17 जून, 2010

मैं हूँ तो


मैं एक संभावना हूँ
मुझसे सुर निकल सकते हैं
मैं आग बन सकती हूँ
मैं शीतल बयार
मैं सुबह की अजान
मैं कुरआन
मैं शंखनाद
मैं उम्मीद की किरण
मैं विश्वास का दीया
मैं उठती लहर
महत्वाकांक्षाओं की उड़ान
मंजिल
आकाश
धरती
वृक्ष
पक्षी
अदृश्य की उज्जवल खोज ....

तुम मुझे कुछ भी बना लो
जीतोगे
क्योंकि मैं संभावना हूँ
एक कल्पना
जिसकी पहुँच हकीकत तक है ..

43 टिप्‍पणियां:

  1. "क्योंकि मैं संभावना हूँ
    एक कल्पना"... मैं को आपने व्यापक फलक दे दिया... इक नया प्रतिमान गढ़ दिया.. नए क्षितिज की ओर कविता गई है... क्योंकि आपने अपनी कल्पना का पुट दे दिया है... सुंदर रचना

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  2. bahut sundar...aapki kavita anukoolan ka ehsaas dilaati hai...jaise kuch bhi kar do main kaise bhi reh loongi...

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  3. sambhavna ..... ko kis aakaar mein dhaaloo soch rahi hoon

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  4. क्योंकि मैं संभावना हूँ
    एक कल्पना
    जिसकी पहुँच हकीकत तक है ..
    और फिर सम्भावनाओं की कोई सीमा तो होती नहीं.
    हर भावना एक सम्भावना को जन्म देती है और सम्भावनाएँ ही हकीकत में बदलती हैं.
    बहुत सुन्दर रचना
    बेहद

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  5. हाथों में जलते कल्पना के द्वीप
    का प्रकाश कविता में विन्यस्त है !
    सुन्दर कविता ! आभार !

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  6. Don't know what to say.. here is just one word that I can utter.. Superb....

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  7. रश्मि जी बहुत सहज कविता है। भाव और शब्‍दों का संयोजन बहुत अच्‍छा है। पर दो जगह शब्‍द खटकते हैं। मैं सुबह का अजान के स्‍थान पर मैं सुबह की अजान होना चाहिए। इसी तरह मैं उठती लहरें के स्‍थान पर मैं उठती लहर होना चाहिए।
    आपकी सांप कविता में भी ऐसा ही एक शब्‍द है। करामात स्‍त्रीलिंग है इसलिए देखा करामात के स्‍थान पर देखी करामात होना चाहिए। शुभकामनाएं।

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  8. तुम मुझे कुछ भी बना लो
    जीतोगे
    क्योंकि मैं संभावना हूँ
    एक कल्पना
    जिसकी पहुँच हकीकत तक है ..

    kash har shambhavna ko ham hakeekat me kuch bhi bana skate
    rachna achi lagi

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  9. मैं शीतल बयार
    मैं सुबह की अजान
    मैं कुरआन
    मैं शंखनाद
    मैं उम्मीद की किरण
    मैं विश्वास का दीया
    मैं उठती लहरें
    महत्वाकांक्षाओं की उड़ान
    मंजिल
    आकाश
    धरती
    वृक्ष
    पक्षी
    अदृश्य की उज्जवल खोज ....


    मम्मी जी ... यह पंक्तियाँ... दिल को छू गई...

    बहुत सुंदर कविता..

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  10. अति सुन्दर वाली बात है जी....

    कुंवर जी,

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  11. कोई कल्पना कब हक़ीक़त बनी ?कोई ऐहसास ही बता सकता है,अगर हो। ऐहसास की अक मध्दम सी तरंग उठती है कविता मेँ।बधाई!

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  12. कल्पना
    जो जलती है हथेली के बीच
    मशाल सी
    हकीकत के करीब ले जाती है ...
    सम्भावना
    सपनो को पूरा करने की
    भरती है जीवन में रंग ....

    आपके ये छोटे -छोटे शब्द ....कितनी बड़ी- बड़ी कल्पनाएँ ....भीतर तक जोड़ देती हैं आपसे ...!!

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  13. बहुत बढ़िया रचना भाव बहुत सुन्दर है ....प्रस्तुति के लिए आभार

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  14. तुम मुझे कुछ भी बना लो
    जीतोगे
    क्योंकि मैं संभावना हूँ
    एक कल्पना
    जिसकी पहुँच हकीकत तक है ..

    Superb.

