13 जनवरी, 2014

मेरे मोबाइल से इमरोज़





प्यार एक से होता है
प्यारे सब हो जाते हैं
जहेकिस्मत !
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अपने बच्चों
अपनी माँ के बीच
कभी भी
कोई राज बनकर नहीं जीना
ज़िन्दगी बनकर जीना
ज़िन्दगी ही सच है
सच ही आग है जीने के लिए !
*******************************
जब आदमी इंसान हो जाता है
ज़िन्दगी में ही रब का दीदार कर लेता है
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कानून साँस साँस कैद
मुहब्बत साँस साँस आजाद
ज़िन्दगी जीकर ज़िन्दगी बनती है
शब्द जीकर नज़्म बनते हैं
****************************
तुम्हें अपने आप ने जगाया है
अगर मेरा नाम 'अपना आप' होता
तो फिर
मैंने ही जगाया होगा  …
*****************************
जो कुछ भी हम सोचते हैं
ज़िन्दगी उसी की पैदावार होती है
तुम खूबसूरत सोचती हो
खूबसूरत करती हो
इसीलिए
उदासी में भी तुम खूबसूरत रही
और खुशकिस्मत भी
रश्मि भी  …
*************************
मुहब्बत ग्रंथों में नहीं समा सकती
ग्रन्थ मुहब्बत में समा सकते हैं
             
                     क्रमशः  :)

22 टिप्‍पणियां:

  1. ज़िन्दगी जीकर ज़िन्दगी बनती है
    शब्द जीकर नज़्म बनते हैं

    वाह!

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  2. खुशकिस्मत हैं वाकई
    जो खुद सोचते हैं
    यहाँ तो किसी की सोच
    को ही सोच सोच के
    सारी सोच का
    गुड़ गोबर हो गया है
    दिमाग एक जैसे
    किराये का बैल हो गया है
    आप अच्छी हैं
    और बहुत अच्छा
    लिख लेती है
    लिखती चली जायें
    इतना लिखें
    बहुत अच्छा अच्छा लिखें
    क्या पता हमारा भी
    कुछ भला कभी हो जाये
    कहा गया है संगत का
    कुछ तो कभी असर होता है :)

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  3. कानून साँस साँस कैद
    मुहब्बत साँस साँस आजाद
    ज़िन्दगी जीकर ज़िन्दगी बनती है
    शब्द जीकर नज़्म बनते हैं
    ....बहुत खूब....शाश्वत सत्य को दर्शाती सभी प्रस्तुतियां अद्भुत....

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  4. वाह.....
    आपके मोबाइल में तो पूरी ज़िन्दगी समाई हुई है !!

    सादर
    अनु

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  5. काफी उम्दा प्रस्तुति.....
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल मंगलवार (14-01-2014) को "मकर संक्रांति...मंगलवारीय चर्चा मंच....चर्चा अंक:1492" पर भी रहेगी...!!!
    - मिश्रा राहुल

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  6. मुहब्बत ग्रंथों में नहीं समा सकती
    ग्रन्थ मुहब्बत में समा सकते हैं...

    अद्भुत / शानदार

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  7. मकर संक्रान्ति की हार्दिक शुभकामनाएँ।
    --
    आपको ये जानकर अत्यधिक प्रसन्नता होगी की ब्लॉग जगत में एक नया ब्लॉग शुरू हुआ है। जिसका नाम It happens...(Lalit Chahar) है। कृपया पधारें, आपके विचार मेरे लिए "अमोल" होंगें | आपके नकारत्मक व सकारत्मक विचारों का स्वागत किया जायेगा | सादर ..... आभार।।

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  8. ज़िन्दगी जीकर ज़िन्दगी बनती है
    शब्द जीकर नज़्म बनते हैं
    यही सच है !
    ज़िन्दगी जीकर ज़िन्दगी बनती है
    शब्द जीकर नज़्म बनते हैं
    मकर संक्रान्ति की शुभकामनाएं !
    नई पोस्ट हम तुम.....,पानी का बूंद !
    नई पोस्ट बोलती तस्वीरें !

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  9. एक से एक सार्थक रचनाएं,
    सुन्दर चित्र के साथ :)

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  10. इन छोटे छोटे लम्हों में पूरा जीवन दर्शन सिमिट आया है ...
    बहुत ही लाजवाब ...

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  11. जीवन से जूड़ी सारे बातें..

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  12. "अपने बच्चों
    अपनी माँ के बीच
    कभी भी
    कोई राज बनकर नहीं जीना
    ज़िन्दगी बनकर जीना
    ज़िन्दगी ही सच है
    सच ही आग है जीने के लिए "……जीने का फलसफा है जो इसको गले लगा कर चला असल में तो वही जिया है
    आपके मोबाइल ने एक विरासत का अक्स उतारा है ... बहुत खूब

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  13. ये सब मोबाइल में है दीदी, तो ऐसा लगता है पढ़कर ज़िन्दगी ठहर जाती है!! लगता है बस इन छोटी-छोटी बातों पे बड़ी सी ज़िन्दगी गुज़ार दें!! बस यूँ ही!!

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  14. इन छोटे पलों में पूरा जीवन है जैसे दो पल के जीवन में पूरी उम्र !

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  15. कितनी गहरी बात कही है इमरोज़ ने...
    मुहब्बत ग्रंथों में नहीं समा सकती
    ग्रन्थ मुहब्बत में समा सकते हैं
    शत शत नमन उनको. आपका आभार.

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  16. प्रेम प्रेरक हो गया है जीवनी का।

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  17. कितनी सुंदर बातें...जीने का सुंदर फलसफा..

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अक्षम्य अपराध

उसने मुझे गाली दी .... क्यों? उसने मुझे थप्पड़ मारा ... क्यों ? उसने मुझे खाने नहीं दिया ... क्यों ? उसने उसने उसने क्यों क्यों ...