13 दिसंबर, 2009

प्राण-संचार


तुम्हारे चेहरे की धूप
तुम्हारी आँखों की नमी
तुम्हारी पुकार की शीतलता
मुझमें प्राण- संचार करते गए ........
दुःख के घने बादलों का अँधेरा
मूसलाधार बारिश
सारे रंग बदरंग थे !
पर तुमने अपनी मुठ्ठी में
मेरे लिए सारे रंग समेट रखे थे
मैं रंगविहीन हुई ही नहीं !
लोग राज़ पूछते रहे हरियाली का
विस्मित होते रहे ....
मैं अपने आत्मसुख की कुंजी लिए
तुम्हारे धूप-छाँव में
ज़िन्दगी जीती गई....
कहने को तुम पौधे थे
पर वटवृक्ष की तरह
मुझ पर छाये रहे
मुझमें प्राण-संचार करते गए ...............

52 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत छायादार वटवृक्ष .....यूँ ही हरीतिमा रहे ज़िन्दगी में...

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  2. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति!
    हृदय पर सीधे असर करती है!

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  3. यह रिश्ता होता ही ऐसा है .....समझ मे नही आता कि किस पर कौन सुख और आनंद की बरसात कर रहा है।

    बहुत भावपूर्ण रचना है। बहुत गहरे भीतर तक उतर गई। बधाई स्वीकारें।

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  4. सुन्दर प्रस्तुति .. आनंद आ गया ....

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  5. ज़िन्दगी की ख़ूबसूरती तथा रिश्तों की पाक़ीज़गी का अहसास मन को गहरे भिंगो देता है।

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  6. रश्मि जी,
    बेहद आत्मीय शब्द...
    ''मैं अपने आत्मसुख की कुंजी लिए
    तुम्हारे धूप-छाँव में
    ज़िन्दगी जीती गई...''
    भाव भीनी रचना केलिए बधाई स्वीकारें!

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  7. kahane ko tum paudhe the
    par vatvriksh ke tarah ..
    mujh par chhaaye rahe

    kavita prerna daayii lagi
    sukomal bhav se paripurn lagi
    sundar kavita

    kishor

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  8. दी मेरी प्यारी सी आप येत बताएं इतनी मार्मिक, अर्थवान रचना इतना सहजता पूर्वक कैसे लिख लेती हैं.इर्ष्या होती है.काश!लेकिन खुशी इसलिए होती है की दीदी ने लिखा है!दीदी समय नहीं मिल पाता है वरना आपकी कविताओं से रूबरू तो होता ही रहता हूँ.

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  9. --सारे रंग बदरंग थे
    पर तुमने अपनी मुठ्ठी में
    मेरे लिए सारे रंग समेट रखे थे
    मैं बदरंग हुई ही नहीं-
    ..कमाल की अभिव्यक्ति, मेरी बधाई स्वीकार करें...।

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  10. दीदी चरण स्पर्श

    बेहद उम्दा रचना ।

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  11. तुम्हारे धूप-छाँव में
    ज़िन्दगी जीती गई..
    भावनात्मक रचना है.
    -विजय

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  12. आपकी कविताओं के जरिये उस वट वृक्ष की असीम शांतिदायक स्नेह और प्रेमभरी छाँव हम तक भी पहुँच रही है ...बहुत आभार ...!!

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  13. भावपूर्ण और आत्मीय रिश्तों से ऐसा ही सम्बल मिलता है , अच्छी प्रस्तुति

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  14. आपने अपने लहू से, अपनी भावनाओ के जल से सींचा है इस पौधे को , तभी तो इसकी शाखाये इतनी रंगों भरी और सशक्त है , जो हर धुप और छाव में साथ साथ है ...ILu ..!

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  15. मम्मी जी..... खूबसूरत शब्दों के साथ.... बहुत ही उम्दा रचना....

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  16. जीवन में कोई ना कोई चीज़ होती है वटव्रक्ष की तरह ........ हम सब उसकी छायाँ में साँस लेते हैं ........
    बहुत ही गहरी अभिव्यक्ति .......

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  17. सच कहा आपने, बच्चे माता - पिता के लिए उनके जीवन श्रोत ही होते है, उनके चेहरे की ख़ुशी, उनकी सफलता विपरीत परिस्थितयों में भी माता - पिता को आत्मिक सुख दे जाने में समर्थ होते है | एक सकारात्मक, भावनात्मक और बहुत ही उत्कृष्ट रचना |

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  18. अपने परिजनों की छाँव तले सुन्दर अभिव्यक्ति है !!!

