17 जून, 2008

दो सच...


(1) शब्दों का मर्म
शब्दों का मर्म जो समझते हैं,
वे मर्महीन कैसे हो सकते?
रिश्तों से टूटकर शब्दों के साथ जीना आसान नहीं होता,
इसे समझना आम लोगों के बस में नहीं होता......
एहसास तो सारी रात जागते हैं,
नींद से कोसों दूर आँखें

जागती आँखों के मर्म से अनभिज्ञ नहीं रहतीं.........
अनछुए एहसासों से अलग नहीं रहती।

(2) जिंदगी एक खुशनुमा पल................
जिंदगी एक खुशनुमा पल है,
निर्भर है तुम पर-इस पल को कैसे संवारते हो!
न वक़्त ठहरता है,
न लोग..........
पर गर तुमने वक़्त की नाजुकता को जान लिया,
तो ज़िन्दगी मेहमान बन जाती है,
मेहमानावाजी भी तुम पर-
चाहो तो कांटे बिखेर दो,
या रास्तों को फूलों से सजा दो,
जो भी करना है,जल्दी करो,
कभी भी हाथ आया वक़्त नाउम्मीदी मे ढल सकता है,
उसे गंवाकर किस्मत को जिम्मेदार न कहना.............

14 टिप्‍पणियां:

  1. mam

    aapki kavita padi

    or achi lagi

    weldone

    keep up the good work

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  2. एहसास तो सारी रात जागते हैं,
    नींद से कोसों दूर आँखेंजागती आँखों के मर्म से अनभिज्ञ नहीं रहतीं.........
    अनछुए एहसासों से अलग नहीं रहती।

    बहुत सुंदर एहसास ..बहुत सही लिखा है आपने रश्मि जी

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  3. Di! ab tumhari kavitayen, mere comments se upar ki baaten hoti ja rahi hai.....tumhari soch...is philospher jaisa hota ja raha hai, jo ek aam aadmi ki comments se upar ho chuki hai.......bahot khubsurat......bahna!!

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  4. Di.....Mukesh Bhaeeya ki baat ko hi repeat karoonga!.....waakayee aapki lekhni kamal ki hai..

    .....aapne apni kalam main ehsaason ko baand liya....ye ehsaas kaise koyee comment kare??

    .....saahity khud garvit hai....

    ...Ehsaas!

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  5. bahut achcha likhaa hai aapne...
    behtar prasstutikaran aur usse bhee achchaa marm...

    sundar kavita ke liye badhaai...

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  6. कभी भी हाथ आया वक़्त नाउम्मीदी मे ढल सकता है,
    उसे गंवाकर किस्मत को जिम्मेदार न कहना.............

    Achchi shiksha ke sath khubsurat avvyaqti.

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  7. jeevan ka sach batlaati aapki in rachnayon ne man moh liya hai .........

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  8. मेहमानावाजी भी तुम पर-
    चाहो तो कांटे बिखेर दो,
    या रास्तों को फूलों से सजा दो,

    Bahut hi sundar aur gudh panktiyan hai, sadhuvad is rachna ke liye...

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