27 अप्रैल, 2010

अनंत विस्तार


तेरी आँखों के सोनताल में
नज़्मों का उबटन लगा
मैं नहाती हूँ
शब्दों का मनमोहक परिधान
मुझे तुम्हारी नज़्म में ज़िन्दगी देता है
इस आबेहयात का रंग
मुझे अनंत विस्तार देता है

44 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर ... मनोरम और शब्दों का मायाजाल सा है ...

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  2. अनंत विस्तार तो शब्दों के मनमोहक परिधान से ही संभव है। चित्र और शब्द का सुन्दर समन्वय है।

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  3. anya rachnaao ki tarah bahut sunder... naye vimb...naye prayog... navinta liye... adbhud!

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  4. शब्द-शक्ति , प्रकृति-शक्ति और भाव-शक्ति तीनों को
    गूंथा गया है इस कविता में .. सुन्दर .. आभार !

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  5. aah!yahan aakar aapke nazmo ko padh jitna sukun milta hai uske saamne shayad aakash ka anant vistar bhi chota pad jaye...
    bahut acchi lagi aapki nazm,maa'm!
    aabhar,
    #ROHIT

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  6. नज़्मों का उबटन लगा
    मैं नहाती हूँ
    नज़्मों का उबटन --
    शायद बेहतरीन की भी कोई सीमा नहीं होती

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  7. mam bahut hi kam shbdon me aapne apni bhavnaon ko vistaar diya hai. bhdai .

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  8. फिलहाल यही शब्द उभर रहा है मेरे ज़ेहन आपकी इस कृति के लिए "अद्भुत" - आभार

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  9. नज्मों का उबटन और शब्दों का परिधान....वाह...क्या नज़्म कही है..बहुत सुन्दर..

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  10. वाह वाह कवि भी पता बही केसे केसे शव्दो को जज्वातो का रुप दे देते है, बहुत सुंदर

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  11. बहुत अच्छी लगी आपकी नयी रचना

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  12. शब्दों का मनमोहक परिधान मुझे तुम्हारी नज़्म में जिंदगी देता है ...
    अनंत विस्तार ....
    शब्द ..शब्द ...शब्द ....
    फिर से निःशब्द ....

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  13. रश्मि प्रभा जी ,
    क्या बात है ! लघु होते हुए भी विराट है आपकी कविता ।

    " आंखों के सोनताल में नज़्मों का उबटन "

    अछूते और सुंदर बिबों का प्रयोग !
    बधाई …
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  14. सच में; प्रेरणा बनने के लिए कुछ तो अद्भुत करना ही पड़ता है,या हो जाता है!जो भी हो,ये कविता आपकी हम जैसो के लिए प्रेरणा ही तो है!कल्पना का विस्तार ही तो है ये......

    कुंवर जी,

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  15. shabdo ka anant vistar.........:)
    ye aapke rachnaon me hi sambhav hai..........!!

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  16. मुझे तुम्हारी नज़्म में ज़िन्दगी देता है
    इस आबेहयात का रंग
    मुझे अनंत विस्तार देता है
    kya baat kahi hai didi aap ne , salaam aap ko.
    saadar

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  17. कमाल है !!!!!!!!!!!!!!सिर्फ चंद पंक्तियाँ और अनंत विस्तार

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  18. Waaaaaaaah, aur yahi anant Vistaar mann ka Sukun ban jata hai.....Ilu

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  19. शब्दों के इस मनमोहक परिधान ने वाकई मोह लिया :-)

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  20. इतने खूबसूरत लफ़्ज़ों का इस्तेमाल किया है आपने इस नज़्म में की क्या कहूँ...अप्रतिम..
    नीरज

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  21. नज़्मों का उबटन लगा ....Marvelous :-)

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  22. rashmi ji
    gazab kar diya.........bhavnaon ka vistar aur shabdon ka chayan dono hi adbhut hain.

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  23. वाह...क्या नज़्म कही है..बहुत सुन्दर..

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  24. नज्मों का जो ये उबटन आपने लगाया है...चेहरा बड़ा निखर के आया है...

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  25. वाह ! क्या बात है, सुन्दर रचना!

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  26. achhi rachna..
    baar baar padhne ka mann kiya.....
    -------------------------------------
    mere blog par is baar
    तुम कहाँ हो ? ? ?
    jaroor aayein...
    tippani ka intzaar rahega...
    http://i555.blogspot.com/

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  27. चित्र से कविता है या कविता से चित्र!
    मुझे तो दोनों ही बोलते लग रहे हैं.
    अद्भुत अभिव्यक्ति!

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  28. Ankhon ka sontaal...nazmon ka ubtan.... aabehayat ka rang aur anant vistaar....
    ....Mohak pratibhimb upasthit kar aapki rachna mein sach mein anant vistaar parilakshit ho raha hai..
    ...behatreen prastuti ke liye dhanyavaad...

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  29. adbhut shabdon ka prayog..... hamare liye prernasrot.......shubhkamnaye......

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  30. वाह ! बहुत खूब !
    लगता है जैसे..
    ग़म और ख़ुशी के पार है
    मोरे पि का गाँव
    पियु - पियु लागे है
    जहां कागा की कांव
    पग पग सेज है बिछी हुई
    और दाग - दाग साथ चल रही
    नील गगन की छाँव...............,

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  31. इतनी सुन्दरता से आपने हर एक शब्द लिखा है की आपकी लेखनी की जितनी भी तारीफ़ की जाए कम है! इस उम्दा रचना के लिए बधाई!

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  32. रश्मि जी कितना गहरा ,प्यारा और कम लिखती है आप.ज्ञान बड़ा भारी आपको.
    सादर,

    माणिक
    आकाशवाणी ,स्पिक मैके और अध्यापन से जुड़ाव
    अपनी माटी
    माणिकनामा

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