22 अक्तूबर, 2009

मेरी नज़्म............


मेरी नज्मों ने तुम्हें आवाज़ दी है
ओस की तरह तुम आओ
सुबह की पहली किरण में तुम्हें देखूं
आंखों में काजल बनाकर
दिन गुजार लूँ
फिर शरद चांदनी में
तुम्हारी राह देखूं..........!
मेरी नज्मों ने तुम्हें आवाज़ दी है
पर्वतों पर
बादल बन उतर आओ
छू जाओ मुझे
मैं भीग उठूं
फिर तुम
इन्द्रधनुष बन जाओ
और मेरी नज्मों को
सात रंगों की बानगी दे जाओ...........!
मेरी नज्मों ने तुम्हे आवाज़ दी है
अगर की सुगंध में बस जाओ
मेरी पूजा का प्रसाद बन
मुझे आशीष दो
मंत्र बनकर मेरे अन्दर
मुखरित हो जाओ.............!
मेरी नज्मों ने आवाज़ दी है
तुम मेरी नज़्म बन जाओ !!!!!!!!!!!!!!!!!

53 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर भाव, अच्छी कविता |

    ब्लॉग भी खूब जच रहा है :)

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  2. मेरी नज्मों ने आवाज़ दी है
    तुम मेरी नज़्म बन जाओ !!!!!!!subh se bnati rahi..mitati rahi...kuch na ban paya...tera naam bas ik baar likha or nazam ban gyee....

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  3. wah rashmiji, sabdon se kitna sundar kalpanik chitran kiya hai aapne. ek ek sabd mano jeevant ho utha hai. sach mein aisi rachnayen padh kar achha lagta hai.

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  4. oss ki bundon si sunder kavita,nazmon mein ehsaas ban beh rahe hi dil ki aawaz,khubsurat.

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  5. ओस की बूँदो मे सुबह की पहली किरन और नज़्मो की सदा --
    क्या एहसास है क्या ज़ज्बा है!!
    बहुत ही सुन्दर

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  6. वाह बहुत सुंदर, अति सुंदर रचना.
    धन्यवाद

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  7. तुम मेरी नज़्म बन जाओ......
    बहुत सुन्दर भाव हैं रश्मि जी ....बधाई
    blog ka kalevar khoobsurat hai

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  8. bahut achi rachna hai..ek naam me wo rang hai saare jo ek nazm ko janam de..haa har kisi keliye bas nama badal jata hai aur ek nai nazm janam leti hai har kisi ke liye.
    bahut sunder

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  9. rashmi ji,

    bahut sundar bhavon se bhari aur sundar shabdon se sanjoyi ek khoobsurat rachna.....badhai

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  10. बहुत ही सुरीली है आपके नज़्म की यह इन्द्रधनुषी आवाज़ ...

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  11. मेरी नज्मों ने तुम्हें आवाज़ दी है
    अगर की सुगंध में बस जाओ
    मेरी पूजा का प्रसाद बन
    मुझे आशीष दो
    मंत्र बन कर मेरे अन्दर
    मुखरित हो जाओ

    स्त्री मन का संपूर्ण समर्पण का भाव मुखरित हो उठा है आपकी इन पंक्तियों में .....!!

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  12. bahut sundar jeevant kavita .
    bhor ka ahsas dilati sapno ko spno se jodti pyari si najm .
    abhar

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  13. आज नज्मों को भी रश्क हो रहा होगा खुद पर ,सीधे शब्दों में कहूँ तो ये कविता नज्म न होकर भी नज्म की अब तक की सबसे प्रामाणिक परिभाषा है ,ये कविता इस वर्ष मेरे द्वारा पढ़ी गयी सर्वश्रेष्ठ कविता है ये कहने में मुझे कोई संदेह नहीं है

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  14. सुंदर कविता, प्रकृती के उपमान देकर आपने इसे कोमलता प्रदान की है ।

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  15. कविवर पन्त जी की मानस पुत्री की कविता का पर्याय
    रश्मि-प्रभा की लेखनी बहुत सशक्त है।
    बहुत बधाई!

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  16. आवेश जी का कहना बिलकुल सटीक है. ये नज़्म है ही ऐसी.
    ओस की तरह तुम आ जाओ से लेकर मेरी नज़्म तुम बन जाओ तक बेहतरीन काश मैं इस पर ग़ज़ल कह सकूं.

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  17. बहुत सुन्दर भीनी भीनी प्यार की खुशबू और रंगों से भरी कविता ...!!

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  18. rashmi ji aapki rachna chhayawadi guno se bharpoor hai ! mahadevi verma ki rachnaaon se bhav hain aapki kavitaaon mein ! bahut sunder rachna hai aapki... badhai ho !

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  19. didi aapke blog pe aakr man khush ho jata hai ..itni khubasurt nazm jo mila padne ko...bahut hi sunder

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  20. एक तेरे आने से और एक तेरे जाने से जो बनती है मेरे मन के दरो दीवारो पर वही मेरी नज़मो की कहानी है ...............

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  21. nari man ki komal bhavnaon ko shabd de diye............badhayi........itni sundar kavita ke liye.

