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मेरे एहसास इस मंदिर मे अंकित हैं...जीवन के हर सत्य को मैंने इसमे स्थापित करने की कोशिश की है। जब भी आपके एहसास दम तोड़ने लगे तो मेरे इस मंदिर मे आपके एहसासों को जीवन मिले, यही मेरा अथक प्रयास है...मेरी कामयाबी आपकी आलोचना समालोचना मे ही निहित है...आपके हर सुझाव, मेरा मार्ग दर्शन करेंगे...इसलिए इस मंदिर मे आकर जो भी कहना आप उचित समझें, कहें...ताकि मेरे शब्दों को नए आयाम, नए अर्थ मिल सकें ...

04 May, 2010

दर्द का सत्य


अगर तुम दर्द के रास्तों को नहीं पहचानते
तो ज़िन्दगी तुमसे मिलेगी ही नहीं
दर्द के हाईवे से ही
ज़िन्दगी तक पहुंचा जाता है ..
रास्ते में सत्य का टोल नहीं दिया
तो आगे बढ़ना मुमकिन नहीं
जिन क़दमों को
तुम आगे बढ़ जाना समझते हो
वह तो फिसलन है
कोई सुकून नहीं वहाँ !
सत्य ही ज़िन्दगी देता है
दर्द ही रिश्ते देता है ...
तो बंधु ,
जब आंसुओं से आगे का दृश्य धुंधला हो जाये
तो सुकून की सांसें लो
पल भर की दूरी पर
ज़िन्दगी गुलमर्ग सी खडी मिलेगी
और कुछ रिश्ते
- जो मजबूती से तुम्हारे साथ होंगे !

47 टिप्पणियाँ:

M VERMA ने कहा…

सही है रिश्तो को मजबूती दर्द से मिलती है
पर -----
कुछ रिश्ते दर्द दे जाते हैं
बहुत सुन्दर रचना

arun c roy ने कहा…

आदरणीय रश्मि जी अपनी पुरानी कविताओं की तरह ही इक और उम्दा रचना.. दिग्भ्रमित हो रहे जीवन को मार्ग दिखाती... रौशनी का श्रोत बनकर आयी है आप्नकी नई नज़्म

माणिक ने कहा…

जीवन की राह बड़ी सपाट भी है टेड़ी मेडी भी. बहुत खूब रश्मी जी.
सादर,

माणिक
अपनी माटी
माणिकनामा

महफूज़ अली ने कहा…

सच में मम्मी.... सत्य का रास्ता हमेशा टेढ़ा-मेढा ही होता है.... बहुत अच्छी लगी यह कविता....

Babli ने कहा…

आपने ज़िन्दगी की सच्चाई को बहुत ही सुन्दरता से प्रस्तुत किया है! हर एक पंक्तियाँ लाजवाब है! उम्दा रचना!

sangeeta swarup ने कहा…

वाह...दर्द का हाइवे...सत्य का टोल...बहुत बढ़िया रूपक लिए हैं...बिना दर्द के जिंदगी कहाँ?

फ़िरदौस ख़ान ने कहा…

सुन्दर रचना...

राज भाटिय़ा ने कहा…

आप ने बहुत सही कहा दर्द के रास्तो से गुजर कर ही असली जिन्दगी मिलती है, बहुत सुंदर कविता.
धन्यवाद

Dr. RAMJI GIRI ने कहा…

सत्य का हाईवे हो और दर्द टोल की तरह तो....

Arvind Mishra ने कहा…

जी आनुभूतिक सत्य

Apanatva ने कहा…

aaj aapka blog bada badla badla pyara lag raha hai.
black background hatne se aankho ko bhee sukoon mila hai..
aapkee rachana bade dil ke kareeb lagee........
blog kee kaya palat aapne meree betee ke janm din par kee hai hamesha yaad rahega..........
shubhkamnae............

Sadhana Vaid ने कहा…

बहुत ही अर्थपूर्ण एवं प्रभावशाली अभिव्यक्ति ! मेरा साधुवाद स्वीकार करें ! बधाई एवं आभार !

http://sudhinama.blogspot.com
http://sadhanavaid.blogspot.com

रोहित ने कहा…

bahut sahi baat kahi hai aapne,maa'm!
sach hai,jindagi ke waastavik mukam par dard ko je chukne ke baad hi paya ja sakta hai...
bahut accha laga padhkar!!
aadar-
#ROHIT

Deepak Shukla ने कहा…

Hi..

