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मेरे एहसास इस मंदिर मे अंकित हैं...जीवन के हर सत्य को मैंने इसमे स्थापित करने की कोशिश की है। जब भी आपके एहसास दम तोड़ने लगे तो मेरे इस मंदिर मे आपके एहसासों को जीवन मिले, यही मेरा अथक प्रयास है...मेरी कामयाबी आपकी आलोचना समालोचना मे ही निहित है...आपके हर सुझाव, मेरा मार्ग दर्शन करेंगे...इसलिए इस मंदिर मे आकर जो भी कहना आप उचित समझें, कहें...ताकि मेरे शब्दों को नए आयाम, नए अर्थ मिल सकें ...

20 March, 2010

दिल की बात !


मेरा दिल करता है
तुम्हें अमलतास का पेड़ बना लूँ
किसी गांव की अल्हड़ बाला सी
तुमको पकड़कर
घूमती जाऊँ घूमती जाऊँ
जब तक तुम्हारी शाखाएं
मुझे थाम न लें ...

36 टिप्पणियाँ:

Priya ने कहा…

Wow.....wat a thought

सुनील गज्जाणी ने कहा…

दीदी प्रणाम,
मैं आप को नज़र करता हुआ अपनी एक पंक्ति कहना चाहुगा ''' विलय कोण किस्मे हो ये मैं ना जानू सुनो तुम तिलक मैं ललाट बन जाऊ ''''
सुंदर , मन को स्पर्श करतीहुई कविता.
aabhar

sangeeta swarup ने कहा…

बहुत खूबसूरत दिल की बात....

manav vikash vigyan aur adytam ने कहा…

bahoot he adar bhavana hai

ALOK KHARE ने कहा…

what a thought

the ultimate writeups

wao

man gaye di

shikha varshney ने कहा…

"jab tak tumhari shakhayen mujhe tham na le." waah kya bat akhi hai di ! ekdam dil se nikli dil tak pahunchi hai.

नीरज गोस्वामी ने कहा…

चित्र और उसके साथ दी गयी रचना...दोनों ही बेमिसाल...वाह...
नीरज

सुलभ § सतरंगी ने कहा…

ये भाव अनमोल है.
दिल का हाल - दिल की बात. बहुत सुन्दर

Apanatva ने कहा…

adbhut abhivykti....

Babli ने कहा…

वाह! बहुत खूब! अपने दिल की बात को आपने बहुत ही सुन्दरता से प्रस्तुत किया है!

राज भाटिय़ा ने कहा…

सुंदर भावो से सजी है आप की यह अर्थ पुर्ण कविता

वाणी गीत ने कहा…

अमलतास का पेड ...
फ़ैली बाहें ...
झुला क्यों ना झूले ...!!

वन्दना ने कहा…

बहुत ही उम्दा ,दिल को छू लेने वाली रचना ………………चंद शब्दों में ही सारे जज़्बात समेट दिये।

संत शर्मा ने कहा…

सुन्दर अभिव्यक्ति |

मनोज कुमार ने कहा…

रचना अच्छी लगी ।

Pankaj Upadhyay (पंकज उपाध्याय) ने कहा…

बेहद खूबसूरत...

M VERMA ने कहा…

शाखाओं पर जज्बातों का झूला
ये कौन है जो खुद को भूला

jenny shabnam ने कहा…

bahut pyara ehsaas aur khwaahish, badhai rashmi ji.

Udan Tashtari ने कहा…

लाजबाब भाव!! वाह!!

rashmi ravija ने कहा…

बहुत ही बेहतरीन भाव हैं....एकदम अलमस्त से...सुन्दर कविता..

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' ने कहा…

........ गांव की अल्हड़ बाला सी.....तुमको पकड़कर
घूमती जाऊँ घूमती जाऊँ
जब तक तुम्हारी शाखाएं......मुझे थाम न लें ...

चंद पंक्तियों में कितना कुछ सम्माहित कर दिया गया....
मुबारबाद
रश्मि जी, मुझे हैरत है, कि अब तक.
आपके इतनी अच्छी रचनाओं से सुसज्जित
ब्लॉग से दूर कैसे रहा हूं.........

अजय कुमार झा ने कहा…

बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति ...लाजवाब
अजय कुमार झा

दीपक 'मशाल' ने कहा…

बहुत ही सुन्दर सोच, लेकिन अमलतास तो अब गाँव में भी नहीं मिलते जाने कुछ दिनों बाद लोग ये उपमा भी समझेंगे या नहीं.

arun c roy ने कहा…

yaad aa gaya mujhe mere gaon ka wo amaltash jiski baahon me hum jhoola karte the... sunder abhivyakti!

सुमन'मीत' ने कहा…

एक क्षण एक अहसास और कवि की कल्पना...........फिर जन्म लेती है कुछ ऐसी कृति

sakhi with feelings ने कहा…

bahut achchha likha hai apne..

CS Devendra K Sharma ने कहा…

घूमती जाऊँ घूमती जाऊँ
जब तक तुम्हारी शाखाएं......मुझे थाम न लें ...


wah kya abhilasha hai!!!

ati sunder

रचना दीक्षित ने कहा…

bahut sudar abhivyakti

sidheshwer ने कहा…

जहाँ हों
कम शब्द
वहीं हम
हो जाते हैं निश्शब्द!

शोभना चौरे ने कहा…

shbdo ke sath khubsurat ahsas.

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

shabdo ke saath...jhula jhul rahi ho di.........:)

JHAROKHA ने कहा…

bahut hi sahi kaha hai aapane, baat dil ko choo gai.

दिगम्बर नासवा ने कहा…

अमलतास का पेड़ और फैली बाहें ....
कमाल की कल्पना है ...

richa ने कहा…

जब तक तुम्हारी शाखाएं
मुझे थाम न लें ...

बेहद ख़ूबसूरत ख़याल...

ज्योति सिंह ने कहा…

mujhe tasvir bhi prabhit ki rachna ke saath .sundar

Ashok ने कहा…

Bhavya... gudgudata sa Bhaav... kai geet on lauta laaya...

Khush rahiye aur likhti rahiye