08 मार्च, 2008

अर्थ .......


अगर ये सच है ,
तो कहने की ज़रूरत क्यों?
"बेटा-बेटी एक समान", (समानता दिखती है......)!
"बेटी के होने से मुझे फर्क नहीं पड़ता"
(पूछा किसने?)....
समानता की बात व्यर्थ है,
हर ओहदे पर आ जाने से क्या?
लड़के की शिक्षा आगे या बराबर की होनी चाहिए
आय लड़के की अधिक हो............
वरना इगो !-लड़के का आहत होता है
लड़की का इगो मान्य नहीं .........
;महिला-दिवस' मनाएँ ,
लड़की को बराबर का दर्जा नहीं-सम्मान दें
वह घर की शोभा है
बस इसे अर्थ दें...............

6 टिप्‍पणियां:

  1. bahut sahi kaha rashmi ji,beti beta ye jhagada kyun,beti ko samman hi chahiye.bahut sundar

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  2. आज तो आपने महिला दिवस सार्थक कर दिया दीदी !!!

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  3. jo swayam shrasthi ko arth deti hai.....jeewan ka mool hai.....uske astitv ke liye sangharsh .....kalyug hai....par aapke shabd yug pariwartankaari hain.....
    aapko saadhuwaad!

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  4. वाह, क्या खूब..समयोचित. बधाई.

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  5. लड़की का इगो मान्य नहीं .........
    ;महिला-दिवस' मनाएँ ,
    लड़की को बराबर का दर्जा नहीं-सम्मान दें
    वह घर की शोभा है
    बस इसे अर्थ दें......

    बहुत सुंदर सही लिखा है आपने ..रश्मि जी

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  6. massi aapne bahut sahi aur bahut achha likha hai..lekin mai ye khna chahungi kisi se samman paane se phle hume khud apna samman krna shikhna hoga...jo ki aaj bhi adhikter mahilayen nahi kerti hain...

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