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मेरे एहसास इस मंदिर मे अंकित हैं...जीवन के हर सत्य को मैंने इसमे स्थापित करने की कोशिश की है। जब भी आपके एहसास दम तोड़ने लगे तो मेरे इस मंदिर मे आपके एहसासों को जीवन मिले, यही मेरा अथक प्रयास है...मेरी कामयाबी आपकी आलोचना समालोचना मे ही निहित है...आपके हर सुझाव, मेरा मार्ग दर्शन करेंगे...इसलिए इस मंदिर मे आकर जो भी कहना आप उचित समझें, कहें...ताकि मेरे शब्दों को नए आयाम, नए अर्थ मिल सकें ...

23 February, 2010

.....!


मैं अकेली कहाँ
और कब?
नज्में मेरे पास सांसें लेती हैं

38 टिप्पणियाँ:

Mithilesh dubey ने कहा…

दीदी चरण स्पर्श

बहुत ही उम्दा बात कह दी आपने चन्द शब्दो में , लाजवाब ।

rashmi ravija ने कहा…

सच...ईश्वर प्रदत्त जब ये विधा साथ हो...फिर अकेलापन कैसा??

Amitraghat ने कहा…

"शुभकामनाएँ..."
प्रणव सक्सैना amitraghat.blogspot.com

manav vikash vigyan aur adytam ने कहा…

bhoot khoob chotee baat me sab kah diya

manav vikash vigyan aur adytam ने कहा…

bhoot khoob chotee baat me sab kah diya

रंजना ने कहा…

वाह...वाह...वाह...

GAURAV VASHISHT ने कहा…

wah di,

kam shabdon me , sab keh diya
waoooooo

Babli ने कहा…

छोटी सी प्यारी सी तिन पंक्तियों में आपने सब कुछ कह डाला! बहुत खूब! आपकी लेखनी को सलाम!

GAURAV VASHISHT ने कहा…

waooooooooooooooooooooo

sangeeta swarup ने कहा…

नज्मों की सांसों से
दिल धड़कता है
लगता है कि
अभी हम जिंदा हैं....

बहुत खूबसूरती से लिखा है इन चंद शब्दों में आपने अपनी पूरी दास्तान ...बहुत खूब

नरेन्द्र व्यास ने कहा…

चन्द शब्दों में ही रचना अपनी सम्पूर्णता व्यक्त करती हुई, भावाभिव्यक्ति की रिश्मप्रभा प्रवाहित कर रही है। लाजवाब रचना। बहुत आभार!!

नीरज गोस्वामी ने कहा…

अगर "गागर में सागर" शब्द का अर्थ जानना हो तो आपकी रचना को पढना पर्याप्त होगा. अद्भुत...रचना.
नीरज

वन्दना ने कहा…

gaagar mein saagar bhar diya.

barakha ने कहा…

achchha laga

barakha ने कहा…

achchha laga

indu puri ने कहा…

वो जो करवट ले के शायद सोई ,शायद जागी
बाँहों में भरे नज्मों को पलकें उठती है
धीमे से मुस्काती है
बंद होठो से कुछ कहती
कुछ गुनगुनाती है
सुनती हूँ उसे ,जानती हूँ
नज्म है खुद एक वो
तभी तो अकेली कहाँ होती है
नज्म बहती है रगों में उसके
नज्म के साथ जीती है
नज्म 'उनमे' सांस लेती है
फिर.............उनके पास ? नही ,उनके भीतर ,बहुत भीतर गहराई में नज्म उनमे,वो नज्म में जीती है
mere blog pr aayengi aap ?
moon-uddhv.blogspot.com pr

डॉ.राधिका उमडे़कर बुधकर ने कहा…

बहुत ही दिल को छू लेने वाली बात कही आपने

दिगम्बर नासवा ने कहा…

वाह ... नज़्म अक्सर दिल के आस पास होती है ... ग़ज़ब का लिखा है .

arun c roy ने कहा…

dhai aakhar ke baad sabse chhoti aur sampoorn abhivyakti.. sachmuch anupam....

ρяєєтι ने कहा…

वाह ....... खुशनसीब नज़्मे ... Ilu...!

संत शर्मा ने कहा…

सच है | कम शब्दों में सुन्दर भावपूर्ण अभिव्यक्ति |

Apanatva ने कहा…

khoob ........kaha........

अल्पना वर्मा ने कहा…

waah!

Aah...chitr bhi kya khoob !

M VERMA ने कहा…

सही कहा है
बहुत खूब --- ढेर सारी बाते कर दी आपने तीन लाईनों में

Udan Tashtari ने कहा…

वाह जी!!

अजय कुमार ने कहा…

नज्म साथ है तो अकेलापन कैसा

jenny shabnam ने कहा…

gazab...rashmi ji,shubhkamnayen.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

कमाल की लेखनी है आपकी!

रोहित ने कहा…

BAHUT KHOOB MAA'M!

मनोज कुमार ने कहा…

ताजा हवा के एक झोंके समान

राज भाटिय़ा ने कहा…

आज तो दिल ने ही वाह वाह कह दी हम से पुछे वगेर.
बहुत सुंदर जी

संजय भास्कर ने कहा…

बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति ।

देवेश प्रताप ने कहा…

अति सुन्दर .....

सुनील गज्जाणी ने कहा…

adar jog rashmi ji, bahootkhoob, aisi hi meri rachana hai jo aap ko nazar karna chahuga..
'' manav mano ek phoola hua gubaaa'''
sadar

Apanatva ने कहा…

aapse do teen kavitae chootee hai jab samay mile dekh leejiyega .

ज्योति सिंह ने कहा…

sach hi hai jiska saathi aesa ho wo tanha kahan ?bahut khoob

सतीश सक्सेना ने कहा…

होली और मिलाद उन नबी की हार्दिक शुभकामनायें !

sujit kumar lucky ने कहा…

भावो की अभिव्यक्ति को आपने बहुत लम्बी उरान दी है ..