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मेरे एहसास इस मंदिर मे अंकित हैं...जीवन के हर सत्य को मैंने इसमे स्थापित करने की कोशिश की है। जब भी आपके एहसास दम तोड़ने लगे तो मेरे इस मंदिर मे आपके एहसासों को जीवन मिले, यही मेरा अथक प्रयास है...मेरी कामयाबी आपकी आलोचना समालोचना मे ही निहित है...आपके हर सुझाव, मेरा मार्ग दर्शन करेंगे...इसलिए इस मंदिर मे आकर जो भी कहना आप उचित समझें, कहें...ताकि मेरे शब्दों को नए आयाम, नए अर्थ मिल सकें ...

12 June, 2010

क्लिक !


बड़े गंदे हो चले थे शब्द
करीने से सजाना मुश्किल हो चला था
बच्चों की तरह धूल में सनकर
शरारत से हँस रहे थे ...
मैंने भी अच्छी माँ की भूमिका निभाई
टब में पानी लिया
शैम्पू डाला
और शब्दों को उड़ेल दिया
ब्रश से रगड़ा
मुलायम तौलिये से सुखाया
पाउडर लगाया
आँखों में काजल
रेशम जैसे बालों की पौनी टेल बनाई
और माथे पर काजल का टीका लगाया
अब मेरे शब्द तैयार हैं
लग रहे हैं न सुन्दर?
अब एक फोटो हो जाये -
क्लिक !

37 टिप्पणियाँ:

प्रसून दीक्षित 'अंकुर' ने कहा…

मैंने भी अच्छी माँ की भूमिका निभाई
टब में पानी लिया
जॉनसंस शैम्पू डाला
और शब्दों को उड़ेल दिया
ब्रश से रगड़ा
मुलायम तौलिये से सुखाया
पाउडर लगाया
आँखों में काजल

__________________________

बहुत खूबसूरत रचना है, माँ !

Ravindra Ravi ने कहा…

बहुत सुंदर! रश्मिजी आपकी काविताये बहुत हि सरळ और मन को छु जाणे वाली होती है. मां की एक बच्चे के जीवन में क्या अहमियत होती है आपने सहजता से प्रतिपादित कर दिया.

Babli ने कहा…

बेहद ख़ूबसूरत कविता! आपका हर एक कविता मुझे बेहद पसंद है! लाजवाब प्रस्तुती!

arun c roy ने कहा…

rashmi ji shabdon ko nehlana taiyar karna.. shabdon ka maa hona.. kitna bhavnatmak hai... vakai jaadu karti hain aap shabdon se

संगीता पुरी ने कहा…

सुंदर भावाभिव्‍यक्ति !!

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बस जी क्लिक कर दिया और फोटो खिंच गयी...बहुत खूबसूरत..

दिलीप ने कहा…

waah ji waah badhiyanehla dhula ke chamka diya aapne to...

राजेश उत्‍साही ने कहा…

रश्मि जी बहुत सुंदर प्रतीक लिए हैं आपने। पर मुझे लगता है आप एक जगह चूक गईं हैं। आपने शैम्‍पू के साथ एक ब्रांड विशेष का नाम लिया है। मेरे ख्‍याल है कि हमें अपनी रचनाओं में किसी कंपनी या ब्रांड विशेष का नाम लेने से बचना चाहिए। क्‍योंकि यह तो अनजाने ही उस ब्रांड विशेष का विज्ञापन हो रहा है। अगर आपको मेरी बात उचित लगे तो कृपया ब्रांड नाम को कविता में से हटा दें। शुभकामनाएं।

pawan dhiman ने कहा…

.. बहुत सुंदर !!!

Rajesh Shandilya ने कहा…

बहुत सुन्दर ! रश्मिजी आपकी clicking भी अद्भुद है. विचारों से परे शब्दों की जादूगरी कोई आपसे सीखे !मज़ा आ गया !

Rajesh Shandilya ने कहा…

बहुत सुन्दर ! रश्मिजी आपकी clicking भी अद्भुद है. विचारों से परे शब्दों की जादूगरी कोई आपसे सीखे !मज़ा आ गया !

