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मेरे एहसास इस मंदिर मे अंकित हैं...जीवन के हर सत्य को मैंने इसमे स्थापित करने की कोशिश की है। जब भी आपके एहसास दम तोड़ने लगे तो मेरे इस मंदिर मे आपके एहसासों को जीवन मिले, यही मेरा अथक प्रयास है...मेरी कामयाबी आपकी आलोचना समालोचना मे ही निहित है...आपके हर सुझाव, मेरा मार्ग दर्शन करेंगे...इसलिए इस मंदिर मे आकर जो भी कहना आप उचित समझें, कहें...ताकि मेरे शब्दों को नए आयाम, नए अर्थ मिल सकें ...

09 April, 2010

गिरते हैं शहंशाह भी मैदाने जंग में



हम तो हमेशा
तलवार की धार पर
साथ चले
जब मैं कटी
तो तुम भी लहुलुहान थे

मैंने तुम्हें पट्टी बाँधी
तुमने मुझे
और प्यार के इस मरहम से
मुस्कुराने लगे

जब मेरे सामान फेंके गए
उसमें तुम्हारे नन्हें खिलौने भी थे
मैंने तेजी से तुम्हारे खिलौने उठाये
आँचल से पोछ बक्से में रख दिया
तुमने मेरे कपड़े उठाये
उनको सहेज दिया
एक जीत की भावना लिए
हम आपस में खेलने लगे

भरी भीड़ में
जब मुझपर मुकदमा चला
कटघरे में खड़े तुम्हारे पाँव भी
बर्फ की तरह जम जाते थे
हम एक-दूसरे की ऊँगली थामे
रास्ते पार करते गए

मासूम मन के घाव
सबको नहीं दीखते
दिल की लडखडाती धडकनें सुनाई नहीं देती

तुमने मेरे दर्द को महसूस किया
और मेरी मुस्कान बने
तुम्हारी जीत मेरी जीत है
जब भी मन उदास हो
याद रखो-
गिरते हैं शहंशाह भी मैदाने जंग में

53 टिप्पणियाँ:

वन्दना ने कहा…

bahut hi prerak aur umda kavita..........badhayi.

संजय भास्कर ने कहा…

हर शब्‍द में गहराई, बहुत ही बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

सुनील गज्जाणी ने कहा…

तुमने मेरे दर्द को महसूस किया
और मेरी मुस्कान बने
तुम्हारी जीत मेरी जीत है
जब भी मन उदास हो
याद रखो-
गिरते हैं शहंशाह ही मैदाने जंग में
pura chitra samne aa gaya , mujhe ye panktiya behad achhi lagi. sadhuwad ek sunder rachana k liye.

kunwarji's ने कहा…

bahut badhiya kavita....

kunwar ji,

kunwarji's ने कहा…

bahut badhiya kavita....

kunwar ji,

संत शर्मा ने कहा…

सच है, मायने यह नहीं रखता की जीत होगी या हार, मायने यह रखता है की आपने अपनी अंतरात्मा की आवाज को सुनी या अनसुनी कर दी | जीतता या हारता वही है जो लड़ता है | मनोबल बढाती सुन्दर रचना |

kishor kumar khorendra ने कहा…

padhakarbahut achchhaa lagaa

bahut sundar

दीपक 'मशाल' ने कहा…

uffffffffff!!! kya likha hai mammy ji.. bas soche ja raha hoon vibhinn aayamon se.
books mil gayee hain, main phone karta hoon aapko.

arvind ने कहा…

हम तो हमेशा
तलवार की धार पर
साथ चले
जब मैं कटी
तो तुम भी लहुलुहान थे......bahut hi bhavpurn. utkrist rachna.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर!
इसे चर्चा में भी ले लिया गया है!
http://charchamanch.blogspot.com/2010/04/blog-post_09.html

वाणी गीत ने कहा…

तलवार की धर पर हम साथ चले ....तुम लहुलुहान हुए तो जख्मी हम भी थे ...
दर्द किसी का भी हो ...आंसू साझा रहे ...
जीत तुम्हारी मेरी भी है ...
इसलिए जब हार लगे तो समझना
मैं भी हार कर साथ तुम्हारे बैठी हूँ
उन्ही सीढियों के आखिरी छोर पर ...
जहाँ से फिर एक नयी सुबह होती है ...
एक नयी आशा और राह दिखा रही है आपकी कविता ...

indu puri ने कहा…

यूँ अगर कहूँ कि एक लम्बे समय बाद फिर वो पढ़ने को मिला आपके ब्लॉग परजिसे मेरी आँखें ढूंढती थीऔर जो गहरे भीतर जा कर मन को विचलित कर देती थी जैसे किसी ने फिर ठहरे हुए पानी में कोई कंकर मार दिया हो.
जब ऐसी ही कोई रचना पढ़ने में आती है खुद को रोक नही पाती अभिव्यक्त करने से.
मात्र किसी को खुश करने के लिए या ये सोच कर कि वो भी मेरे ब्लॉग पर आयेंगे,अच्छा सा कमेन्ट देंगे मैं नही कमेन्ट दे पाती रश्मिजी .
मगर.....भीतर जैसे एक तूफ़ान सा खड़ा हो गया इस कविता को पढ़ कर.
और क्या कहूँ ?
मेरे आंसुओं को देख नही सकता कोई आपके ब्लॉग के पृष्ठ पर,पर हाथ फैर कर देखिएगा एक नमी आप तों महसूस कर ही सकती है अपनी हथेली के नीचे.
छू गई एक बार फिर मेरे अजनबी दोस्त तुम्हारी ये रचना.
प्यार
इंदु

neelima garg ने कहा…

ati sundar...

