20 जून, 2008

मृत्यु से पहले....


कैसे कोई झूठ बोलता है?
झूठ के धरातल पर,
ईश्वर के आगे सर झुकाता है!
क्या ईश्वर की शक्ति का डर नही?
या ईश्वर का भी सम्मान नही?
क्या कान पकड़ लेने से,
भगवान् हिंसक लोगों की हिंसा को
नज़रंदाज़ कर देते हैं?
................
पैसे की जीत कभी नहीं होती,
हो ही नहीं सकती.......
पैसे तो गली-गली बरसते हैं,
सुकून तो अमृत बूंद की तरह,
शरद पूर्णिमा को ही टपकता है.........
मैंने उसे ही इकठ्ठा किया है,
आश्चर्य!
उसने पैसे की आड़ में मेरा सुकून लेना चाहा है....
मेरे विचारों से कोई मुझे अलग कर दे,
ये मुमकिन नहीं!
विश्वास ने ही अब तक मुझे चलाया है,
वरना पैसों की कमी न थी.....
खुद्दारी का सुकून ले,
मैंने लक्ष्य पूरा किया ,
फेंके पैसों से मैंने अपने 'स्व' को
नहीं गंवाया-
तुम लाख सर पटक लो,
ईश्वर माफ़ नहीं करेगा,
मृत्यु से पहले एक-एक हिसाब करेगा............

13 टिप्‍पणियां:

  1. Such a nice blog. I hope you will create another post like this.

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  2. सुकून तो अमृत बूंद की तरह,
    शरद पूर्णिमा को ही टपकता है.........


    advitiy hai

    Anil

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  3. mam bahut hi badhiya

    mere hisab se to aapko thode thode din me dehradun ho aaana chahiye

    is karan aap mahabahrat or ramayan ko bhool jaatihain

    bahut hi acha likha hai
    mujhe acha laga

    best of luck

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  4. आपने बिलकुल सही कहा, इन्सान को अपने किये का फल जीतेजी ही मिल जाया करता है |

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  5. खुद्दारी का सुकून ले,
    मैंने लक्ष्य पूरा किया ,
    फेंके पैसों से मैंने अपने 'स्व' को
    नहीं गंवाया-
    तुम लाख सर पटक लो,
    ईश्वर माफ़ नहीं करेगा,
    मृत्यु से पहले एक-एक हिसाब करेगा............
    bilkul sahi baat,jaane se pehle har karm ka hisaab hota hai,har pankti apneaap meinek sundar sandesa deti,bahut badhai

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  6. सही कहा आपने

    हरेक पल का हिसाब मांगती है जिंदगी
    क्या कहे की खुद से शर्मसार है ?

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  7. Di...wastav main kisi bhee comment se upar hai aapkee ye kratee....
    sarwottam!

    sangrahneey kavita!!

    .....lajawaab!!

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  8. "ईश्वर" की "शक्ति" की बातें...
    सच्चा शख्स ही मानेगा...
    "झूठा" तो "ईश्वर" को भी..
    खुद झूठा ही तो जानेगा...

    दीपक शुक्ल

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  9. रश्मि जी आपकी रचना .....'' मृत्यु से पहले '' बहुत शानदार हैं ........... लेखन बड़ा ही शसक्त है ..... शुभकामनाएं......

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  10. फेंके पैसों से मैंने अपने 'स्व' को
    नहीं गंवाया-
    प्रेरणा श्रोत हैं... ख़याल बहुत...बहुत ही अच्छे हैं..!

    "वो" तो बाज़ार में खड़े हैं खुद को ऊँची कीमत में बेचने को...
    एक सिक्का उछालो तो सब सुन लेंगे..
    वहां बस एक वो फ़कीर है... जिसे अज़ान सुनाई दे जाती है..
    क्योंकि वो वही सुनना चाहता है..


    सुकून तो अमृत बूंद की तरह,
    शरद पूर्णिमा को ही टपकता है......
    मैंने उसे ही इकठ्ठा किया है,
    आश्चर्य!

    "वो" इस आश्चर्य से अवगत नहीं...!!!

    रश्मि maa'm.. बहुत सारी सुभकामनायें.. आपको..!

    उत्तर देंहटाएं
  11. तुम लाख सर पटक लो,
    ईश्वर माफ़ नहीं करेगा,
    मृत्यु से पहले एक-एक हिसाब करेगा............

    kitna shi kaha hai aapne...........

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