Jindgi ki sadak pe satya ka toll..

Wah..

Satya ko apne sang liye jo..
Jeevan path par badhe pathik..
Manjil wo khud hai paa leta..
Kathinayi na aaye tanik..

DEEPAK SHUKLA..

परमजीत सिँह बाली ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना है..बहुत भाव पूर्ण...

अल्पना वर्मा ने कहा…

सच कहा, ज़िन्दगी को पाने के लिए दर्द के रास्ते चलते ,सच का उजाला भी ज़रूरी है.
बहुत अच्छी लगी कविता .

nilesh mathur ने कहा…

दर्द का हाइवे और ज़िन्दगी, वाह, अनूठे शब्द!

निर्मला कपिला ने कहा…

बहुत सुन्दर कविता और जीवन का सच भी यही है। बधाई

वाणी गीत ने कहा…

सबसे पहले टेम्पलेट में परिवर्तन की बधाई ...पहले वाले से जुडाव हो गया था ...मगर परिवर्तन ही जीवन है ...
दर्द के हाईवे सत्य का टोल टेक्स देकर ही फिसलन से बचा जा सकता है ...तेज रफ़्तार से बढ़ने वाले इतना कहाँ सोचते हैं ...उन्हें सिर्फ जीत से मतलब होता है ...तभी मजबूती से भरे रिश्ते नसीब नहीं होते उन्हें ...जिन्दगी गुलमर्ग सी कहाँ उनके नसीब में ...
जिंदगी का जश्न तो आप- हम जैसे ही मनाने वाले हैं ...:)

सोच -विचार को मजबूर करती हैं आप ...

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" ने कहा…

यही सत्य है जो आपने लिखा है ... बहुत सुन्दर और असरदार ढंग से लिखी गयी कविता है ...! अच्छा लगा पढकर ...

संजय भास्कर ने कहा…

जीवन की विडंबनाओ को दर्शाती के उत्तम रचना...

संजय भास्कर ने कहा…

जीवन की विडंबनाओ को दर्शाती के उत्तम रचना...

संजय भास्कर ने कहा…

bahut sahi baat kahi hai aapne,maa'm!

Shobhna Choudhary ने कहा…

दर्द के बिना जिंदगी अधूरी है, जब दर्द को महसूस कर लिया हो तभी सही तरीके से जिंदगी ज़ीने का मजा है. बहुत ही उम्दा रचना

सतीश सक्सेना ने कहा…

सुंदर और कोमल भावनाओं की बढ़िया अभिव्यक्ति !

मनोज कुमार ने कहा…

लगन और योग्यता एक साथ मिलें तो निश्चय ही एक अद्वितीय रचना का जन्म होता है।
यह रचना अद्वितीय है।

Dr. Rajendra ने कहा…

ek nirala ji ke bad apki kavitao me shabdo , bhawnao ka madhur samanway evam pravah dekhne ko mila.dhanyabad

Rajiv ने कहा…

जिंदगी की शरुआत ही दर्द से है -दर्द जो कहीं विरह है तो कहीं कष्ट .दर्द की सच्चाई पर कभी कोई प्रश्नचिन्ह नहीं लगता .संवेदना एवं सुझावों से भरी-पूरी रचना. बिम्ब-विधान नाटकीयता से पूर्ण .

Rajiv ने कहा…

जिंदगी की शरुआत ही दर्द से है -दर्द जो कहीं विरह है तो कहीं कष्ट .दर्द की सच्चाई पर कभी कोई प्रश्नचिन्ह नहीं लगता .संवेदना एवं सुझावों से भरी-पूरी रचना. बिम्ब-विधान नाटकीयता से पूर्ण .