M VERMA ने कहा…

शब्दों की आंखों में काजल

मानवीकरण और बेहद खूबसूरत बिम्बों की मिसाल है यह रचना.

शब्द थोड़े चंचल होते हैं बहुत छकाते होंगे इस स्नान से पूर्व और स्नान के बाद शांत हो जाते होंगे.. गलत तो नहीं कह रहा हूँ मैं?

धुली हुई ... काजल लगायी हुई ... और बेहद खूबसूरत रचना

बेचैन आत्मा ने कहा…

एक दिन नहलाकर चैन से मत बैठ जाईएगा...फिर गंदे हो जाएंगे. अब तो आपने इतनी दूर ब्लॉग में धकेल दिया है खेलने के लिए..!
...अच्छा प्रयोग . सुंदर कविता. बधाई.

Udan Tashtari ने कहा…

क्लिक!


बढ़िया!

वाणी गीत ने कहा…

सचमुच माँ की ही तरह शब्दों को नहलाया , धुलाया आपने ...
एक प्यार भरी चपत भी तो लगानी थी ...!!

Suman ने कहा…

nice

Suman ने कहा…

nice

दीपक 'मशाल' ने कहा…

मम्मी जी सोच को सलाम...

Harshad mehta ने कहा…

I am smiling.

Mrs. Asha Joglekar ने कहा…

शब्दों की यह धुली निखरी छवि बहुत सुंदर लगी ।

Deepali Sangwan ने कहा…

cute nazm..
chalo click kar hi lein ek pic..
say cheeez :D

Sonal Rastogi ने कहा…

आपकी कविता पढ़कर चित्र सामने आ गया ममता भरी आँखों से देखती माँ का ..क्यूट सी रचना

sanu shukla ने कहा…

अब एक फोटो हो जाये -
क्लिक !

behad sundar...

RAJNISH PARIHAR ने कहा…

ओ...हो तभी शब्दों से खुसबू आ रही है..और लग भी रहे है ताज़ा से...बहुत अच्छे !!!

दिगम्बर नासवा ने कहा…

सच में शब्द तो बिखरे हुवे ही होते हैं ... आप जैसा कोई देख रेख करने वाला उनको सज़ा सकता है ... अच्छा लिखा है ...

rashmi ravija ने कहा…

बेहद प्यारी सी रचना....

वन्दना ने कहा…

बहुत ही सुन्दर रचना।

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना आभार

nilesh mathur ने कहा…

आपके शब्द तो............क्या कहें..........शायद धुलाई कि जरुरत ही नहीं थी, आपके शब्द तो हमेश ही ऐसे लगते हैं कि अभी नहा धो कर आ रहे हैं!

richa ने कहा…

बहुत ख़ूबसूरत लग रहे हैं ये साफ़-सुथरे करीने से तैयार किये शब्द... अच्छा हुआ जो काला टीका लगा दिया... नहीं तो हमारी ही नज़र लग जाती :)
एक फोटो तो बनता है... क्लिक !!

Priya ने कहा…

Kaafi dino baad kuch different, innovative aur bahut pyaara ......ham to aksharo ki ponytail ke baare mein soch rahe hain....Lajawaab soch :-)

Vinay Prajapati 'Nazar' ने कहा…

बड़ी मासूम रचना है

JHAROKHA ने कहा…

शब्दों की इतनी बेहतरीन प्रस्तुति----और साथ ही सुन्दर चित्र्। मनोहारी लगी आपकी यह कविता।

ज्योति सिंह ने कहा…

wakai ek maa hi roop nikhaar sakti hai ,sundar .

SR Bharti ने कहा…

बहुत ही सुंदर एवं सरल रचना ,
सच्ची ममता की झलक दिखती है I
ढेरों बधाई

रचना दीक्षित ने कहा…

मैंने भी अच्छी माँ की भूमिका निभाई
टब में पानी लिया
शैम्पू डाला
और शब्दों को उड़ेल दिया
बहुत खूब!!!!!!!!!!!!!!!!

ज्योत्स्ना पाण्डेय ने कहा…

आप इतनी मेहनत करती हैं तो शब्दों को तो खूबसूरत होना ही था........
बहुत खूबसूरत!
तस्वीर भी अच्छी आई है .

शुभकामनाये.....