08 अक्तूबर, 2009

पगडण्डी


समय कहता रहा,
हम सुनते रहे
कब शब्द उगे हमारे मन में
जाना नहीं
सुबह जब अपने नाम के पीछे
पड़े हुए निशानों को देखा
तो जाना-
एक पगडण्डी हमने भी बना ली !

44 टिप्‍पणियां:

  1. आदरणीया रश्मि जी,
    आपकी कविता छोटी मगर गहरे भावों को समेटे है---
    पूनम

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  2. बेहद खूबसूरत पगडण्डी बनाया इन निशानो ने

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  3. छोटी मगर बेहद भावपुर्ण रचना,।

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  4. यदि यह एक प्रयोग है तो बहुत ख़ूबसूरत .दृश्य एवं भावनाओ को एक साथ लाना एक सफल प्रयाश रहा .जितनी मन को छूनेवाली कबिता है ,उतनी ही अनंत तक फैली हुई शांत ,अकेली पगडण्डी .बधाई .----------डॉ .राजेंद्र प्रसाद यादव .

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  5. rashmi ji.....

    bass aise to ban jati hain pagdandiyan....aur chalti jati hai zindagi....sundar abhivyakti hai...gahare bhav hain.....badhai

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  6. आपने समय को सुना, अपने शब्दों से नए नए रास्ते खोज आगे बढ़ी ... पीछे छोडी कुछ पगडंडिया जो हम सबका आदर्श बन गई ..ILu...!

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  7. बहुत सउंदर लगी आप की यह पगडंडी.
    धन्यवाद

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  8. वाह वाह
    क्‍या बात है
    कमसे कम शब्‍दों में
    पूरी कहानी सी लगी
    इसी को कहते हैं काव्‍यकौशल
    http://chokhat.blogspot.com/

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  9. कब शब्द उगे हमारे मन में ....जाना नहीं
    कहाँ जान पाते हैं ..इतनी छोटी कविता ने इतनी लम्बी पगडण्डी बना ली ...!!

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  10. jab pgdandi hi itni khubsurat hai to
    sfar ke kya khne ?khan se lati hai ye khajana aap?
    ati sundar bhav .

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  11. pagdandi---------log gagar me saager bahrte he lekin aapko bundon me smandar smetne ki mharaht hasil he..aap ki yhi nhi hr poem pdna phaad ke uper khde ho kr khuli hva me saans lene jesa hi he,.....u r pride of india...

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  12. मैं काफ़ी दिनो से आपकी कविताएँ पड़ रहा हूं, आज इस कविता के माध्यम से मैने भी शायद एक पगडंडी बना ली, आपकी कविटायों को पड़ते रहने की.... बहुत अच्छी कविता है आपकी...

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  13. हर बार की तरह कम शब्दों में बहुत सारे एहसास समेट लिए

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  14. सच कहा रश्मी जी, वक़्त को बस सुनते देखते रह जाते हैं और अपनी पगडण्डी हम कब बना लेते पता भी न चलता| ज़िन्दगी के यथार्थ को बहुत सुन्दर शब्दों में कहा है आपने, शुभकामनायें!

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  15. gaagar mein saagar samet liya aapne to........kuch hi lafzon mein sare ahsason ko bayan kar diya........badhayi

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  16. बहुत ख़ूबसूरत भाव और अब पगडण्डी इतनी सुद्रढ़ हो गयी है कि दूर से ही अपनी उपस्थिति का आभास कराती है...शुभकामनाएं

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  17. वाह क्या बात कही.....हमेशा की ही तरह सुन्दर भावुक रचना..

    आपने जो चित्र लगायी है अपनी रचना के साथ,उसे देख तो मन का क्या हाल हुआ क्या बताऊँ....बिकुल ऐसा ही दृश्य हमारे गाँव में घर के पिछवाडे कतार में लगे आम के पेडों के बगल से गुजर रहे पगडंडी का दीखता था...

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  18. बहुत सुन्दर विचारों की पगडण्डी !!

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  19. पहले बार आपके ब्लॉग पर
    आया , पसंद आयी आपकी रचना

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  20. mere nam ki pagdandi
    kab ban gyi muzhe pata hi nhi chala .....ab dekhti hu k kai aor raste niakalne lage uske charo aor mere kai dusre namo ki tarah .....
    ..
    .
    .
    .





    aapki post k reply mai

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  21. आप अपने लेखन से हमेशा मन्त्र मुग्ध कर देती हैं...चंद शब्दों में कितनी गहरी बार कितनी आसानी से...कमाल है..वाह...
    नीरज

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  22. गहरे अर्थ लिए छोटी किन्तु शशक्त रचना है .......... आपकी हर रचना प्रभावी और मन में सीधे उतरती है ........... अभिव्यक्ति को समझना अनूठा आनंद देता है आपकी रचना में ............

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  23. ye pagdandi ab pagdandi nahi rahi setu ho chuki hai......ye bhi aapne jana hi nahi.....:-)

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  24. बहुत ही ख़ूबसूरत, भावपूर्ण और शानदार रचना लिखा है आपने जो काबिले तारीफ है!

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  25. कम शब्दों में बहुत सुन्दर कविता।
    हेमन्त कुमार

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  26. असाधारण शक्ति का पद्य, बुनावट की सरलता और रेखाचित्रनुमा वक्तव्य सयास बांध लेते हैं, कुतूहल पैदा करते हैं।

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  27. वाह इतने कम शब्दों मे इतनी खूबसूरत बात कहना तो कोई आपसे ही सीखे..और कितनी बड़ी बात..यह पगडंडी हमारा इतिहास भी हो सकती है, वि्ज्ञान भी, सभ्यता भी हो सकती है और हमारा विनाशमार्ग भी..जबर्दस्त..फिर से पढ़ता हूँ.

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  28. बहुत सुन्दर पगडँडी बनाई है आपने। ये तस्वीर तो हमारे शहर की लग रही है बधाई ओस सुन्दर रचना के लिये

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  29. बहुत सुन्दर रचना । आभार

    ढेर सारी शुभकामनायें.

    SANJAY KUMAR
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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  30. कम शब्दों में बहुत सुन्दर कविता।

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  31. कम शब्दों में बहुत सुन्दर कविता।

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