29 दिसंबर, 2009

एक अलग पगडंडी




तराजू के पलड़े की तरह
दो पगडंडियाँ हैं मेरे साथ
एक पगडंडी
मेरे जन्मजात संस्कारों की
एक परिस्थितिजन्य !
मैंने तो दुआओं के दीपक जलाये थे
प्यार के बीज डाले थे
पर कुटिल , विषैली हवाओं ने
निर्विकार,संवेदनाहीन
पगडंडी के निर्माण के लिए विवश किया
................
दुआओं और संवेदनाहीन के मध्य की मनःस्थिति
कौन समझता है !
समझकर भी क्या?
अनुकूल और विपरीत पगडंडियाँ तो साथ ही चलती हैं !
पलड़ा कौन सा भारी है
कौन कहेगा ?
वे पदचिन्ह - जो दुआओं की पगडंडी पर हैं
या वे पदचिन्ह
जिन्होंने आँधियों का आह्वान किया
और एक अलग पगडंडी बना डाली !

31 टिप्‍पणियां:

  1. aaj ki sthitiyo ka chitran karti ytharth ujagar karti bahut sundnr abhivykti .
    anukul aur prtikulta ka ka samnjsy
    aur unse pare apni alg pgdandi .....
    vah kya bat hai ?

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  2. ज़िन्दगी में परिस्थितिजन्य पगडंडियों पर चलना ही पड़ता है....
    भावों को खूबसूरत शब्द दिए हैं.......बधाई
    नव वर्ष की शुभकामनायें

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  3. मन की इस स्थिति को आप ने शब्दों में बड़ी ही खूबसूरती से बाँधा है..बहुत मुश्किल है कोई एक राह चुनना या अलग एक पगडंडी बना लेना..यह स्थिति जब तक समझ आती है बहुत देर हो जाती है.
    आप को व आप के परिवार में सभी को नव वर्ष की शुभकामनायें

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  4. बहुत अच्छी अभिव्यक्ति है। मेरे ब्लाग पर भी आपका स्वागत है धन्यवाद्

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  5. नैतिकता अनैतिकता के बीच द्वंद तो हमेशा से चलता है
    आदमी हमेशा इन दो पगडंडियों के बीच खुद को किंकर्तव्यविमूढ़ की स्थिति में महसूस करता है।
    सच यह भी है कि आदमी परिस्थितियों का दास होता है।
    --इस मनः स्थिति को परिभाषित करती कविता के लिए बधाई स्वीकार करें।

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  6. एक बहुत ही भावपूर्ण रचना के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद
    आपको नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं।

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  7. बहुत सुंदर भाव लिये है आप की यह कविता, कही ना कही दर्द है इन शव्दो मै

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  8. आ गई हैं सर्दियाँ सुस्ताइए।
    बैठकर के धूप में मस्ताइए।।

    आने वाला साल आपको मंगलमय हो!

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  9. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  10. जीवन में बहुत से पल ऐसे आते है जहाँ मनुष्य के सामने दो रास्ते होते है ..कुछ उसके मन में उपजता है और कुछ परिस्थितिवश उत्पन्न होती है..बढ़िया भाव प्रस्तुत किया है आपने कविता में..बढ़िया लगा..धन्यवाद!!

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  11. अपने मनोभावों को बहुत सुन्दर शब्द दिए है। बढ़िया रचना है।बधाई।

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  12. नयी पगडंडी बनाना दुरुह तो होता है..और जोखिम भरा भी..मगर दुनिया ऐसे ही इन्ही नयी पगडंडियों पर आगे बढती है..और वो सारे लोग भी..जिन्हे बनी-बनाई पगडंडियों पर चलने की आदत हो जाती है..

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  13. अंतर्भावों को सुन्दर शब्दों में अभिव्यक्ति दी है, बहुत शानदार!!

    --

    यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि आप हिंदी में सार्थक लेखन कर रहे हैं।

    हिन्दी के प्रसार एवं प्रचार में आपका योगदान सराहनीय है.

    मेरी शुभकामनाएँ आपके साथ हैं.

