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मेरे एहसास इस मंदिर मे अंकित हैं...जीवन के हर सत्य को मैंने इसमे स्थापित करने की कोशिश की है। जब भी आपके एहसास दम तोड़ने लगे तो मेरे इस मंदिर मे आपके एहसासों को जीवन मिले, यही मेरा अथक प्रयास है...मेरी कामयाबी आपकी आलोचना समालोचना मे ही निहित है...आपके हर सुझाव, मेरा मार्ग दर्शन करेंगे...इसलिए इस मंदिर मे आकर जो भी कहना आप उचित समझें, कहें...ताकि मेरे शब्दों को नए आयाम, नए अर्थ मिल सकें ...

27 April, 2010

अनंत विस्तार


तेरी आँखों के सोनताल में
नज़्मों का उबटन लगा
मैं नहाती हूँ
शब्दों का मनमोहक परिधान
मुझे तुम्हारी नज़्म में ज़िन्दगी देता है
इस आबेहयात का रंग
मुझे अनंत विस्तार देता है

44 टिप्पणियाँ:

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" ने कहा…

बहुत सुन्दर ... मनोरम और शब्दों का मायाजाल सा है ...

रजनीश ने कहा…

अनंत विस्तार तो शब्दों के मनमोहक परिधान से ही संभव है। चित्र और शब्द का सुन्दर समन्वय है।

arun c roy ने कहा…

anya rachnaao ki tarah bahut sunder... naye vimb...naye prayog... navinta liye... adbhud!

Shekhar Suman ने कहा…

waah...
bahut khub...
itni khubsurat bhawnayein...
achhi lagi....

अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी ने कहा…

शब्द-शक्ति , प्रकृति-शक्ति और भाव-शक्ति तीनों को
गूंथा गया है इस कविता में .. सुन्दर .. आभार !

बेचैन आत्मा ने कहा…

वाह!

श्याम कोरी 'उदय' ने कहा…

...बहुत सुन्दर!!!!

रोहित ने कहा…

aah!yahan aakar aapke nazmo ko padh jitna sukun milta hai uske saamne shayad aakash ka anant vistar bhi chota pad jaye...
bahut acchi lagi aapki nazm,maa'm!
aabhar,
#ROHIT

M VERMA ने कहा…

नज़्मों का उबटन लगा
मैं नहाती हूँ
नज़्मों का उबटन --
शायद बेहतरीन की भी कोई सीमा नहीं होती

Rajni Nayyar Malhotra ने कहा…

mam bahut hi kam shbdon me aapne apni bhavnaon ko vistaar diya hai. bhdai .

राकेश कौशिक ने कहा…

फिलहाल यही शब्द उभर रहा है मेरे ज़ेहन आपकी इस कृति के लिए "अद्भुत" - आभार

sangeeta swarup ने कहा…

नज्मों का उबटन और शब्दों का परिधान....वाह...क्या नज़्म कही है..बहुत सुन्दर..

राज भाटिय़ा ने कहा…

वाह वाह कवि भी पता बही केसे केसे शव्दो को जज्वातो का रुप दे देते है, बहुत सुंदर

sakhi with feelings ने कहा…

बहुत अच्छी लगी आपकी नयी रचना

rashmi ravija ने कहा…

bahut hi bhaavpoorn aur mohak rachna...

दीपक 'मशाल' ने कहा…

is tarah ki upmaayen dhoondhna har kisi ke vash ki baat nahin..

वाणी गीत ने कहा…

शब्दों का मनमोहक परिधान मुझे तुम्हारी नज़्म में जिंदगी देता है ...
अनंत विस्तार ....
शब्द ..शब्द ...शब्द ....
फिर से निःशब्द ....

Rajendra Swarnkar ने कहा…

रश्मि प्रभा जी ,
क्या बात है ! लघु होते हुए भी विराट है आपकी कविता ।

" आंखों के सोनताल में नज़्मों का उबटन "

अछूते और सुंदर बिबों का प्रयोग !
बधाई …
- राजेन्द्र स्वर्णकार

kunwarji's ने कहा…

सच में; प्रेरणा बनने के लिए कुछ तो अद्भुत करना ही पड़ता है,या हो जाता है!जो भी हो,ये कविता आपकी हम जैसो के लिए प्रेरणा ही तो है!कल्पना का विस्तार ही तो है ये......

