16 जून, 2008

नई रचना........


सारथी आज भी श्रीकृष्ण रहे,
पर महाभारत के दिग्गज यहाँ नहीं थे-
थी एक पत्थर हो गई माँ और उसके मकसद,
विरोध में संस्कारहीन घेरे थे...........
कृष्ण ने गीता का ही सार दिया,
और दुर्गा का रूप दिया,
भीष्म पितामह कोई नहीं था,
ना गुरु द्रोणाचार्य थे कहीं.........
दुर्योधन की सेना थी,
धृतराष्ट्र सेना नायक ,
और साथ मे दुःशासन !
एक नहीं , दो नहीं ,पूरे २४ साल,
चिर-हरण हुआ मान का,
पर श्रीकृष्ण ने साथ न छोड़ा..........
जब-जब दुनिया रही इस मद में ,कि-
पत्थर माँ हार गई , -
तब - तब ईश्वर का घात हुआ ,
और माँ को कोई जीत मिली....
अब जाकर है ख़त्म हुआ,
२४ वर्षों का महाभारत ,
और माँ ने है ख़ुद लिखा,
अपने जीवन का रामायण...........

16 टिप्‍पणियां:

  1. rashni ji
    maa ki hamesha jeet hoti hai aur hamesha hi hoti rahegi
    bahut achi rachna hai

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  2. ek maa ke gahre EHSAAS...maa ki KALAM se.....di Sukhad anubhav....

    ...EHSAAS!

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  3. कुछ संदर्भ भी दे देती तो रचना समझने में आसानी रहती.

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  4. नई रचना ........... बहुत शानदार कृति है ..... मैंने इसे आज कई बार पढा ...... दिल कि गहराईयों में उतरती है एक एक पंक्ति .......... बहुत अच्छा लिखा है आपने ... शुभकामनाएं......

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  5. beautiful...aap ne khud ke bare me likha hai na..very nicely express kiya hai apni feelings so...congratulation to u once again...waise bhi maa ki to humesha hi jeet hoti hi hai....

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  6. एक निजी अनुभव कब अनगिनत जिंदगियों की कहानी और दम तोड़ती
    आशाओं के लिए प्रेरणा का अमृत बन जाता है...आपकी इस कविता को
    पढ़ कर मन में कोई सवाल शेष नहीं रहते बस अनवरत जूझते रहने की
    एक असंभव सी दिखने वाली जीवटता के प्रति एक कौतुहल रह जाता है..
    यंहा समाज के दोहरे चरित्र के दंश की पीडा तो जरूर नजर आती है पर
    आत्मसम्मान और मकसद के सहारे उस दकियानुशी समाज के खोखलेपन
    को भी प्रमाणित कीया जा सकता है ....इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है है ये नयी रचना!!!
    .....
    आदर और शुभकामनाओं के साथ..
    ..देश.

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  7. "अब जाकर है ख़त्म हुआ,
    २४ वर्षों का महाभारत ,
    और माँ ने है ख़ुद लिखा,
    अपने जीवन का रामायण"...........
    इस महति महासमर की परिणति पर रचित माँ के रामायण को मेरा शत-शत नमन...

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  8. अब जाकर है ख़त्म हुआ,
    २४ वर्षों का महाभारत ,
    और माँ ने है ख़ुद लिखा,
    अपने जीवन का रामायण...........

    kamaal ka likhti hai aap......bahut khoob...

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  9. marm shabd ka wohi samjhe...
    jis par khud sab beeta hai...
    shabd bina ya shabd sang hi..
    tukdon main jo jeeta hai....

    Deepak

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शाश्वत कटु सत्य ... !!!

जब कहीं कोई हादसा होता है किसी को कोई दुख होता है परिचित अपरिचित कोई भी हो जब मेरे मुँह से ओह निकलता है या रह जाती है कोई स्तब्ध...