02 नवंबर, 2010

इस तरह जाना और माना



बहुत छोटी थी
हाँ यही कोई ५ ६ साल की
जब वह चला गया ...
कितनी लड़ाई होती थी 'दीदी' सुनने के लिए
....
और वह चला गया
समझ ही नहीं पायी कि यह जाना
कभी न आना होता है
और जैसे जैसे लगा
मुझे लगा --- मैं गरीब हो गई
'दीदी' कहने को कोई नहीं
...........
कोई मिलता , पूछती
'दीदी' कहोगे मुझे
धीरे धीरे जाना यह आसान नहीं
...........
........
स्कूल में एक दोस्त की ज़रूरत थी
ऐसा दोस्त
जो मेरा हो सिर्फ मेरा
माँ ने कहा था
दोस्त  है वह डायरी
जहाँ हम कुछ भी लिख सकते
और कोई उन पन्नों को नहीं खोल सकता ...
..........
और खोज में जैसी तैसी कॉपी उठा ली
जिसके पन्ने बड़ी जल्दी फट गए
या स्याही फ़ैल गई
तब जाना यह भी इतना आसान नहीं
तभी तो अपने बच्चों को बताया---
'एक दोस्त मिल जाये
तो समझो तुम भाग्यशाली हो
दूसरा - बहुत है
तीसरा - हो ही नहीं सकता'
.........

फिर मैंने प्यार की तरफ देखा
क्या होता है प्यार !
किसी का अच्छा दिखना?
किसी की याद आना ?
किसी की राह देखना ......
तभी माँ ने एक कहानी सुनाई
इंग्लैंड के एडवर्ड की कहानी
जिन्होंने प्यार के लिए
इंग्लैंड का राज्य त्याग दिया ............
मुझे एडवर्ड से प्यार हुआ
यूँ कहिये ... एडवर्ड ने एहसास दिया कि
प्यार में प्यार से ऊपर कुछ भी नहीं
मैंने भूखे रहकर देखा
मैंने उस एक ख्वाब के आगे
अंगारों पर चलकर देखा
देखा -
मेरे अन्दर सिमसन जीती है
सोहनी, और हीर जीती है
मैंने प्यार किया बहुत प्यार किया
और ज़िन्दगी को गीत बना लिया .....

इन गीतों में मेरी धड़कनों का प्राण संचार हुआ
शक्ल उभरे
मुझे माँ कहा
और मेरी सोच को
खुद पर भरोसा हुआ !

41 टिप्‍पणियां:

  1. ''मैंने प्यार किया बहुत प्यार किया
    और ज़िन्दगी को गीत बना लिया ....."प्यार मे आशा का अद्भुद रूप से सन्चार होता है.. बहुत सुन्दर कविता..

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  2. Bahut sunder bhav se piroee kavita acchee lagee.....ye hee jindagee hai kabhee ruthtee hai kabhee sanvartee hai..........dhoop chAV abhinn ang hai iseke........
    Aabhar

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  3. ज़िन्दगी की हकीकत उतार दी……………दिल मे उतर गये भाव्।

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  4. जीवन क़ि रात निभाते हुवे कई रिश्ते खो जाते हैं कई मिल जाते हैं ... खोना पाना तो जीवन क़ि रीत है ....

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  5. और वह चला गया
    समझ ही नहीं पायी कि यह जाना
    कभी न आना होता है
    और जैसे जैसे लगा
    मुझे लगा --- मैं गरीब हो गई
    'दीदी' कहने को कोई नहीं
    ....sach mein apno ke vedana bahut gaharee hoti hai jise bhulana itna aasaan nahi....
    dil ko jhakjhor karti vedanamayee bharpurn rachna ek vratchitra sa upasthit kar aakhon ke saamne saakar hoti see...

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  6. बहुत ही भावो से परिपूर्ण है ये कविता . बहुत ही सच्चाई बयां करती हुई सुंदर रचना.

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  7. दीदी और माँ, बड़े भावपूर्ण, कोमल शब्द हैं।

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  8. वाह दीदी से गीतों तक का सफर ..क्या कमाल लिखा है.

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  9. इस कविता मे आप ने दिल के भाव जाहिर किये हे सुंदर कविता के लिये धन्यवाद

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  10. शब्द शब्द गहरे भाव जगाती आपकी रचना अप्रतिम है...बधाई
    नीरज

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  11. जीवन के रस से सराबोर करने वाली कविता। हार्दिक बधाई।

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  12. kyaa likhoon ...kitne rishe sab aasaan nahi hota ..kai panktiyon mein to khud ko jee gai

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  13. आपकी इस कविता पे मैं वारी जाऊं।

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  14. मेरे अन्दर सिमसन जीती है
    सोहनी, और हीर जीती है
    मैंने प्यार किया बहुत प्यार किया
    और ज़िन्दगी को गीत बना लिया .

    बहुत अच्छी लगीं यह पंक्तियाँ और डायरी को दोस्त बनाना .....सुन्दर रचना ..प्यार के गहरे भावों को समझाती हुई

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  15. दिल में उतर जाने वाले भाव बहुत ही उम्दा रचना.....

