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मेरे एहसास इस मंदिर मे अंकित हैं...जीवन के हर सत्य को मैंने इसमे स्थापित करने की कोशिश की है। जब भी आपके एहसास दम तोड़ने लगे तो मेरे इस मंदिर मे आपके एहसासों को जीवन मिले, यही मेरा अथक प्रयास है...मेरी कामयाबी आपकी आलोचना समालोचना मे ही निहित है...आपके हर सुझाव, मेरा मार्ग दर्शन करेंगे...इसलिए इस मंदिर मे आकर जो भी कहना आप उचित समझें, कहें...ताकि मेरे शब्दों को नए आयाम, नए अर्थ मिल सकें ...

11 December, 2009

ज़िन्दगी


ज़िन्दगी कभी समतल ज़मीं पर नहीं चलती
उस के मायने खो जाते हैं
तूफानों की तोड़फोड़
ज़िन्दगी की दिशा बनती है
रिश्तों के गुमनाम अनजाने पलों से
आत्मविश्वास की लौ निकलती है

42 टिप्पणियाँ:

संत शर्मा ने कहा…

सच कहा आपने "रिश्तों के गुमनाम अनजाने पलों से, आत्मविश्वास की लौ निकलती है" |

GAURAV VASHISHT ने कहा…

truely said Rashmi ji
badhaie

वाणी गीत ने कहा…

तूफानों के तोड़ फोड़ से आत्मविश्वास की लौ निकलती है ...
फिर जयशंकर प्रसाद ये क्यों कह गए ...
तुम पियूष स्त्रोत सी बहा करो ...जीवन के सुन्दर समतल में
जब जीवन समतल ही नहीं ...!!

रश्मि प्रभा... ने कहा…

हर व्यक्ति अपनी भावनाओं के गर्भ से ख्याल लेकर आता है......

kishor kumar khorendra ने कहा…

rishto ke gumnaam anjaan palo se ...

kitni sundar baat kahi hai aapne
jivan ka vistaar
samgr rup se aese hi ho pata hai

bahut hi achchha rashmi prabha ji ..

kishor

अर्शिया ने कहा…

शायद गागर में सागर ऐसे ही भरते हैं।
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शानदार रही लखनऊ की ब्लॉगर्स मीट
नारी मुक्ति, अंध विश्वास, धर्म और विज्ञान।

अनिल कान्त : ने कहा…

सही कहा आपने

मनोज कुमार ने कहा…

इस कविता में अनुभूति की सघनता एवं संवेदना का संश्लिष्ट प्रभाव स्पष्ट है।

richa ने कहा…

ज़िन्दगी का यूँ समतल ज़मी पर ना चलना ही उसकी खूबसूरती को और बढ़ा देता है... हर नए पल में नया एहसास, नयी खोज, नया रिश्ता...

अजय कुमार ने कहा…

जिंदगी का रास्ता ऊबड़खाबड़ है , सहमत हूं

sangeeta ने कहा…

ज़िन्दगी में रिश्ते बहुत अहम् भूमिका निबाहते हैं...अच्छी पेशकश .

Ravi Rajbhar ने कहा…

Shabd nahi mere paas aapki tarif ko....!

वन्दना ने कहा…

zindagi samtal hoti to uske mayne hi kho jate..........bilkul sahi kaha zindagi ke ubad khabad raston se gujrkar ha rtoofan se ladne ke baad hi aatmvishwas badhta hai........chand shabdon mein hi zindagi ko bayan kar diya........badhayi.

ρяєєтι ने कहा…

kuch shabdo main bahut si ankahi baat samjha jana koi aap se seekhe....ILu...!

संजय भास्कर ने कहा…

बहुत सुंदर और उत्तम भाव लिए हुए.... खूबसूरत रचना......

shikha varshney ने कहा…

रश्मि दी ! वाह क्या बात कही है ...एकदम सच्चाई की धरातल पर सुंदर भावनाए.

महफूज़ अली ने कहा…

मम्मी जी.... बहुत ही बेहतरीन अभिव्यक्ति के साथ ....बहुत सुंदर रचना...

Rajiv ने कहा…

Jindgi ki dagar jitni muskil hoti hai, insan use utni hi shiddat se asan banane mein jut jata hai.kafi prernadayak hai aapki yah prastuti.Prakriti aur manushya ke rishto aur usse upja atmwishwas.Behad kubsurat hai.

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना .....

Suman ने कहा…

nice

AlbelaKhatri.com ने कहा…

sundar bhav ...achhi kavita

Udan Tashtari ने कहा…

रिश्तों के गुमनाम अनजाने पलों से,
आत्मविश्वास की लौ निकलती है|


-सटीक व्याख्या....बहुत बढ़िया!!

rashmi ravija ने कहा…

तूफानों की तोड़ फोड़ और ज़िन्दगी जीने की जद्दोजहद...सही कहा आपने इनसे ही आत्मविश्वास की लौ निकलती है

Devendra ने कहा…

आपने जो लिखा वह सत्य है
मगर लगा कि कविता तो अभी शुरू हुई थी....!

Shobhna Choudhary ने कहा…

shayad rasta samtal ho jaye to zindgi zine ka maja bhi khatam ho jayega.....

श्याम कोरी 'उदय' ने कहा…

... sundar rachanaa !!!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी क्षणिकाएँ सीधे दिल में उतर जाती हैं।।

creativekona ने कहा…

कम शब्दों में बेहतरीन अभिव्यक्ति।
हेमन्त कुमार

अभिषेक प्रसाद 'अवि' ने कहा…

adbhutaas...

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

Bahut achchhe dhang se samjha hai aapne Zindagi ko.

Jyotsna Pandey ने कहा…

जीवन की उथल-पुथल और उससे प्राप्त होते आत्मविश्वास, प्रतिभाषित करते हैं आपके लेखन को ............
उथल-पुथल और आत्मविश्वास....एक विरोधाभास का समन्वय ...

प्रणाम के साथ शुभकामनायें.........

दिगम्बर नासवा ने कहा…

आपके चिंतन में नये अर्थ हैं .......
ये सच है जीवन में नये रिश्ते बनते हैं और उनसे आत्मविश्वास भी आता है ...... पर कभी कभी रिश्तों से आत्मविश्वास डगमगाने भी लगता है .....
आपकी रचना उद्वेलित करती है मन को ......

अल्पना वर्मा ने कहा…

Sach kahaa hai!

अम्बरीश अम्बुज ने कहा…

jo samtal hoti zindgi ki dagar to shayad itna accha na lagta ye safar... fir zindgi gujar jaati bas....

RAJNISH PARIHAR ने कहा…

कम शब्दों में बहुत ही अच्छी रचना...बेहतरीन अभिव्यक्ति.....

परमजीत बाली ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना है।बधाई।

KK Yadav ने कहा…

Beautiful expressions !!

तोसे लागे नैना ने कहा…

बिलकुल सही कहा।

jenny shabnam ने कहा…

satya wachan rashmi ji, badhai.

Apanatva ने कहा…

bahut sunder rachana.

संजय भास्कर ने कहा…

सच कहा आपने "रिश्तों के गुमनाम अनजाने पलों से, आत्मविश्वास की लौ निकलती है" |

kumar ने कहा…

kya bat hai....