30 अक्तूबर, 2010

फिर से है !



सारे दरवाज़े बन्द कर
चुन लाई थी कुछ मोहक सपने
और सिरहाने छुपा दिया था ...
चमकती आँखों पर
पलकों का इठलाकर झपकना
शुरू हुआ ही था
कि दरवाज़े थरथराने लगे !

जाने कौन सा कतरा दर्द का
बाकी रह गया था
जो सर पटक रहा था दरवाज़े पर ...

सपने चौंक पड़े
पलकें स्थिर हो गईं
शोर से निजात पाने को
दरवाज़ा खोलना पड़ा...

दर्द का स्वागत करने को
हौसलों की लौ को तेज किया है
....
सुबह का इंतज़ार फिर से है !
video

43 टिप्‍पणियां:

  1. दर्द का स्वागत करने को
    हौसलों की लौ को तेज किया है
    हौसलों की लौ तेज होगी तभी तो दर्द का सामना किया जा सकेगा.
    सुन्दर अहसास

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  2. दर्द का स्वागत करने को
    हौसलों की लौ को तेज किया है
    ....
    सुबह का इंतज़ार फिर से है !

    बहुत सुंदर तरीके से लिखना तो ठीक है आपके लिएँ मगर कितनी संवेदनाएं उमड़ती है आपके भीतर और पैनी नज़र...!

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  3. अहसासों का बहुत अच्छा संयोजन है ॰॰॰॰॰॰ दिल को छूती हैं पंक्तियां ॰॰॰॰ आपकी रचना की तारीफ को शब्दों के धागों में पिरोना मेरे लिये संभव नहीं

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  4. दर्द का स्वागत करने को
    हौसलों की लौ को तेज किया है
    ....
    सुबह का इंतज़ार फिर से है !

    वाह...आपकी रचना ने ये शेर याद दिला दिया-
    चला जाता हूं हंसता खेलता दौरे-हवादिस से
    अगर आसानियां हों ज़िन्दगी दुश्वार हो जाए.

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  5. दर्द का स्वागत करने को
    हौसलों की लौ को तेज किया है
    ....
    सुबह का इंतज़ार फिर से है !

    हाँ सही कहा……………दर्द का भी तो कोई अपना होना चाहिये…………कोई तो उनका स्वागत करे……………बेहद सुन्दर भाव्।

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  6. रश्मि जी,
    क्या बात है आपने विडियो के बारे मे अच्छा बताया सुनकर बहुत ही अच्छा लगा …………अब तो आप गीतकार भी बन गयीं उसके लिये दिल से बधाई…………लगा ही नही कि कुछ अलग सा सुन रहे हैं ऐसा लगा जैसे किसी फ़िल्म का ही गाना हो…………ईश्वर से प्रार्थना है आप जल्द उस मुकाम पर पहुँचें …………दोनो की आवाज़ें और म्युज़िक दोनो ही गज़ब के हैं…………दिल खुश हो गया।

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  7. अब तो पूरा सुनने का इंतज़ार है ये सारे गाने।

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  8. दर्द का स्वागत करने को
    हौसलों की लौ को तेज किया है
    सुंदर भावाव्यक्ति अच्छी लगी

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  9. दर्द का स्वागत करने को
    हौसलों की लौ को तेज किया है
    ....
    वो सुबह कभी तो आएगी ...बहुत अच्छी नज़्म लिखी है ..

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  10. बहुत सुंदर रचना अभी जिन्दगी का इंतजार भी सुनते हे, धन्यवाद

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  11. बहुत भावपूर्ण कविता.. ज़िन्दगी के प्रति नया नजरिया देती है आपकी यह कविता..

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  12. वाह...सचमुच एक बेहतरीन कविता...बधाई।

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  13. बाद मे विडियो देखा .. सुना. बहुत सुन्दर बानगी है.

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  14. बहत सुन्दर है आपकी कविता और विडिओ तोह बेहद सुरीला !!!

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  15. सुबह का इंतज़ार फिर से है !
    इतनी बड़ी रात के बाद
    उजाले का इंतज़ार फ़िर से
    इतने अँधेरे के बाद
    हंसी का इंतज़ार फ़िर से
    इतने आंसुओं के बाद
    और ख़ुशी का इंतज़ार फ़िर से
    इतने गम के बाद...

    यही गाना अभी अभी कुहू के प्रोफाइल में सुना... बहुत अच्छा लगा...