वन्दना ने कहा…

सत्य ,रिश्तों और दर्द को परिभाषित करती रचना सोचने को , थोडी देर रुकने को मजबूर करती है।सार्थक लेखन्………उम्दा प्रस्तुति।

rashmi ravija ने कहा…

बहुत ही सुन्दर कविता...रिश्ता, दर्द और सत्य की पहचान बताती हुई

रेखा श्रीवास्तव ने कहा…

दर्द के रिश्ते ही सबसे मजबूत होते हैं, इनकी नीव बहुत गहरी होती है. कितने खूबसूरत तरीके से दर्द के सत्य को उकेरा है. दिल को छूने वाली रचना.

बेचैन आत्मा ने कहा…

रास्ते में जिंदगी को टोल नहीं दिया तो आगे बढ़ना मुश्किल है..
..वाह! अनूठे ढंग से जीवन जीने कि कला बताई है आपने.
..अच्छी कविता के लिए बधाई.

सुनील गज्जाणी ने कहा…

didi pranam,
dard aur satya ko aap ne nayi oopmae prdan ki achcha laga , ek achchi kavita hai . aap ko sadhuwad
didi ,naye roop ke liye bhi aap ko badhai, haali pehli baar dekha to sansay hua ki koi aur to blog nahi khul gaya,
saadr

richa ने कहा…

इन्हीं चंद रिश्तों का हाथ थाम के हम दर्द का हाइवे भी आसानी से पार कर लेते हैं... और पा लेते हैं गुलमर्ग सी ज़िन्दगी...

pallavi trivedi ने कहा…

bahut sundar kavita hai...

Harshad mehta ने कहा…

Kya Zingi koi aur rasto se nahi milti?

Kahete hain use pane ke kahin raaste hai. Agar kisiko koi aur raasta mile to Jarror batayiye.

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

बहुत सुंदर।
और हाँ, आपके ब्लॉग का नया रूप भी बहुत सुंदर है।

ρяєєтι ने कहा…

kya kahe ab ?.... jindgi ka satya ek baar phir aapne samjha diya...ILu...!

Rajesh Shandilya ने कहा…

सच है रश्मिजी, लोग अपने सामने एक दर्द की दीवार खड़ी कर लेते हैं और उसके पीछे तनहा-तनहा घुटते रहते हैं ! अच्छा हैं दीवार फांद कर राह पर आ जाये, पंछी पहाड़ नदी सी खुशियाँ हमसफ़र तो होंगी ही सत्य की नाकेबंदी सहनशील और दुनियादार बनाएगी सो अलग ! मेरी आपको हार्दिक धन्यवाद देने की आदत पड़ जावे , यही शुभेच्छा है !

अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी ने कहा…

रचना और दर्द का बड़ा गहरा रिश्ता है , जीवन में भी दर्द की
सकारात्मक भूमिका को अनदेखा नहीं किया जा सकता ! कुंती
का स्मरण होता है जिन्होंने कृष्ण से वरदान - स्वरुप 'दुःख' माँगा
था ! शायद पन्त जी की पंक्तियाँ हैं ---
'' मधुमय गीत वही होते ,
जो दुखमय भाव प्रकट करते हैं ! ''
दुखमय भावों से उपजने वाले मधुमय गीत ! संघर्ष में तपकर
कुंदन बना जीवन !
------------- सुन्दर रचना .. आभार !

संत शर्मा ने कहा…

Subdar Bhawpurn Kavita.

jenny shabnam ने कहा…

rashmi ji,
jiwan ko sahajta se jine ka isase achha aur koi upaay bhi nahi, achhi rachna, badhai sweekaren.

दिगम्बर नासवा ने कहा…

सच है जिसने दर्द को नही जाना .. उसने ज़िंदगी को नही पहचाना .... लाजवाब ...

मनोज कुमार ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति।
इसे 08.05.10 की चिट्ठा चर्चा (सुबह 06 बजे) में शामिल किया गया है।
http://chitthacharcha.blogspot.com/

ओम आर्य ने कहा…

मिलेगी जो छाँव कहीं तो बस धुप में मिलेगी...
Gulzar saab says.

Dr.amit keshri ने कहा…

mausi, aapki rachnaayen hamesha he anuthi or koi na koi uddesya or siksha liye hoti hain, bahadd satik shabdon me bahut he khubsurat rachna!







amit~~