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  22. कमाल की नज़्म कही है आपने...वाह...और हाँ आपके ब्लॉग की साज सज्जा बहुत मन भावन है...आपने तो पूरी कायापलट कर डाली अपने ब्लॉग की...बहुत सुन्दर और आकर्षक कर दिया है इसे आपने...

    नीरज

    उत्तर देंहटाएं
  23. कमाल की नज़्म कही है आपने...वाह...और हाँ आपके ब्लॉग की साज सज्जा बहुत मन भावन है...आपने तो पूरी कायापलट कर डाली अपने ब्लॉग की...बहुत सुन्दर और आकर्षक कर दिया है इसे आपने...

    नीरज

    उत्तर देंहटाएं
  24. बेहतरीन रूप से मन के भावों को आपने नज़्म में ढाला है
    वाह !!

    और हाँ आपका ब्लॉग अब बहुत मनभावन लग रहा है

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  25. इन्द्रधनुशी रंगो से सजी कविता……।
    बहुत खूब रश्मि जी…॥अति सुन्दर भाव्…………।

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  26. rashmi ji,
    aapke is nazm ko kya kahu... nazm ne nazm ko aawaz dee hai, bahut sundar.
    koi nazm isase khubsurat kya ho sakti jab zindgi ka har roop usme samahit ho.
    aapkee rachnatmakta aur samvednayen yun hin bani rahen, shubhkamnayen.

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  27. अपने अस्तित्व को स्वीकार कराने के लिए जिस भाव भरे साथ की आवश्यकता होती है, उसे बहुत करीने से आपकी ये नज़्म कह गई............

    बधाई.

    चन्द्र मोहन गुप्त
    जयपुर
    www.cmgupta.blogspot.com

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  28. LAJAWAAB LIKHA HAI .... ITNE BEHATREEN EHSAAS PIRO KAR IS NAJM KO KAHA HAI ... KAMAAL ....

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  29. कमाल की नज़्म कही है आपने...वाह...और हाँ आपके ब्लॉग की साज सज्जा बहुत मन भावन है...
    बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
    ढेर सारी शुभकामनायें.

    SANJAY KUMAR
    HARYANA
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  30. बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
    ढेर सारी शुभकामनायें.

    SANJAY KUMAR
    HARYANA
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  31. bahut khoobsurat rachna.......


    aas meri ho prayaas tera ho.....
    tu hai kareeb .....
    kuchh abhaas aisa ho....
    vasanti pavan ban kar
    atthkheliyaan kar mujhse.......
    mein jinda hoon....
    ye ehsaas kuchh aisa ho....!!

    उत्तर देंहटाएं
  32. behad khoobsurat rachna......

    kuchh aapki nazar..Rashmi ji...


    aas meri ho prayaas tera ho.....tu hai kareeb .....kuchh abhaas aisa ho....vasanti pavan ban kar atthkheliyaan mujhse.......mein jinda hoon....ye ehsaas kuchh aisa ho....!!

    उत्तर देंहटाएं
  33. "मेरी नज़्मों ने तुम्हे आवाज़ दी है" का बार बार आना लय मे अवरोध उत्पन्न कर रहा है ..पढ़कर देखिये एक बार ।

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  34. दो दिन की व्यस्तता के कारण इतनी ख़ूबसूरत कविता पढने से वंचित रह गयी.... तारीफ के लिए शब्द नहीं हैं ....बिलकुल अनछुए भाव लिए है ये नज़्म...

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  35. aapke bhaav bahut sunder hote hai aur alag bhi..shabdo ki dhani to aap hai hi saath hi vicharo ki bhi :-)

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  36. बहुत सुन्दर भाव, कमाल की नज़्म..हार्दिक बधाई

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  37. मेरी नज्मों ने आवाज़ दी है
    तुम मेरी नज़्म बन जाओ !!!!!!!

    kaun nahi aaiyega rashmi ji is virah yaachna ke baad !!
    bus us tak pahunche to sahi ye vedna !!

    Marmik evm prabhavshali...

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  38. मेरी नज़्मों ने तुम्हें आवाज दी है....

    बहुत ही खूबसूरत पंक्तियां मैम...और ब्लौग का नया कलेवर अच्छा है।

    उत्तर देंहटाएं
  39. मेरी नज़्मों ने तुम्हें आवाज दी है....

    बहुत ही खूबसूरत पंक्तियां मैम...और ब्लौग का नया कलेवर अच्छा है।

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  40. मंत्र बन कर मेरे अन्दर मुखरित हो जाओ...कितना सुन्दर.

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  41. ओस में लिपटी पहली किरण है ,
    आँखों का काजल और चन्दा की चादनी भी है ,
    बादल है, सातरंगो से भरा इन्द्रधनुष भी है
    मंत्र-नाद और प्रसाद भी है ...

    इस् से पवित्र, पावन, पूर्ण नज़्म क्या होंगी ?
    यह जादू सिर्फ तुम ही कर सकती हो माँ ... ILu ...!

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  42. Tum meri nazm ban jao... waaah..

    and thanks for including my blog in your blog roll ..

    Thanks you

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