    नववर्ष में संकल्प लें कि आप नए लोगों को जोड़ेंगे एवं पुरानों को प्रोत्साहित करेंगे - यही हिंदी की सच्ची सेवा है।

    निवेदन है कि नए लोगों को जोड़ें एवं पुरानों को प्रोत्साहित करें - यही हिंदी की सच्ची सेवा है।

    वर्ष २०१० मे हर माह एक नया हिंदी चिट्ठा किसी नए व्यक्ति से भी शुरू करवाएँ और हिंदी चिट्ठों की संख्या बढ़ाने और विविधता प्रदान करने में योगदान करें।

    आपका साधुवाद!!

    नववर्ष की अनेक शुभकामनाएँ!

    समीर लाल
    उड़न तश्तरी

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  14. जीवन के ऊहापोह वाली मनःस्थिति को आपने बखूबी शब्दों में ढाला है।
    नववर्ष की अग्रिम शुभकामनाओं के साथ।
    पूनम

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  15. जन्मजात संस्कारों की परिस्थितिजन्य पगडंडियों पर चलते हुए कई बार छिल जाती है इस कदर एडियाँ रिस पड़ती है अँगुलियों के बीच मवाद ....कोई अलग राह पगडण्डी की निकल पड़ती है ..आखिर दिली सुकून की आवश्यकता तो हर इंसान को है

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  16. यह विवशता नहीं जरुरत है ... कोई अपने से निर्विकार, सवेदनाहिन् पगडण्डी का निर्माण नहीं करता है. पर जहा दुआ की, प्यार की कदर नहीं वहा यह जरुरी हो जाता है ...
    बातो बातो में गहरी मनोस्थिति को समजाना तुम्ही कर सकती हो माँ ... ILu...!

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  17. मम्मी जी... सुंदर अभिव्यक्ति के साथ बहुत सुंदर रचना....



    आपको नव वर्ष की शुभकामनाएं....

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  18. सही कहा दी जिन्दगी में हमें इन पगडंडियों पर चलना ही पड़ता है ...सुंदर कविता

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  19. सही है, परिस्थितिवश संवेदनहीन पगडण्डी का निर्मित कर लिया जाना भी कभी - कभी श्रेयकर हो जाता है, और तब क्या सही या क्या गलत सोचना अर्थहीन प्रतीत होता है |

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  20. रश्मि,
    संस्कारों से बनी हुई पगडण्डी हमेशा हमें सही दिशा देती है, या यों कहें हमें अपने लक्ष्य तक पहुँचाती है. परिस्थितिजन्य पगडण्डी छोटी और परिवर्तनशील होती है जिस पर चलने की शक्ति भी हमारे संस्कार ही देते हैं. बहुत सुन्दर विषय और एक सार्थक अभिव्यक्ति.
    किरण दी.

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  21. मन के कशमकश और मजबूरियों को बहुत अच्छी तरह बयाँ किया है...हमेशा यह दुविधा मुंह खोले खड़ी रहती है..कि उसी पगडण्डी पर कदम बढाए...या एक नयी बनायें...

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  22. कहीं पढ़ा था-मनुष्य परिस्थितियों का दास है लेकिन जो दिल स्वीकार करे वही पगडंडी सही है

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  23. Rashmeejee tarajoo kee baat chalee hai to ek baat bata dooa .Apaka ek comment mere liye hazaro comments kee keemat rakhata hai.Apanee pagdandee apane aap banane me bhee ek alag sukh hai .

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  24. हिंदी भाषा के प्रचार प्रसार में प्रभावी योगदान के लिए आभार
    आपको और आपके परिजनों मित्रो को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाये...

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  25. नव वर्ष की अशेष कामनाएँ।
    आपके सभी बिगड़े काम बन जाएँ।
    आपके घर में हो इतना रूपया-पैसा,
    रखने की जगह कम पड़े और हमारे घर आएँ।
    --------
    2009 के ब्लागर्स सम्मान हेतु ऑनलाइन नामांकन
    साइंस ब्लॉगर्स असोसिएशन के पुरस्कार घोषित।

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  26. वे पद चिन्ह जो दुआओं कि पगडण्डी पर है !
    इसी का संकल्प लेते हैं हम नये साल में !
    नव वर्ष मंगलमय हो !

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  27. there is a saying in english - when wind blows some people make walls and some windmills..

    dono ki hai apni identity hai..ek survivor hain to ek fighter..

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उसने मुझे गाली दी .... क्यों? उसने मुझे थप्पड़ मारा ... क्यों ? उसने मुझे खाने नहीं दिया ... क्यों ? उसने उसने उसने क्यों क्यों ...