सुलभ § सतरंगी ने कहा…

प्रेरक और प्रेमपूर्ण

देवेश प्रताप ने कहा…

लाजवाब रचना ......

Apanatva ने कहा…

utkrusht rachana.............
bhav vibhor kar gayee..........

मनोज कुमार ने कहा…

यह रचना हमें नवचेतना प्रदान करती है और नकारात्मक सोच से दूर सकारात्मक सोच के क़रीब ले जाती है।

M VERMA ने कहा…

आज की आपकी यह रचना नही रचनाएँ है. क्योकि हर पंक्ति एक सम्पूर्ण रचना का आभास करा रही है.
रचना में इतनी गहराई हो सकती है क्या !!!!!!!!!!!!!

ρяєєтι ने कहा…

तेरा अंश है, साथ तो होना ही था ...
धड़कने वही सुन पाता है जहा दिल धड़कता है .., जहा दर्द की अनुभूतिय पनाह लेती है और उसे मुस्कान में बदल देती है ...
सच कहा आपने[:)]"गिरते है शहंशाह ही मैदाने जंग में "

श्याम कोरी 'उदय' ने कहा…

....बहुत सुन्दर .. प्रसंशनीय रचना!!!

Priya ने कहा…

Sahi kaha....Girte hain shanshah hi maindane jang mein:-)

sangeeta swarup ने कहा…

नयी आशा की किरण देती खूबसूरत नज़्म...बधाई

usha rai ने कहा…

सह सम्वेदना का सुंदर एहसास ! बहुत खूबसूरत एहसास ! बधाई !

सुमन'मीत' ने कहा…

भावों को दर्शाती हुई प्रेरणादायक कविता

richa ने कहा…

सच है... मासूम मन के घाव सबको नहीं दिखते... आपके अपने ही इन्हें महसूस कर सकते हैं...

मनोज कुमार ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति।
इसे 10.04.10 की चिट्ठा चर्चा (सुबह ०६ बजे) में शामिल किया गया है।
http://chitthacharcha.blogspot.com/

Vivek Rastogi ने कहा…

गिरते हैं शहंशाह ही मैदाने जंग में

बहुत ताकत मिली है इस कविता से मुझे बहुत बहुत धन्यवाद !!

zeashan zaidi ने कहा…

बढ़िया कविता.
लेकिन शायद अंतिम लाइन के बोल कुछ यूं हैं, "गिरते हैं शह सवार ही मैदाने जंग में"

रश्मि प्रभा... ने कहा…

जी हाँ शहसवार ही है.........पर यहाँ एक माँ है, और उसकी दुनिया....शहंशाह भी मात खाते हैं

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

बहुत खूब ....रश्मि जी अब तक की रचनाओं में सबसे बेहतर लगी .....!!

अविनाश वाचस्पति ने कहा…

जो गिरते हैं

वे ही रत रहते हैं

हर संघर्ष में

जीवन उत्‍कर्ष में

हौंसले उन्‍हीं के
बुलंदियों पर

कायम होते हैं।

jenny shabnam ने कहा…

रश्मि जी,
आपकी इस कविता से मन में जाने कैसा सुकून और सन्नाटा भर गया, क्यों ये मैं भी नहीं कह सकती| माँ की दुनिया उसके बच्चे होते हैं...और एक वक़्त ऐसा आता है जब वही बच्चा माँ का हर सहारा बन जाता है... बेहद मार्मिक रचना मन को छू गई, बधाई आपको|

rashmi ravija ने कहा…

तुमने मेरे दर्द को महसूस किया
और मुस्कान बने
ओह क्या पंक्तियाँ हैं...बहुत ही भावपूर्ण रचना...प्यार की अनंत गहराई समेटे हुए

दिगम्बर नासवा ने कहा…

तुमने मेरे दर्द को महसूस किया
और मेरी मुस्कान बने
तुम्हारी जीत मेरी जीत है ..

बहुत गहरे उतर गयी आपकी ये पंक्तिया ... ऐसे ही एक दूजे को समझना ही जीवन है ....

