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मेरे एहसास इस मंदिर मे अंकित हैं...जीवन के हर सत्य को मैंने इसमे स्थापित करने की कोशिश की है। जब भी आपके एहसास दम तोड़ने लगे तो मेरे इस मंदिर मे आपके एहसासों को जीवन मिले, यही मेरा अथक प्रयास है...मेरी कामयाबी आपकी आलोचना समालोचना मे ही निहित है...आपके हर सुझाव, मेरा मार्ग दर्शन करेंगे...इसलिए इस मंदिर मे आकर जो भी कहना आप उचित समझें, कहें...ताकि मेरे शब्दों को नए आयाम, नए अर्थ मिल सकें ...

12 May, 2010

उसके लिए ...


मिट्टी के चूल्हे पर
शर्मीली आँखों का तवा रख
ख़्वाबों की रोटियाँ सेंक ली है
लरज़ते ख्यालों की सब्जी में
प्यार का तड़का लगाया है
उसके आने की खुशबू
हवाओं में फैली है
इंतज़ार की अवधि को
जायकेदार नमक के साथ
कुरमुरा बनाया है
मनुहार की चाशनी
उसे रोक ही लेगी ...

56 टिप्पणियाँ:

vandana ने कहा…

bahut badiya..!:)

shikha varshney ने कहा…

oye hoye ...gazab di gazab ...kya dish banai hai.

Sonal Rastogi ने कहा…

प्रिय के आगमन में विकल ह्रदय का सुन्दर चित्रण ..अगर आप चित्र ना भी लगाती तब भी आपके शब्दों ने रेखाचित्र बना दिया था

sangeeta swarup ने कहा…

ये तडका और चाशनी बहुत बढ़िया लगी....बहुत खूबसूरत शब्द दिए हैं....

दिगम्बर नासवा ने कहा…

Gazab ki abhivyakti ... har shabd jaise chaasni mein dooba .. angeethi ki khusbhoo deta huva ...Rasoi ki makah pyaar ki makah ke saath mil kar sachmein kaaynaat mein fail jaayegi ... bahut hi lajawaab ...

दिलीप ने कहा…

waah bade kareene sesajaya bhavon ko...

M VERMA ने कहा…

चाशनी और प्यार का तड़का हो तो --
बहुत सुन्दर

अनिल कान्त : ने कहा…

Wow !

अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी ने कहा…

पाकशाला से सम्बद्ध बिम्ब में कविता का रचाव
सुन्दर है | शब्दों से बना हुआ चित्र आपके द्वारा
लगाये हुए चित्र से कम खूबसूरत नहीं है | आभार !

Deepak Shukla ने कहा…

Hi..

Etne prem ko jo paa lega..
Kahan wo jaa payega..
Priyatam ke dar par hi apni..
Parn kuty wo chhayega..

Nahi wo ja payega..

Hamesha ki tarah bhavpurn kavita..

DEEPAK..

चैन सिंह शेखावत ने कहा…

बेहद खूबसूरत कविता है रश्मि जी,
श्रृंगार रस का एक नवीन रूपक .
ढेरों बधाइयाँ और शुभकामनाएँ

ओम पुरोहित'कागद' ने कहा…

क्या उनको रसोई मेँ बुलाया है और पकवान बनाया है! इजहारे इश्क रसोईमय हो गया ! गृहिणी इस से बढ़िया क्या चित्र उकेर सकती थी?काम का काम हो गया और अपने 'उनको' याद भी कर लिया।मैँ तो इस कविता मेँ उलझ ही गया।वाकई शानदार कविता!बेहतरीन मनौभाव!बधाई

संजय भास्कर ने कहा…

बेहद खूबसूरत कविता है

Asha Pandey Ojha ने कहा…

behad kubsurat ..me to manuhaar kee chasnee me dub gai hun ...!