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  16. सुख - दुःख के क्रम को बाखूबी उकेरा है आपने.

    कुँवर कुसुमेश
    ब्लॉग:kunwarkusumesh.blogspot.co

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  17. बहुत भावपूर्ण कविता...

    विडिओ तो पहले देख लिए

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  18. दर्द का स्वागत करने को
    हौसलों की लौ को तेज किया है

    bahut hi umda bhav parose hain aapne
    apni is kavita me

    hight unlimited

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  19. भावना प्रधान ..सुन्दर अभिव्यक्ति .. सादर

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  20. very inspirational dard ka swagat....padhte padhte sochne lage kya practically possible hai? shayad haan aur nahi bhi ....audio nahi sun paaye ....sound system proper nahi hai system ka

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  21. जब हौंसलों की लौ तेज कर ली है तो सुबह आने में देरी कैसी ?

    सुंदर भावपूर्ण रचना.

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  22. "दर्द का स्वागत करने को
    हौसलों की लौ को तेज किया है"

    इस हौसले के आगे कोई भला कहां टिक पाएगा? उसकी रोशनी में यकीनन दर्द के अंधेरे कुछ धुंधला जाएंगे और जल्द ही अपना दंश भी खो देंगे .खूबसूरत अहसासों को पिरोती हुई एक सुंदर भावप्रवण रचना. आभार.
    सादर
    डोरोथी.

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  23. बस ...हौसलों में ही तो दम होना चाहिए ...
    सबेरा नयी खुशियाँ साथ लेकर आये ..
    उम्मीद का दामन नहीं छूटे ..!

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  24. bhavmay rachana......

    aabhar.........
    sapne dard khushee sabhee to jeevan ke abhinn ang hai......inhe ek doosare se judaa nahee kiya ja sakta...

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  25. जाने कौन सा कतरा दर्द का
    बाकी रह गया था
    जो सर पटक रहा था दरवाज़े पर .
    दीदी प्रणाम !
    उक्त पंक्तिया आप को सादर प्रस्तुत है , ये बहुत कुह कहती है शायाद इक सार समेटे हुए कहे तो गलत भी नहीं होगा , बधाई !
    साधुवाद
    सादर !

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  26. चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी रचना 02-11-2010 मंगलवार को ली गयी है ...
    कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया

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  27. बहुत सुंदर रचना दी ......... दर्द और सपने तो एक दुसरे के पूरक हैं.... एक दुसरे को अस्तित्व प्रदान करते हैं...! :)

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  28. बहुत सुन्दर रचना और साथ ही वीडिओ भी. सच बात ये है कि मैंने पहली बार सुना और बहुत मधुर लगा.

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  29. वाह...क्या बात कही...

    सचमुच दर्द का स्वागत करने को

    हौसलों की लौ को तेज करना ही पड़ता है...और सुबह का इन्तजार ही तो जीने की आस देती है...

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  30. दर्द का स्वागत करने को
    हौसलों की लौ को तेज किया है
    बहुत सुंदर.... आप हमेशा ही भावों का चित्रण जीवंत बना देती हैं......आभार

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  31. बेहद सुन्दर अभिव्यक्ति .........

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  32. सुंदर भावपूर्ण रचना
    सुन्दर अभिव्यक्ति
    बधाई !

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  33. सुंदर भावपूर्ण रचना
    सुन्दर अभिव्यक्ति
    बधाई !

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  34. सुबह का इंतज़ार फिर से है !!!!!!!!!!

    सुंदर चित्र के साथ एक सुंदर सी बात कही आप ने. सच एही है जिंदगी...
    आप का स्वागत है सृजन शिखर (www.srijanshikhar.blogspot.com ) पर.--- पंचायती राज चुनाव और मुर्गे की टांग.

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  35. दर्द का स्वागत करने को
    हौसलों की लौ को तेज किया है ...

    दर्द तकलीफ तो देता है और उसको सहने के लिए होंसला तो जरूरी है ... साथ साथ ये याद रखना भी जरूरी है क़ि सुबह जरूर आती है ..

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  36. सुबह का इंतज़ार फिर से है !
    वो सुबह कभी तो आयेगी।

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  37. जाने कौन सा कतरा दर्द का
    बाकी रह गया था
    जो सर पटक रहा था दरवाज़े पर ...

    jaise vo dasktak yahan bhi sunaai de rahi hai....

    bahut sunder, saadar.

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