About Us



मेरे एहसास इस मंदिर मे अंकित हैं...जीवन के हर सत्य को मैंने इसमे स्थापित करने की कोशिश की है। जब भी आपके एहसास दम तोड़ने लगे तो मेरे इस मंदिर मे आपके एहसासों को जीवन मिले, यही मेरा अथक प्रयास है...मेरी कामयाबी आपकी आलोचना समालोचना मे ही निहित है...आपके हर सुझाव, मेरा मार्ग दर्शन करेंगे...इसलिए इस मंदिर मे आकर जो भी कहना आप उचित समझें, कहें...ताकि मेरे शब्दों को नए आयाम, नए अर्थ मिल सकें ...

18 February, 2010

सुकून


ना किसी डाकिये की ज़रूरत है
ना कबूतर की
मेरे पंख हैं ना !
उड़कर आना
अपनी चोंच में दबे शब्द
तुम्हारी मेज पर रखना
सुकून देता है
और अगली लम्बी उड़ान की
प्रबल इच्छा होती है

44 टिप्पणियाँ:

GAURAV VASHISHT ने कहा…

Wah Di, Gzab keh gaye hain aap
in kuch panktiyun me.


badhai

GAURAV VASHISHT ने कहा…

Wah Di, Gzab keh gaye hain aap
in kuch panktiyun me.


badhai

ρяєєтι ने कहा…

यह पंख समझा गए बहुत कुछ ....Ilu...!

Sadhana Vaid ने कहा…

बहुत सुन्दर रश्मिजी !
अपनी चोंच में दबे शब्द
तुम्हारी मेज़ पर रखना
सुकून देता है !
बहुत ही मौलिक और ख़ूबसूरत अभिव्यक्ति ! बधाई स्वीकार करें !

Mithilesh dubey ने कहा…

दीदी चरण स्पर्श

क्या कहूँ आपकी इस रचना को लेकर , आपने भले ही शब्दो का प्रयोग कम किया हो लेकिन भावार्थ बहुत है , बढिया लगी आपकी ये रचना ।

दीपक 'मशाल' ने कहा…

Itni khoobsoorati se aapne man ki baat rakhi.. pankh hain na apni baat pahunchane ke liye...
ek bemisaal kavita. kyonki aisa bhav is sandarabh me kahin suna nahin..

दिगम्बर नासवा ने कहा…

वाह ... चंद लाइनों में जीवन का पूरा सार लिख दिया ... खुद ही आना .. प्यार का इज़हार करना .. फिर उड़ जाना लंबी उड़ान के लिए ... बहुत खूब ...

arun c roy ने कहा…

rashmi jichand shabdon mein pyar ka falsafa sikha gai... bahut sunder rachna !

रंजना ने कहा…

sankshipt shabdon ka maarak prabhaav....Waah !!! Lajawaab ...jabardast...

अनिल कान्त : ने कहा…

आपकी तो बात ही कुछ और है

वन्दना ने कहा…

kamaal ka lekhan..........adbhut.

sangeeta swarup ने कहा…

सक्षमता को बताती खूबसूरत रचना....

वाणी गीत ने कहा…

आपके कुछ शब्द ही इतना बोल देते हैं कि दूसरे निशब्द हो जाएँ ...चोंच में शब्द लेकर आई चिड़िया कुछ जानी पहचानी लग रही है ...
संचयन प्रकाशित करने के आपके सपने के पूरा होने पर बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाये ...
ये पुस्तक पुस्तक मेले के अलावा और कहाँ से (जयपुर में ..??) उपलब्ध हो सकती है ...कृपया बताये...

हृदय पुष्प ने कहा…

सुखद एहसास कराती शानदार प्रस्तुति

ज्योति सिंह ने कहा…

अपनी चोंच में दबे शब्द
तुम्हारी मेज़ पर रखना
सुकून देता है
kaash aese pankh hame mil jaaye ud ud sabse mil aaye ,in panktiyon ka jawab nahi .sundar behad sundar .

Akanksha~आकांक्षा ने कहा…

लाजवाब...सुकूनदायी कविता.

shikha varshney ने कहा…

superbbbbbbbb

देवेश प्रताप ने कहा…

मन कि चंचलता से पूर्ण है ये रचना .....

KAVITA RAWAT ने कहा…

Kam sabdon mein sundar bhav liye chitramay prastuti ke liye bahut badhai.......