Mithilesh dubey ने कहा…

बहुत ही उम्दा ।

jenny shabnam ने कहा…

rashmi ji,
ummid par dunia kaayam hai, shayad manuhaar ki chaashni rok le...sundar rachna, badhai.

Shekhar Suman ने कहा…

waah...
bahut khub chitran...
premi ka swagat.....

सुमन'मीत' ने कहा…

बहुत सुन्दर
भावनाओं की अभिव्यक्ति

Jyotsna Pandey ने कहा…

ख्यालों के साथ प्यार का तडका, नमकीन इंतज़ार के साथ कुरामुराहट..... ज़रूर रोक लेगी मनुहार की चाशनी...

प्रणाम के साथ शुभकामनाएं......

दीपक 'मशाल' ने कहा…

ऐसा कुछ होगा तो कौन न रुकेगा भला???? :) प्रतीकों ने मन मोह लिया.

nilesh mathur ने कहा…

वाह! क्या बात है, बहुत सुन्दर!

sakhi with feelings ने कहा…

चित्र और कविता दोनों पूरक है एक दूसरे के

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत ही सुंदर कविता,खाना बायकिया बहुत स्वाद होगा
आप का धन्यवाद

Babli ने कहा…

बहुत बहुत ख़ूबसूरत ! हम तो निशब्द हो गए ! जितनी सुंदरा तस्वीर उतनी ही सुन्दर रचना !

मनोज कुमार ने कहा…

मनुहार की चाशनी ...
इसकी मिठास से सराबोर कर दिया आपकी लेखनी ने। अमोल रचना!
अद्भुत!
उत्तम!!

Udan Tashtari ने कहा…

वाह! बहुत सुन्दर!



एक विनम्र अपील:

कृपया किसी के प्रति कोई गलत धारणा न बनायें.

शायद लेखक की कुछ मजबूरियाँ होंगी, उन्हें क्षमा करते हुए अपने आसपास इस वजह से उठ रहे विवादों को नजर अंदाज कर निस्वार्थ हिन्दी की सेवा करते रहें, यही समय की मांग है.

हिन्दी के प्रचार एवं प्रसार में आपका योगदान अनुकरणीय है, साधुवाद एवं अनेक शुभकामनाएँ.

-समीर लाल ’समीर’

boletobindas ने कहा…

पंत जी की आत्मा को खुशी मिलती होगी आपके शब्दों के चित्रण को पढ़ कर।


सही में ऐसी रोटी नहीं खाई हमने..लगता है अभागे हैं....

देवेश प्रताप ने कहा…

लाजवाब प्रस्तुती ......

'उदय' ने कहा…

...बेहद स्वादिष्ट!!!

Pankaj Trivedi ने कहा…

रसोईघर से भी ईतनी परिपक्व कविता पाक सकती है, यह तो कोई आपसे ही जाने | मैं भला क्या शाबाशी देने के काबिल ! मगर मीठास बहुत है शब्दों के व्यंजन में...

बेचैन आत्मा ने कहा…

एक बात नहीं समझ में आ रही है कि कविता लिख कर चित्र ढूँढा या चित्र देख कर कविता लिखी..?
...कविता इतनी अच्छी है कि पढ़कर भूख लग गयी.

Dr. Rajendra ने कहा…

wah awasya rukega eisa mera bhi biswas hai

kunwarji's ने कहा…

वाह!

भावनाओ को परोसना(प्रस्तुत करना) तो कोई यहाँ से सीखे...

कुंवर जी,

arun c roy ने कहा…

'"मनुहार की चाशनी उसे रोक ही लेगी"... बहुत सुंदर विम्ब रचना... अदभुद !

Akanksha~आकांक्षा ने कहा…

खूबसूरत भावाभिव्यक्तियाँ....बधाई !!