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  16. बहुत सुन्दर रचना है ... पढ़कर अन्दर से कुछ भारी भारी सा लगा ...
    यदि आपको बुरा न लगे तो क्या मैं आपको दीदी संबोधन कर सकता हूँ ?

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  17. 'एक दोस्त मिल जाये
    तो समझो तुम भाग्यशाली हो
    दूसरा - बहुत है
    तीसरा - हो ही नहीं सकता'
    .........
    satya hai!
    hridaysparshi rachna!!!

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  18. आप सब को सपरिवार दीपावली मंगलमय एवं शुभ हो!
    हम आप सब के मानसिक -शारीरिक स्वास्थ्य की खुशहाली की कामना करते हैं.

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  19. घनीभूत वेदना सहने के बाद भी आशा का दीप जलाए, किया गया सफ़र जिसमें सब कुछ के बीच में खूबसूरत गीतों की रचना करना, वाकई दिल की गहराईयों को छूने वाली एक खूबसूरत, संवेदनशील और मर्मस्पर्शी प्रस्तुति. आभार.
    सादर,
    डोरोथी.

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  20. ek adad apne ki talaash,bhai dost man jaise komal rishte bahut jatan se piroye hai aapne kavita me.....

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  21. Mai to hun hi aapki Didi kahne ke liye...!

    rachn bahut sunder hai bhavpurn sidha dil ko chhu gai.

    di, aapko diwali ki hardik badhai.

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  22. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  23. मैंने प्यार किया बहुत प्यार किया
    और ज़िन्दगी को गीत बना लिया ...यह पंक्तियां बेहद भावमय कर जाती है ...हमेशा की तरह सुन्‍दर और लाजवाब रचना ।

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  24. रश्मी दीदी,
    दीपावली की बहुत बहुत बहुत सारी शुभकामनायें !

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  25. बेहद भावमयी रचना। दीपावली की सपरिवार हार्दिक शुभकामनायें

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  26. बेहद सुंदर भाव ,मन में उतर गए । गुरु देव के साथ एक यात्रा शुरू की है ,आपको अच्छी लगी ,यह उनके भाव उनकी ही भाषा है ,मैनें तो उन्हें संशिप्त किया है । दीपावली की मंगलकामनाएं ।

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  27. इस ज्योति पर्व का उजास
    जगमगाता रहे आप में जीवन भर
    दीपमालिका की अनगिन पांती
    आलोकित करे पथ आपका पल पल
    मंगलमय कल्याणकारी हो आगामी वर्ष
    सुख समृद्धि शांति उल्लास की
    आशीष वृष्टि करे आप पर, आपके प्रियजनों पर

    आपको सपरिवार दीपावली की बहुत बहुत शुभकामनाएं.
    सादर
    डोरोथी.

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  28. दीपावली की असीम-अनन्त शुभकामनायें.

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  29. rashmi di kahin bhaut hi gahare prabhavit kar gai aapki kavita.
    bahut hi bhaukta se bhari bahut hi sundar rachna.
    aapko deep-vbhia-duuj ki hardik shubh kamna.
    poonam

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  30. तभी माँ ने एक कहानी सुनाई
    इंग्लैंड के एडवर्ड की कहानी
    जिन्होंने प्यार के लिए
    इंग्लैंड का राज्य त्याग दिया ............
    मुझे एडवर्ड से प्यार हुआ
    यूँ कहिये ... एडवर्ड ने एहसास दिया कि
    प्यार में प्यार से ऊपर कुछ भी नहीं...

    कुछ बातें जीवन को कितना अर्थ दे जाती हैं देखिये ....
    माँ की कही कोई बात कितने गहरे तक उतर गई ....
    सच्च ...प्यार से ऊपर कोई चीज़ नहीं ....

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  31. और वह चला गया
    समझ ही नहीं पायी कि यह जाना
    कभी न आना होता है
    और जैसे जैसे लगा
    मुझे लगा --- मैं गरीब हो गई
    'दीदी' कहने को कोई नहीं


    subah subah rula diya aapne...

    main to ye hi nahin jaanti thi, ke ye jaana kya hota hai. kuch nahin samajhti thi. bas poochti thi, ke kahan gaya, kab aayega. ..

    bohot bohot maarmik...zada nahin keh paungi

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  32. समझ ही नहीं पायी कि यह जाना
    कभी न आना होता है
    और जैसे जैसे लगा
    मुझे लगा --- मैं गरीब हो गई
    or
    दोस्त सिर्फ होता है वह डायरी
    जहाँ हम कुछ भी लिख सकते
    और कोई उन पन्नों को नहीं खोल सकता ...
    or
    प्यार में प्यार से ऊपर कुछ भी नहीं
    mun ko choo gayi ye panktiyan..bahut sunder...

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अक्षम्य अपराध

उसने मुझे गाली दी .... क्यों? उसने मुझे थप्पड़ मारा ... क्यों ? उसने मुझे खाने नहीं दिया ... क्यों ? उसने उसने उसने क्यों क्यों ...