About Us



मेरे एहसास इस मंदिर मे अंकित हैं...जीवन के हर सत्य को मैंने इसमे स्थापित करने की कोशिश की है। जब भी आपके एहसास दम तोड़ने लगे तो मेरे इस मंदिर मे आपके एहसासों को जीवन मिले, यही मेरा अथक प्रयास है...मेरी कामयाबी आपकी आलोचना समालोचना मे ही निहित है...आपके हर सुझाव, मेरा मार्ग दर्शन करेंगे...इसलिए इस मंदिर मे आकर जो भी कहना आप उचित समझें, कहें...ताकि मेरे शब्दों को नए आयाम, नए अर्थ मिल सकें ...

08 June, 2010

कोयल








सुबह आँख खुलते
सुनती हूँ कोयल की कूक
मुझे कोई अपना याद नहीं आता
मैं तो बस कोयल की मिठास
और उसके बदलते अंदाज में खो जाती हूँ

कोयल गाती है
फिर जोर से बोलती है
मैं उसकी हर अभिव्यक्ति को सुनती हूँ
एक गीत, एक पुकार, एक झल्लाहट ..
क्या नहीं होता उसके तेवर में !

कहती है कोयल-
'मेरी मोहक तान
और याद कोई और !'

मैं हर दिन कहती हूँ-
'कोयल
मैं बस तुम्हें सुन रही हूँ
जब तक तुम गाओगी
मैं सुनती रहूंगी ..'

सुनते ही कोयल की कुहू कुहू
सुकून में बदल जाती है
और वह एक डाली से दूसरी डाली का सफ़र
आह्लादित स्वर में करती है
और मेरा पूरा दिन मीठा हो जाता है !

43 टिप्पणियाँ:

rashmi ravija ने कहा…

कोयल के स्वर में सचमुच सबकुछ है...और सुबह सुबह कोयल की कूक...पूरा दिन तो मीठा बना ही देती है...

'उदय' ने कहा…

...सुन्दर भाव !!!

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

मैं हर दिन कहती हूँ-
'कोयल
मैं बस तुम्हें सुन रही हूँ
जब तक तुम गाओगी
मैं सुनती रहूंगी ..'

सुन्दर अभिव्यक्ति....आश्वासन पा कर सारा दिन गा सकती है :)

प्रसून दीक्षित 'अंकुर' ने कहा…

कहती है कोयल-
'मेरी मोहक तान
और याद कोई और !'

_____________________________

वाह माँ ! क्या बात है ?
आभार !

richa ने कहा…

कोयल की कूक यहाँ तक सुनाई दी रश्मि जी और शाम मीठी हो गयी :)
और शब्दों की यात्रा को सार्थक करती हुई आपकी फोटो ने ब्लॉग को चार चाँद लगा दिये...

shikha varshney ने कहा…

वाह मीठी मीठी सी कविता.

sanu shukla ने कहा…

bahut sundar rachana

कृपया अगर हो सके तो नीचे दिए गये लिंक पर भी अपनी टिप्पणी दे ....हम आपके अभारी होएंगे...

http://iisanuii.blogspot.com/2010/06/blog-post_08.html

Monika ने कहा…

अति सुंदर

रचना दीक्षित ने कहा…

कितनी सच्ची व मीठी लगी आपकी ये कोयल

महफूज़ अली ने कहा…

सुनते ही कोयल की कुहू कुहू
सुकून में बदल जाती है
और वह एक डाली से दूसरी डाली का सफ़र
आह्लादित स्वर में करती है
और मेरा पूरा दिन मीठा हो जाता है !


मम्मी जी....... बहुत सुंदर लगी यह कविता.... उपरोक्त पंक्तियाँ बहत ही अच्च्ची लगीं....

वाणी गीत ने कहा…

कोयल गाती है मीठे गान ...क्यूंकि वो जानती है
कि कोई सुनता है उसे इतने ध्यान से ...
कोयल की स्वरलहरियां और आपका सुनना यूँ ही चलता रहे सतत ....!!

Deepak Shukla ने कहा…

Hi..

Bagon, pedon pe koyal jab,..
Meethi tan sunati hai..
Man sabka mohit hota hai..
Sabka man harshati hai..

Sundar bhav..

DEEPAK..

M VERMA ने कहा…

कोयल के स्वरों को सुन कौन नहीं खो जाता होगा.
बहुत सुन्दर रचना

Dr.amit keshri ने कहा…

mausi, koyal ke swar ke saath aapke shabdon ka jaadu hamesha ke tarah is bar bhi khub hai...







amit~~

संजय भास्कर ने कहा…

मम्मी जी....... बहुत सुंदर लगी यह कविता.