Rani Mishra ने कहा…

तुमने मेरे दर्द को महसूस किया
और मेरी मुस्कान बने
तुम्हारी जीत मेरी जीत है
कितनी ख़ुशी होती है जब कोई हमारे दर्द को समझे, उसे उसी तरह से महसूस करे जैसे की ये उसी का दर्द हो, पर हर कोई इतना खुशकिस्मत तो नहीं जो मतलबी लोगो की इस दुनिया में उसे ऐसा कोई शख्स मिले...........
जब मैं कटी तो तुम भी लहूलुहान थे, कितने सुंदर भाव, गर सच हो जाये तो क्या बात है..........
जो समझ जाये इस दर्द इ दिल को कोई तो क्या बात है.........
अंत में एक सकारात्मक सोच लिए हुए.... गिरते है शेह्सवर ही मैदान ऐ जंग में.....
बहुत सुंदर........

Einstein ने कहा…

गिरते हैं शहंशाह ही मैदाने जंग में...
ये एक पंक्ति एक और जीवन दे रहा है...
आभार... इस हौशालाफ्जाई भाव के लिए....

anjana ने कहा…

तुमने मेरे दर्द को महसूस किया
और मेरी मुस्कान बने
तुम्हारी जीत मेरी जीत है
जब भी मन उदास हो
याद रखो-
गिरते हैं शहंशाह ही मैदाने जंग में
लाजवाब रचना ......

JHAROKHA ने कहा…

काव्य और जीवन दर्शन को समेटे हुये एक अत्यन्त खूबसूरत रचना---हार्दिक बधाई।

manav vikash vigyan aur adytam ने कहा…

keya khoob kaha

हेमंत कुमार ♠ Hemant Kumar ने कहा…

सच कहा है आपने------मासूम मन के घाव/सबको नहीं दीखते/दिल की लड़खड़ाती धड़कनें सुनाई नहीं देती----खूबसूरत पंक्तियां।

arun c roy ने कहा…

pehli ki kaitaaon ki tarah bahut sashakt aur bhavpurn...

ओम पुरोहित'कागद' ने कहा…

wah rashmi ji!
KHOOB LIKHI HAI AAP NE YE KAVITA. BINA KISI SHABDIK DOHRAV KE YAHI LIKHUNGA KI ADHBHUTT !

Babli ने कहा…

बहुत ख़ूबसूरत और भावपूर्ण रचना लिखा है आपने! सुन्दर एहसास के साथ बेहतरीन प्रस्तुती!

Pankaj Upadhyay (पंकज उपाध्याय) ने कहा…

उफ़्फ़.. जबरदस्त.. रोगटे खडे हो गये.. मैने आपकी जो भी कविताये पढी है.. उनमे से सबसे अच्छी और मेरी पसन्द यही है..

Shekhar kumawat ने कहा…

waqay me bahut sundar rachna he


shekhar kumawat

http://kavyawani.blogspot.com/

Shekhar kumawat ने कहा…

waqay me bahut sundar rachna he


shekhar kumawat

http://kavyawani.blogspot.com/

Vijay Kumar Sappatti ने कहा…

didi ,

ye aapki ab tak ki rachnao me sabse acchi rachnao me se ek hai .. mera salaam kabul kare...

vijay

ALOK KHARE ने कहा…

एक बहुत ही शानदार प्रस्तुति रश्मि दी,
"मन के अन्दर तक , गहराई में उतरती सी ,
कुछ उनकी, कुछ आपकी, कुछ कुछ अपनी सी"

Shekhar Suman ने कहा…

ohhh !!! itni behtareen rachna....
kabhi kabhi sochta hoon,kaise itna achha likhte hain....
baar baar padhne ko mann kiya....
mere blog par is baar..
वो लम्हें जो शायद हमें याद न हों......
jaroor aayein...

शरद कोकास ने कहा…

कविता पढ़ते ही मैं समझ गया ..आपने गिरते हैं शहंशाह पर ही सायास कविता लिखी है शहसवार पर नही ।

रचना दीक्षित ने कहा…

इसलिए जब हार लगे तो समझना
मैं भी हार कर साथ तुम्हारे बैठी हूँ
उन्ही सीढियों के आखिरी छोर पर ...
जहाँ से फिर एक नयी सुबह होती है ...
एक नयी आशा और राह दिखा रही है आपकी कविता एक बहुत ही शानदार प्रस्तुति रश्मि दी,

Deepak Shukla ने कहा…

Hi..

Jeevan jeena bada kathin hai..
Kaanton main bhi chalna hai..
Har ek tufan se ladna hai..aur us paar utarna hai..

Kavita main yatharth hai..
Satya adhik, kalpana kam..
Tabhi kavita ka har shabd mukhar ho utha hai..

DEEPAK..

manish badkas ने कहा…

ज़िन्दगी जीने का अंदाज़ ये बेमिसाल है,
मौत हो माशूका तो कातिल बेहाल है...
हर फ़िक्र होती बस एक दिमागी फितूर,
खतरों से खेलने का ये कमाल है...
गिरते हैं शेरसवार ही मैदान-ए-जंग मैं..