15 मई, 2008

कुछ है.......


काले मेघों का आना,
टप-टप बूंदों का बरसना,
सोंधे ख्याल अंगडाई लेने लगे हैं......
जाने क्यूँ?
भींग जाने का दिल करता है.......
दौड़ता है मन पर्वतों की चोटियों पे,
दिल की धड़कनें पाजेब-सी बजती है......
मेरे अन्दर मोरनी थिरक उठी है,
होठों पे कोई गीत फुहारों -से मचलते हैं......
मेरी यादों की गगरी छलक उठी है,
सोंधी खुशबू हवाओं में दहक रही है.......
मेरे मन में घटाएँ बहक रही हैं,
"कुछ है"-सारी धरती फिसल रही है.........

22 टिप्‍पणियां:

  1. shabd ki jadugar to hain hi aap. bhawnao ko kaise shabd me bandha hai yah aasan kam nahi.... magar aap yaha wahi kar rahi hain..bahut hi achche tarike se...

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  2. Kavita acchi hai but ismey virdha bhas hai...

    ek tarf

    होठों पे कोई गीत फुहारों -से मचलते हैं......
    मेरी यादों की गगरी छलक उठी है,
    सोंधी खुशबू हवाओं में दहक रही है.......
    मेरे मन में घटाएँ बहक रही हैं,

    kushi hai

    to duji taraf

    kale mega aur yaadey hai..jo shaydd ek tees hai


    jab purani yadey tang karti hai to insaan nachta nahi tadapta hai angaro par,,,,

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  3. बहुत अच्छे.
    "...... सारी धरती फिसल रही है ...."
    वाह !

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  4. dhadkan badal gayee hai to use shabdon men bharo
    aur aise geet likho aue aisee shayree karo

    bahut achha likha hai
    Anil

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  5. मन के विचारों का सुंदर चित्रण !

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  6. "सोंधी खुशबू हवाओं में दहक रही है.......
    मेरे मन में घटाएँ बहक रही हैं,
    "कुछ है"-सारी धरती फिसल रही है"

    सावन की रिमझिम फुहार में झूले पर भीगती राधारानी का हाल ऐसा ही कुछ होता होगा..

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  7. वाह
    बड़ी निश्छल और मोहक भावनाएं..........जब फुहारों में भीगने जाएँ तो इस बेटे को अवश्य बुलायें
    बहुत बढ़िया लिखा है

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  8. आपके लेखन में हमेशा एक कशिश होती है..

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  9. inn megho main kabhi hame bhi bhingna achchha lagta tha, kabhi hamare mann kee morni bhi nachti thi....................................................par ab to chinta hoti hai ki kahin mera beta na bhing jaye! sach main har pal ke mayne kaise badalte hai, kaise kahoon.....

    oh! main bhi kya likhne laga!! ati sundar prastuti!!

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  10. im very surprised k koi chand lineo se kaise aur kis tareh itni gahri baat keh sakta hai mindblowing sach me aap se milne ko dil kay raha hai khair bhagwaan ne chaha to aap se ek baar to jaroor milunga,,,,,,,,,,,,,,,, and apne kavitao se hame kabhi vanchit mat kariyega,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

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  11. haan kuch hai ye aagman hai purani yaadon ka
    haan kuch hai ye aagaman hai phir jhule jhulne ka
    haan kuch hai ye aagman hai man ko pyar main bhigone ka
    haan kuch hai ye aagaman hai hotho par ghili muskuraahat ka
    haan kuch hai ye aagamn hai tan ko phulo jaisa mhekane ka
    haan kuch hai ye aagamn hai mere saawan ka
    haan kuch hai ye aagaman hai warsha ritu ka..............

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  12. rashmi ji ..
    bahut achchi rachna hai.
    bahut hi chanchalta aur skaratmakta hai bhavo me ..

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  13. मेरे मन में घटाएँ बहक रही हैं,
    "कुछ है"-सारी धरती फिसल रही है.........

    बहुत बेहतरीन रचना, बधाई स्वीकारें..

    ***राजीव रंजन प्रसाद

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  14. "कुछ है''............ बेहद खुबसुरत रचना है ......... आपने अहसासों को शब्दों में बखूबी उकेरा है .......... शुभकामनाएं...

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  15. "कुछ है....... " एक नवीन, खूबसूरत और अद्वित्य अभिव्यक्ति |

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  16. bhavnaon se paripoorna rachna hai........................

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  17. दिल की धड़कनें पाजेब-सी बजती है......
    मेरे अन्दर मोरनी थिरक उठी है,
    होठों पे कोई गीत फुहारों -से मचलते हैं......

    kuch tau hai jo sab badla badla nazar aane laga hai !!!!! hamesha ki tarah bahut badiya abhivyakti didi !!!!

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  18. bhig jana un lamho mein ke yaadon ki barsaat roj nahi hoti,dharti fisal rahi hai,behad sundar.

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