooooooo
नज्मों की सांसों से
दिल धड़कता है
लगता है कि
अभी हम जिंदा हैं....
बहुत खूबसूरती से लिखा है इन चंद शब्दों में आपने अपनी पूरी दास्तान ...बहुत खूब
चन्द शब्दों में ही रचना अपनी सम्पूर्णता व्यक्त करती हुई, भावाभिव्यक्ति की रिश्मप्रभा प्रवाहित कर रही है। लाजवाब रचना। बहुत आभार!!
अगर "गागर में सागर" शब्द का अर्थ जानना हो तो आपकी रचना को पढना पर्याप्त होगा. अद्भुत...रचना.
नीरज
gaagar mein saagar bhar diya.
achchha laga
achchha laga
वो जो करवट ले के शायद सोई ,शायद जागी
बाँहों में भरे नज्मों को पलकें उठती है
धीमे से मुस्काती है
बंद होठो से कुछ कहती
कुछ गुनगुनाती है
सुनती हूँ उसे ,जानती हूँ
नज्म है खुद एक वो
तभी तो अकेली कहाँ होती है
नज्म बहती है रगों में उसके
नज्म के साथ जीती है
नज्म 'उनमे' सांस लेती है
फिर.............उनके पास ? नही ,उनके भीतर ,बहुत भीतर गहराई में नज्म उनमे,वो नज्म में जीती है
mere blog pr aayengi aap ?
moon-uddhv.blogspot.com pr
बहुत ही दिल को छू लेने वाली बात कही आपने
वाह ... नज़्म अक्सर दिल के आस पास होती है ... ग़ज़ब का लिखा है .
dhai aakhar ke baad sabse chhoti aur sampoorn abhivyakti.. sachmuch anupam....
वाह ....... खुशनसीब नज़्मे ... Ilu...!
सच है | कम शब्दों में सुन्दर भावपूर्ण अभिव्यक्ति |
khoob ........kaha........
waah!
Aah...chitr bhi kya khoob !
सही कहा है
बहुत खूब --- ढेर सारी बाते कर दी आपने तीन लाईनों में
वाह जी!!
नज्म साथ है तो अकेलापन कैसा
gazab...rashmi ji,shubhkamnayen.
कमाल की लेखनी है आपकी!
BAHUT KHOOB MAA'M!
ताजा हवा के एक झोंके समान
आज तो दिल ने ही वाह वाह कह दी हम से पुछे वगेर.
बहुत सुंदर जी
बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति ।
अति सुन्दर .....
adar jog rashmi ji, bahootkhoob, aisi hi meri rachana hai jo aap ko nazar karna chahuga..
'' manav mano ek phoola hua gubaaa'''
sadar
aapse do teen kavitae chootee hai jab samay mile dekh leejiyega .
sach hi hai jiska saathi aesa ho wo tanha kahan ?bahut khoob
होली और मिलाद उन नबी की हार्दिक शुभकामनायें !
भावो की अभिव्यक्ति को आपने बहुत लम्बी उरान दी है ..
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