कुंवर जी,

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत उम्दा!

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

shabdo ka anant vistar.........:)
ye aapke rachnaon me hi sambhav hai..........!!

Shekhar Kumawat ने कहा…

BAHUT KHUB

सुनील गज्जाणी ने कहा…

मुझे तुम्हारी नज़्म में ज़िन्दगी देता है
इस आबेहयात का रंग
मुझे अनंत विस्तार देता है
kya baat kahi hai didi aap ne , salaam aap ko.
saadar

रचना दीक्षित ने कहा…

कमाल है !!!!!!!!!!!!!!सिर्फ चंद पंक्तियाँ और अनंत विस्तार

ρяєєтι ने कहा…

Waaaaaaaah, aur yahi anant Vistaar mann ka Sukun ban jata hai.....Ilu

richa ने कहा…

शब्दों के इस मनमोहक परिधान ने वाकई मोह लिया :-)

Vinay Prajapati 'Nazar' ने कहा…

प्रभावशाली कृति

नीरज गोस्वामी ने कहा…

इतने खूबसूरत लफ़्ज़ों का इस्तेमाल किया है आपने इस नज़्म में की क्या कहूँ...अप्रतिम..
नीरज

Priya ने कहा…

नज़्मों का उबटन लगा ....Marvelous :-)

वन्दना ने कहा…

rashmi ji
gazab kar diya.........bhavnaon ka vistar aur shabdon ka chayan dono hi adbhut hain.

संजय भास्कर ने कहा…

Mummy ji bahut khoob likha hai...

संजय भास्कर ने कहा…

वाह...क्या नज़्म कही है..बहुत सुन्दर..

ओम आर्य ने कहा…

नज्मों का जो ये उबटन आपने लगाया है...चेहरा बड़ा निखर के आया है...

nilesh mathur ने कहा…

वाह ! क्या बात है, सुन्दर रचना!

Shekhar Suman ने कहा…

achhi rachna..
baar baar padhne ka mann kiya.....
-------------------------------------
mere blog par is baar
तुम कहाँ हो ? ? ?
jaroor aayein...
tippani ka intzaar rahega...
http://i555.blogspot.com/

嘉容嘉容 ने कहा…

I love readding, and thanks for your artical. ........................................

Parul ने कहा…

bahut accha likhti hai aap..sach!

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

कम शब्दों में सुन्दर बात।
शानदार रचना इसे ही कहते हैं। बधाई।
--------
गुफा में रहते हैं आज भी इंसान।
ए0एम0यू0 तक पहुंची ब्लॉगिंग की धमक।

अल्पना वर्मा ने कहा…

चित्र से कविता है या कविता से चित्र!
मुझे तो दोनों ही बोलते लग रहे हैं.
अद्भुत अभिव्यक्ति!

कविता रावत ने कहा…

Ankhon ka sontaal...nazmon ka ubtan.... aabehayat ka rang aur anant vistaar....
....Mohak pratibhimb upasthit kar aapki rachna mein sach mein anant vistaar parilakshit ho raha hai..
...behatreen prastuti ke liye dhanyavaad...

मेरे भाव ने कहा…

adbhut shabdon ka prayog..... hamare liye prernasrot.......shubhkamnaye......

manish badkas ने कहा…

वाह ! बहुत खूब !
लगता है जैसे..
ग़म और ख़ुशी के पार है
मोरे पि का गाँव
पियु - पियु लागे है
जहां कागा की कांव
पग पग सेज है बिछी हुई
और दाग - दाग साथ चल रही
नील गगन की छाँव...............,

Babli ने कहा…

इतनी सुन्दरता से आपने हर एक शब्द लिखा है की आपकी लेखनी की जितनी भी तारीफ़ की जाए कम है! इस उम्दा रचना के लिए बधाई!

माणिक ने कहा…

रश्मि जी कितना गहरा ,प्यारा और कम लिखती है आप.ज्ञान बड़ा भारी आपको.
सादर,

माणिक
आकाशवाणी ,स्पिक मैके और अध्यापन से जुड़ाव
अपनी माटी
माणिकनामा