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  15. संभावनाएं ही हकीकत बन जाती हैं....बस प्रयास ज़रूरी है...सुन्दर अभिव्यक्ति

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  16. संभावनाए ... सपने ... ये तो संबल हैं जीवन के ... इनका द्वार सदा खुला रहना चाहिए ...

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  17. एक संभावना जीवन को उसी रंग से रंग देती है जैसा हम चाहते हैं, बहुत खूबसूरती से शब्दों में बाँधा है आपने.....
    बधाई!

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  18. kalpana ki hakikat me badalne ki sambhavna......:)

    kitni arthpurn baat kahi "di" aapne...:)

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  19. Rashim Ji Namaste,
    क्योंकि मैं संभावना हूँ
    एक कल्पना
    जिसकी पहुँच हकीकत तक है ..
    Ya yun kahen sambhavnao ki buniyaad per sapno ka mahal un sapno ko sakar kar sakte hain hum.
    Chhoti aur sunder kavita.
    Surinder Ratti

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  20. वाह्………………बहुत ही सुन्दर और गहरे भाव भरे है।

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  21. तुम मुझे कुछ भी बना लो
    जीतोगे
    क्योंकि मैं संभावना हूँ
    एक कल्पना
    जिसकी पहुँच हकीकत तक है .
    bahut khoob

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  22. आप तो हर बार बेहतरीन लिखती ही हैं

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  23. isme koi shaq nhi DI, bahut hi achhi kavita ban padi he
    dil se badhai

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  24. संभावनाएँ हैं तो रास्ते सुगम हो जाते हैं.
    उन्हें हकीकत बनाने के लिए थोड़े श्रम की आवश्यकता होती है.बहुत ही अच्छी सोच और कविता .

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  25. नित्य नए शिखर छूती आपकी कवितायें बरबस प्रभावित करती हैं. ! !
    समय हो तो पढ़ें : किस्मत के सितारे को जो रौशन कर दे http://shahroz-ka-rachna-sansaar.blogspot.com/2010/06/blog-post_18.html

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  26. एक आशावादी और महत्वाकांक्षाओं के उन्मुक्त आकाश में हकीकत की उड़ान भरती आदरणीया रश्मि जी की ये रचना बहुत ही अच्छी लगी.. बढ़ी और कोटिशः आभार !!

    उत्तर देंहटाएं
  27. एक आशावादी और महत्वाकांक्षाओं के उन्मुक्त आकाश में हकीकत की उड़ान भरती आदरणीया रश्मि जी की ये रचना बहुत ही अच्छी लगी.. बढ़ी और कोटिशः आभार !!

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  28. बहुत सुंदर कविता, धन्यवाद

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  29. बहुत खूब !!
    एक सम्भावना..सम भावना
    एक विश्वास..ना हो जिसमे विश्व की आस
    एक कल्पना..न कल अपना, न कोई कलपना
    हकीकत है..

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  30. rashi ji,
    sambhaawna agar ho to apne hisaab se jo chaahe bana sakte ho, bahut gahri baat kahi hai aapne, badhai aapko.

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  31. बहुत सुन्दर भाव और अभिव्यक्ति के साथ आपने लाजवाब रचना लिखा है जो प्रशंग्सनीय है! बधाई!

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  32. बहुत सुन्दर रचना ।

    "तुम मुझे कुछ भी बना लो
    जीतोगे
    क्योंकि मैं संभावना हूँ
    एक कल्पना
    जिसकी पहुँच हकीकत तक है .."

    बहुत ही सुन्दर भाव ।

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  33. saadar charansparsh Diii...! Sach kya kamaal likha hai.... ek chhote se rozmarra ke shabd ki kitani gehri aur vistrit vyakhya....! sunder shabd....! Sach kha hai aapne sambhaavna kuchh bhi ho sakti hai.... sambhavna to jal ki tarha hai...jis saanche mein dalo wahi roop ikhtiyaar kar leti hai...! mann bahut se vicharon se ghir gaya hai diii! :)

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  34. सम्भवना की पहु<च हक़ीकत तक तो होती ही है ,कभी न कभी ।अच्छी रचना ।

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  35. क्योंकि मैं संभावना हूँ
    एक कल्पना
    जिसकी पहुँच हकीकत तक है ..

    vah .....bahut khub

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शाश्वत कटु सत्य ... !!!

जब कहीं कोई हादसा होता है किसी को कोई दुख होता है परिचित अपरिचित कोई भी हो जब मेरे मुँह से ओह निकलता है या रह जाती है कोई स्तब्ध...