10 जून, 2010

फिर भी...


क्यूँ हो रहा है ऐसा
मेरी मुस्कुराहट
हल्की हो गई है
ख्वाब कुछ संजीदा से हो गए हैं
आँखों में अकेलेपन की नदी बहने लगी है...

यूँ मैंने प्यार की पाल खोल दी है
तूफ़ान का शोर ना हो
व्यवधान न हो !
और तो और
दुआओं का धागा भी अदृश्य को बाँधा है
फिर भी...

फिर भी ख्वाब कुछ संजीदा से हैं
आँखों में अकेलेपन की नदी है
मुस्कान ....

दुआ है दुआओं का असर दिखाई दे
बेचैन मन को किनारा मिल जाये ..





38 टिप्‍पणियां:

  1. duaao ka asar bhi hoga aur kinara tab milhi jayega..akelapan hai kaha kavitaye hai na sath

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  2. अकेलेपन में भी यूँ कविता का साथ....

    बहुत बद्जिया..

    कुंवर जी,

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  3. जरुर होगा दुआओं का असर ..इतनी सुन्दर कवितायेँ जो हैं :)

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  4. फिर भी ख्वाब कुछ संजीदा से हैं
    आँखों में अकेलेपन की नदी है
    मुस्कान ....

    दुआ है दुआओं का असर दिखाई दे
    बेचैन मन को किनारा मिल जाये ..

    _____________________________

    अकथनीय हूँ मैं माँ !

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  5. thank god aaj apka comment box khul gaya varna kabhi khulta hi nahi tha.
    bahut sunder rachna jo nirashao se aashao ki taraf le jati hui..

    apki post 11/6/10 ke charcha munch k liye select kar li gayi hai.

    http://charchamanch.blogspot.com/

    abhaar.

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  6. दुआ है दुआओं का असर दिखाई दे
    बेचैन मन को किनारा मिल जाये ..
    bahut bhavnatmak humesha ke tarah... shabdon ka jaadu ke man pulkit ho utha

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  7. सुन्दर भाव्…………।सुन्दर रचना।

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  8. दुआओं का धागा ....बहुत सुन्दर प्रयोग किया है...मन के एहसास ...मेरे मन को भी भिगो गए....सुन्दर अभिव्यक्ति

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  9. कुछ अनकहा सा कथ्य ....

    दुआए दिखाई दे, यही है दुआ........बहुत सुन्दर!

    प्रणाम के साथ शुभकामनाएं...

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  10. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति भाषा, लय, प्रवाह, सब कुछ एक साथ!!!!!!!!!!!!!! .

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  11. यूँ मैंने प्यार की पाल खोल दी है
    तूफ़ान का शोर ना हो
    व्यवधान न हो !
    और तो और
    दुआओं का धागा भी अदृश्य को बाँधा है
    फिर भी...


    मम्मी जी....यह पंक्तियाँ दिल में उतर गयीं.....

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  12. बहुत ख़ूबसूरत और भावपूर्ण रचना लिखा है आपने! इस उम्दा रचना के लिए बधाई!

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  13. आँखों में अकेलेपन की नदी बहने लगी है ...
    जब कि दुआओं का धागा तो अदृश्य को बांधा था ...
    कल आँख से एक बूँद अनायास ही टपकी थी और तभी आपकी यह कविता पढ़ी ...
    कुछ लिखा नहीं मैंने , चुप चाप ही रही ...
    उस अकेलेपन की नदी का एक कतरा यहाँ तो नहीं बह आया कहीं ...
    इस तरह जुड़े है तुझसे
    मेरे दिल के तार बेतार ....
    आपकी हर कविता हमेशा मेरे दिल के पास होती है ...
    बहुत आभार ...!!

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  14. jaane kis pal aapne dua di hogi, badi mashakkat ke baad aakhir comment box khul gaya.......

    har dua kubool ho, aur kya kahun :)

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  15. Di!! tum aur akelapan.......asambhav..:)

    teri trimurti, aur fir ham jaise rishte.........aur uske baad itna bada FAN base..................!!

    kavita as usual.....best!!

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  16. सब कुछ तो है
    फिर भी है ये सूनापन
    लुत्फ़ ये की
    रास आने लगा है ये अकेलापन
    एकाकीपन को भरने की
    शायद ये कोशिश ही थी फिजूल
    हुए जो उम्मीदों से बेगाने
    तब जा कर छाया है दीवानापन.....!

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  17. फिर भी ख्वाब कुछ संजीदा से हैं
    आँखों में अकेलेपन की नदी है
    मुस्कान ....

    दुआ है दुआओं का असर दिखाई दे
    बेचैन मन को किनारा मिल जाये ....
    Duwaon ka asar der se sahi magar jarur hota hai..
    Aapki har rachna gahare bhav samete rahati hai...
    Dil mein utar jaatee hai...

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  18. फिर भी ख्वाब कुछ संजीदा से हैं
    आँखों में अकेलेपन की नदी है
    मुस्कान ....
    दुआ है दुआओं का असर दिखाई दे
    बेचैन मन को किनारा मिल जाये ....
    Duwaon ka asar der se hi sahi magar jarur hota hai...
    Dil mein gahare utarti hai aapki har kavita..

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  19. पल संजीदा से जो दीखते है ..
    वो तो जो दिख रहा अब ..
    आसू तो जरया बने है बेचैन मन के लिए ..

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  20. फिर भी ख्वाब कुछ संजीदा से हैं
    आँखों में अकेलेपन की नदी है
    मुस्कान ....

    दुआ है दुआओं का असर दिखाई दे
    बेचैन मन को किनारा मिल जाये ..
    काफ़ी दिनों बाद आपको पढ़ना अच्छा लगा-----सुन्दर रचना।

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  21. कभी कभी अकेलापन ही सच्चा साथी बनता है...... है ना

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  22. कोमल भावनाओं की खूबसूरत अभिव्यक्ति----।

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  23. लाजवाब रचना.................
    सुन्दर प्रस्तुति पर हार्दिक आभार

    चन्द्र मोहन गुप्त
    जयपुर

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  24. दुआए दिखाई दे, यही है दुआ........बहुत सुन्दर!

    प्रणाम के साथ शुभकामनाएं...

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