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मेरे एहसास इस मंदिर मे अंकित हैं...जीवन के हर सत्य को मैंने इसमे स्थापित करने की कोशिश की है। जब भी आपके एहसास दम तोड़ने लगे तो मेरे इस मंदिर मे आपके एहसासों को जीवन मिले, यही मेरा अथक प्रयास है...मेरी कामयाबी आपकी आलोचना समालोचना मे ही निहित है...आपके हर सुझाव, मेरा मार्ग दर्शन करेंगे...इसलिए इस मंदिर मे आकर जो भी कहना आप उचित समझें, कहें...ताकि मेरे शब्दों को नए आयाम, नए अर्थ मिल सकें ...

20 फ़रवरी, 2010

खाकर देखो तो


गोल-गोल रोटियों पर
आज एक नज़्म लिखा है
दाल में ख़्वाबों का तड़का लगा
सब्जी में ख्वाहिशों का नमक मिलाया है
खाकर देखो तो
ज़िन्दगी क्या कहती है

39 टिप्‍पणियां:

  1. अरे वाह दीदी , खा कर मजा आ गया ।

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  2. Mujhe to padh ke aur dekh ke bhookh lag aayi.. par yahan kahan rotiyaan milengeen???

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  3. ्कविता तो बाद मै पढुंगा, पहले देखूं तो सही सब्जी किस चीज की बनी है, ओर स्वादिष्ट खाना मेरी कमजोरी रहा है..... बहुत सुंदर खुश्बु आ रही है ,आप की यह नज्म भी बहुत अच्छी लगी, धन्यवाद

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  4. बहुत बढ़िया!!आप की कविता पढ़ चंद शब्द जन्म गए..
    ऐसे पकवान खा
    जिन्दगी क्या कहेगी..
    फिर से एक नयी कविता
    किश्ती बन सागर मे बहेगी।

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  5. aap to qalam se seedhe fire kar rahi hai....zindgi kaha kya... zindgi to mil rahi hai...baat sirf nazariye ki hai :-)

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  6. Didi ji khawab aur khwayeshen ka sundar mixan kiya hai aapne... Yahi to jindagi hai...
    Bahut badhai

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  7. Khwabo aur khwaisho se saji esi bhojan ki thaali ... waah mann tript ho gaya bas...Ilu....!

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  8. पहली बात तो खाना बहुत स्वादिष्ट लगा और जिंदगी कह रही है,

    "तुम भी सीख लो ऐसे प्यार से खाने खिलाये जाते हैं."

    शुक्रिया !

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  9. aap kee kavita dekh kar khane ke ichha karane lagi usapar se tasveer ka tadaka bhoot khoob

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  10. रश्मि जी,
    ख्वाब और ख्वाहिशों की नज़म का खाना खाकर मन संतुष्ट हुआ, काश सबको ऐसा भोजन नसीब हो! शुभकामनायें!

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  11. बेहद लाजवाब नज़्म है ... ख्वाहिशों का नमक और ख्वाबो का तड़का .... क्या ग़ज़ब की कल्पना है ....

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  12. ....बहुत सुन्दर, स्वादिष्ट व्यंजन!!!

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  13. जिंदगी जब भी तेरी बज़्म में लाती है मुझे ...
    ये जमीन चाँद से बेहतर नजर आती है मुझे ....
    बहुत उलझती हैं अपने शब्दों के जाल में ....!!

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  14. वाह वाह वाह...यह हुई न गृहणियों वाली भावोद्गार....
    बहुत बहुत सुन्दर....

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  15. बहुत अच्छा लगा यह देखकर कि आपने रोटी पर नज़्म " लिखी " है ।
    उम्मीद है कविता संग्रह शीघ्र उपलब्ध " होगा " ।

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  16. bhala isse swadisht aur kya hoga!!!
    gaagar me sagar bharti rachna..

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