Apanatva ने कहा…

gambheerata aur chapalta douno ka samanvay........bahut acchee lagee aapkee ye kavita .

M VERMA ने कहा…

और अगली लम्बी उड़ान की
प्रबल इच्छा होती है
===
लम्बी उड़ान चोंच में दबे शब्दों के सहारे वाकई सुकून देता है
बहुत खूबसूरत भाव की रचना

manav vikash vigyan aur adytam ने कहा…

bahoot koob bhot hee achha

अजय कुमार ने कहा…

अनोखी है

मनोज कुमार ने कहा…

भावावेग की स्थिति में अभिव्यक्ति की स्वाभाविक परिणति दीखती है।

JHAROKHA ने कहा…

बहुत ही सुन्दर ----जीवन के लिये एक अच्छा सन्देश देती हुयी रचना। पूनम

jenny shabnam ने कहा…

rashmi ji,
adbhut lekhan aur bhaawpurn abhivyakti keliye badhai sweekaren.

श्याम कोरी 'उदय' ने कहा…

...खूबसूरत रचना.... पेंटिंग बहुत ही प्रसंशनीय है जिसने भी बनाई है उसे बहुत बहुत बधाई!!!

रोहित ने कहा…

itna kuch to kah diya hai aapne maa'm in panktiyon me,
to mere kahne ko bachta hi kya hai??
lekin itna jrur hai,
jab bhi aapki adbhut lekhni ke jaadu se do-char hota hun,
to mere dil ko 'SUKUN' jarur milta hai.
dhanyawaad maa'm,
in khubsurat panktiyon ke liye.
aadar sahit,
-ROHIT

Devendra ने कहा…

जितनी अच्छी कविता उतनी अच्छी तश्वीर.
चोंच में दबे शब्द असीम गहराई से चुने मोतियों से कम नहीं!

Dr. RAMJI GIRI ने कहा…

अदभुत..

Pankaj Upadhyay ने कहा…

kabhi kabhi sonchta hoon ki kavita ki parisbhasha kya hoti hai... mujhe to jo achha lagta hai likh deta hoon, unhe kuch kavita/nazmsa samjh leta hoon.. Anurag ji se ek word suna hai 'azaad nazm' ....

aapse achha humein kaun bata sakta hai..bahut hi pyari kavita hai.. lekin ek kavita likhne ke liye bhi rules hote hain ya wo azaad hoti hai...?

राज भाटिय़ा ने कहा…

अति सुंदर रचना.
धन्यवाद

संजय भास्कर ने कहा…

पंक्तियों ने दिल छू लिया... बहुत सुंदर ....रचना....

संजय भास्कर ने कहा…

भावों को इतनी सुंदरता से शब्दों में पिरोया है
सुंदर रचना....

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत बढ़िया. बधाई आपको!

महफूज़ अली ने कहा…

मम्मी जी...ग़ज़ब कि अभिव्यक्ति के साथ.... बहुत सुंदर लिखा आपने....

माय मॉम इस ग्रेट...

Ravi Rajbhar ने कहा…

Very nice.... di

RAJNISH PARIHAR ने कहा…

बहुत खूबसूरत भाव की रचना !!!पुस्तक प्रकाशन की हार्दिक बधाई!!क्या ये हमारे इधर भी मिल सकेगी?

मस्तानों का महक़मा ने कहा…

bahut hi sundar...
udan or abhiviyekti ki ye achchi khasi misal hai jeevan ko jo sukoon de shayad vahi se udan ka dayera badta chala jata hai.

नीरज गोस्वामी ने कहा…

अद्भुत रचना...मेरी बधाई स्वीकार करें
नीरज

psingh ने कहा…

रश्मि जी
बहुत सुन्दर रचना के लिए एवम किताब के विमोचन के लिए
बधाइयाँ ...........

Priya ने कहा…

is chunni-munni ko hamara bhi address bata digiye...hamko bhi bahut zaroorat hai inki....so sweet :-)

अल्पना वर्मा ने कहा…

Waah!
Adbhut!

sujit kumar lucky ने कहा…

इच्छा से परे उड़ान को चला जाता कभी मन ... गहरे भावो से परिपूर्ण रचनाये है आपकी ..
स्कूल के दिनों के बाद से ही साहित्य से दूर होता चला गया थोरा .. ब्लॉग पर आपकी भाव पूर्ण रचनाये बहुत मन को भायी..