संजय भास्कर ने कहा…

वाह ! कितनी सुन्दर पंक्तियाँ हैं ... मन मोह लिया इस चित्र ने तो !

arvind ने कहा…

सुबह आँख खुलते
सुनती हूँ कोयल की कूक
मुझे कोई अपना याद नहीं आता
मैं तो बस कोयल की मिठास
और उसके बदलते अंदाज में खो जाती हूँ
....... बहुत सुंदर कविता.

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

koyal ki kuk..........:) wo bhi iss garmi me.....:D

sach me pyari lagegi hi, basant ka jo yaad dila deti hai.....:D

Di!! lajabab ho aap:)

Rajiv ने कहा…

atyant atmeeyata se mahsoosi gai rachna.koyal ke pratilagaw se upaje is bhav ke liye dhanyawad.

Parul ने कहा…

kuch chitra ubhar gaye jehan mein..choo gayi

Jyotsna Pandey ने कहा…

बहुत सुन्दर कविता........
मिठास बरकरार रहे , यही शुभकामनाएं हैं .

ALOK KHARE ने कहा…

kisi ne kisi se puchcha
ki sansaar ki sabse mithi aur kadbi cheez kya he

"Jubaan"

ek sarthak rachna

ALOK KHARE ने कहा…

kisi ne kisi se puchcha
ki sansaar ki sabse mithi aur kadbi cheez kya he

"Jubaan"

ek sarthak rachna

nilesh mathur ने कहा…

वाकई मिठास है कविता में!

वन्दना ने कहा…

वाह ………बहुत ही सुन्दर भाव भरी रचना।

Priya ने कहा…

Good! ab picute suit kar rahi hai...koyal ke saath jagna achcha lagta hain.... Mithas vaani mein bhi, zuban mein bhi aur zindgi mein bhi :-)

Apanatva ने कहा…

sunder abhivykti.......

kunwarji's ने कहा…

भावो का सुन्दर चित्रण...

कोयल के बहाने

कुंवर जी,

कविता रावत ने कहा…

सुनते ही कोयल की कुहू कुहू
सुकून में बदल जाती है
और वह एक डाली से दूसरी डाली का सफ़र
आह्लादित स्वर में करती है
और मेरा पूरा दिन मीठा हो जाता है !
....Koyal kee mithas bhari kook se bhari prastuti ke liye dhanyavaad...

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

अरे वाह..!
यह तो बहुत सुन्दर रचना है!

शोभना चौरे ने कहा…

कुहू कुहू बोले कोयलिया ....
इस गीत का स्मरण करवा दिया आपकी इस मीठी और jeevnt kavita ne .

Harshad mehta ने कहा…

कहती है कोयल-
'मेरी मोहक तान
और याद कोई और !'

Oh! Koyal, flows with your sweet music those sweet moments my heart clings to. Please don't feel bad if I get lost in those moments.

Harshad mehta ने कहा…

कहती है कोयल-
'मेरी मोहक तान
और याद कोई और !'

Oh! Koyal, flows with your sweet music those sweet moments my heart clings to. Please don't feel bad if I get lost in those moments.

सुनील गज्जाणी ने कहा…

दीदी प्रणाम !
कायल मधुर संगीत का प्रतीक है और मधुर संगीत हमेशा मन को अपनी और खीचता है बस मन में मधुर भाव होना चाहिए ,
सुंदर रचना के लिए साधुवाद ,
आभार

दिगम्बर नासवा ने कहा…

कोयल की मीठी कूक सच में किसी दूसरी दुनिया में खींच ले जाती है ..

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

बहुत ही बढ़िया रचना

JHAROKHA ने कहा…

aapaki itni miithii rachna padh ke mera din bhii meethaa ho gaya...badhai :)
poonam

राजेश उत्‍साही ने कहा…

आपकी कविता पढ़कर मुझे अपनी दो पंक्तियां याद आ गईं- यादों की नदी जब सूखती है,कोई कोयल कहीं कूकती है।

रंजना ने कहा…

सुन्दर भाव !!!

ज्योति सिंह ने कहा…

सुनते ही कोयल की कुहू कुहू
सुकून में बदल जाती है
और वह एक डाली से दूसरी डाली का सफ़र
आह्लादित स्वर में करती है
और मेरा पूरा दिन मीठा हो जाता है !
yah ahsaas sachmuch khoobsurat hai .din bhar taazgi ka anubhav dilaati hui sundar rachna .

sujit kumar lucky ने कहा…

कोयल की कूक..एक पुकार एक प्यार एक प्रतिकार ...
उसकी आवाज ..मनहारी ..प्यारी .. लगता सुनते रहे ये आवाज ..यूँ ही
एक अच्छा अवलोकन !

कविता रावत ने कहा…

सुदर मनोहारी प्रस्तुति ...धन्यवाद

anupama's sukrity ! ने कहा…

अरे वाह ...आपकी कोयल भी कमाल की है .... मन मुग्ध हो गया कविता पढ़कर ..खो गया ..कुहू कुहू में ...!!
बहुत सुंदर रचना ...!!