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  19. बहुत अच्छा लिखा आपने
    बहुत-२ आभार

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  20. kya kahu bhaut kuch to ye rachna kha gayee...kai baat kuch bhaut chhota hokar bhi apne baddapan ka ahsaas karata hai vaisi hi lagi iski bhavna

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  21. हर शब्‍द में गहराई, बहुत ही बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

    Sanjay kumar
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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  22. बहुत सुंदर भाव समेटे हुए अक अच्छी रचना

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  23. बहुत ही भावमय प्रस्‍तुति
    लिये हुये बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

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  24. -सारे रंग बदरंग थे
    पर तुमने अपनी मुठ्ठी में
    मेरे लिए सारे रंग समेट रखे थे
    मैं बदरंग हुई ही नहीं-

    प्रेम के तो रंग ही सारे बदरंग हो गए हैं ......क्या कहूँ.....!?!

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  25. Rashmi jee, namaskar.
    "Chehre ki dhoop" ne vatsalya ka jo bargadi vistar liya hai,behad khubsurat aur anupranit karne wala hai. Yah aapki mamtamayee soch ka darpan sa prateet hota hai.Aapke blog mein tippani bhejne ki kai bar koshish ki par safal nahi ho paya,isliye scrape ke madhyam se bhej raha hun.

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  26. विलक्षण रचना...हमेशा की तरह कमाल के शब्द और भाव...बहुत बहुत बधाई...
    नीरज

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  27. सुन्दर कविता । बीच में दो जगह गैप दें ।

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  28. कितना सुंदर लिखती हैं आप ,भाव आपके शब्दों की पकड़ में आते ही नया रूप धर लेते हैं ,बहुत बधाई ,ईश्वर करे साहित्य की उच्चाईयां आपके कदम चूमें । शुभकामनायें ।

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  29. Didit ji bahut sundar kavitalagi. Bahut gahari hoti hai aapki rachna mein. bahut achha lagata hai ki hindi sahitya ko aap smardh kar rahi hain....

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  30. आपकी कविताओं का प्लाट हर बार एकदम अपना सा भाव देता है कि जैसे मैं कहना चाहता था ये बात तो।

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  31. वटवृक्ष की तरह
    मुझ पर छाये रहे
    मुझमें प्राण-संचार करते गए ...............

    अत्यंत भावपूर्ण आत्मीय पंक्तियाँ कह गए आप. मन को सुकून मिला.

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  32. बहुत सुंदर और उत्तम भाव लिए हुए.... खूबसूरत रचना......

    संजय कुमार
    हरियाणा
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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  33. बहुत ही सुंगर भावों से सजी लेखनी.. आपके शब्दों को एक रेशेदार जाल की तरह पेश करता है हमारे बीच.
    जिसमें कोई एक जीवन सांस ले रहा होता है।

    शुभकामनाऐं ।।।

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  34. maa'm aapko padhna hamesha se sukhad anubav raha hai.......bahut achhi hai aapki ye rachna

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  35. पौधे में वटवृक्ष की कल्पना के लिये साधुवाद.

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  36. बहुत सुन्दर मन को छूने वाली रचना---।
    हेमन्त कुमार

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  37. मै रंग विहीन हुई ही नही.....
    लोग राज पूछतें रहे हरियाली का
    विस्मित होते रहे.....

    सुन्दर प्रेम भरे अल्फाजों में लिखी गई ये कविता.....

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  38. मै रंग विहीन हुई ही नही.....
    लोग राज पूछतें रहे हरियाली का
    विस्मित होते रहे.....

    -अद्भुत!!
    - प्रेम भाव लिए बेहतरीन कविता.

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  39. वटवृक्ष की तरह
    मुझ पर छाये रहे
    मुझमें प्राण-संचार करते गए ...............
    bahut hi sundar bhav lahra rahe hai ,aapko nahi dekha kai roj se ,socha aapki rachna agli aai nahi ,do teen dino se doore blog ke sahare aapka blog ka pata le aaj aa gayi ,naam hi rashmi prabha ,is dohri raushni me to jagmayega hi dharti kya aakash bhi .

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  40. Bahut samvedanatmak kavita.---dil ko chhuu gayee.shubhakamnayen.
    Poonam

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  41. Prem ke paavan nirmal bhavon ko jis prakaar aapne abhivyakti di hai...kya kahun......WAAH !!!

    Marmsparshi atisundar rachna....

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  42. एक पूरा मौसम जैसे सिमट आया हो आपकी इन पंक्तियों मे..कौन कहता है कि सिर्फ़ तीन मौसम होते है..दिल के इन मौसमों की विविधता का कोई अंत नही....
    बहुत बेहतरीन...

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  43. Manoj sundriyal

    Aapki kavita (wajan) me itna wajan hai ki jisne mujhe itna majboor kiya ki mai aapko ek tippani jaroor likhoon, maine use itni baar padha ki yaad karne ki gustaki kar baitha....

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