वन्दना ने कहा…

ये शायद पहले भी पढी है।
बेहद शानदार भाव भरे हैं…………गज़ब्।

Avinash Chandra ने कहा…

Waah, waah....bahut jyada pasand aayi ye raasoi...kaun nahi rukega :)

सुनील गज्जाणी ने कहा…

दीदी प्रणाम
नए रूप में एक विरहनी की मनो व्यथा को दर्शाया है ,नए र्रोप नए बिम्ब के लिए आप का आभार ,
साधुवाद

Rajiv ने कहा…

चुल्हे-चौके जैसे सामान्य एवं आम क्रिया-कलापो को आधार बनाकर प्यार की जो छवी और समर्पण का जो भाव आपने अभिव्यक्त किया है ,बहुत ही मखमली और मोहक बन पडा है .

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari ने कहा…

स्‍नेह का स्‍वाद ऐसा ही होता है.

धन्‍यवाद.

Parul ने कहा…

shbd kam pad rahe hai! :)

अल्पना वर्मा ने कहा…

लरजते ख्यालों में ..प्यार का तडका..!
वाह!बड़े सुन्दर और अनूठे बिम्ब हैं!

कविता तो बहुत अच्छी है ही साथ दिया चित्र भी क्या खूब चुना है.वाह!

वाणी गीत ने कहा…

ख्वाबों की रोटियां ,
प्यार का तड़का ,
चाशनी की मनुहार ....

कोई क्यों ना, कैसे ना रुकेगा भला ...

बड़ी प्यारी सौंधी नमकीन मीठी सी कविता ...!!

रचना दीक्षित ने कहा…

आपकी ये रेसिपी अच्छी रही, पहले बना के देखूं फिर स्वाद का पता चले

नीरज गोस्वामी ने कहा…

ऐसी रचना की प्रशंशा शब्दों में की ही नहीं जा सकती...शब्द बने ही नहीं हैं जो दिल के भाव प्रगट कर सकें...बार बार पढ़ रहा हूँ और आप की लेखनी को नमन कर रहा हूँ...बस...
नीरज

Ashish (Ashu) ने कहा…

maa maa is baar aapka new look to wow so sweet..maa sachi templete bahut bahut hi acha hai....maa kavita ko read kerke feel kerne ke baad sach me ma Ashu ko ashu aa gaye..ma...sachi bahut bahut hi achi kavita hai..

pallavi trivedi ने कहा…

बहुत सुन्दर....

रोहित ने कहा…

PREM KI SUNDAR AVIVAYKTI,MAA'M!!!!!!!
BAHUT ACCHA LAGA PADHKAR.
REGARDS-
#ROHIT

arvind ने कहा…

मिट्टी के चूल्हे पर
शर्मीली आँखों का तवा रख
ख़्वाबों की रोटियाँ सेंक ली है
लरज़ते ख्यालों की सब्जी में
प्यार का तड़का लगाया है.........बहुत सुन्दर....

rashmi ravija ने कहा…

मिट्टी के चूल्हे पर
शर्मीली आँखों का तवा रख
ख़्वाबों की रोटियाँ सेंक ली है
kya baat kah di...bilkul hi alag si abhiyakti

Priya ने कहा…

shubh no 51 is mine....recipe tasty hain....to kab aaon khane par:-)

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' ने कहा…

उसके आने की खुशबू
हवाओं में फैली है
इंतज़ार की अवधि को
जायकेदार नमक के साथ
कुरमुरा बनाया है
मनुहार की चाशनी
उसे रोक ही लेगी ...
रश्मि जी....तस्वीर जैसी ही सुन्दर रचना.
दिल को छू गई.

Jitendra Bagria ने कहा…

बहुत खूब !!

Deepali Sangwan ने कहा…

kya baat hai.. bahut khoobsurat

niv ने कहा…

wah!!!!!!!!!!! kya bat hai ...... sakhi ri piya milan ko aaye ... .... barbas y gana yaad aa gya ...... abke sal poonam mai jab tu aayega milne ...... ham nigah se teri aarti utarenge .. .....

Reetika ने कहा…

ishq ka tadka !