28 जुलाई, 2010

हम कुछ भी कर सकते हैं


अचानक हम बहुत अकेले हो गए हैं
सच है कि इस अकेलेपन में
हमारी ही जीत है
सफलता है
भविष्य है
हमारी शुरुआत है ...
पर !
अकेले चले नहीं
तो घड़ी की सूई थम गई है
सोच की दिलचस्प उड़ान
रुक गई है
खिलखिलाते झरने का पानी
सूख चला है
तब हम क्या करें !
चलो खूब बातें करते हैं
इतनी कि हमारे शहर चलने लगें
और करीब हो जाएँ
भरोसा है न खुद पर ?
"हम कुछ भी कर सकते हैं ..."

40 टिप्‍पणियां:

  1. चलो खूब बातें करते हैं
    इतनी कि हमारे शहर चलने लगें
    और करीब हो जाएँ
    भरोसा है न खुद पर ?
    "हम कुछ भी कर सकते हैं ..."
    bahut preranadayee rachana hai.Akelepan ko bhagane ka isse achcha nuskha kya ho sakata hai,Rashmijee.behad arthpurn prastuti.

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  2. चलो खूब बातें करते हैं
    इतनी कि हमारे शहर चलने लगें
    और करीब हो जाएँ
    भरोसा है न खुद पर ?
    "हम कुछ भी कर सकते हैं ..."

    वाह्………………बेहद खूबसूरत भाव भरे हैं……………बस इतना भरोसा होना चाहिये।

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  3. इसे पढकर ऐसा लगता है कि आप विस्‍तृत जीवानुभाव की रचनाकार हैं ।

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  4. han ham kuchh bhi kar sakate hain bas sankalp ki jarroot hai. thamne na do isa silsile ko nahin to ye vakt ki chaal bhi ruk jaayegi.

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  5. अकेले चले नहीं
    तो घड़ी की सूई थम गई है
    सोच की दिलचस्प उड़ान
    रुक गई है .........


    sach me di
    kahan se ye soch laate ho aap!!

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  6. चलो खूब बातें करते हैं
    इतनी कि हमारे शहर चलने लगें
    और करीब हो जाएँ

    wakai....
    ye vishwas hi ekmatr samadhan h..pyari se kavita...

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  7. प्रेरणादायक कविता.. चित्र मजेदार लगा..

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  8. यकीनन
    जब बातें चलती हैं तो
    शहर चलते हैं
    चांद चलता है तारे चलते हैं
    फसाने चलते हैं,अफसाने चलते हैं
    बाते चलती हैं तो अपने चलते हैं
    बेगाने चलते हैं
    बातें चलें तो क्‍या नहीं चल सकता
    इसलिए शायद कहते हैं
    बात निकलेगी तो दूर तक जाएगी।

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  9. चलो खूब बातें करते हैं
    इतनी कि हमारे शहर चलने लगें
    और करीब हो जाएँ
    भरोसा है न खुद पर ?
    "हम कुछ भी कर सकते हैं ..."
    ...sundar chitran ke saath man ko tarangit karti rachna bhaa gayee.

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  10. भरोसा है न खुद पर ?
    "हम कुछ भी कर सकते हैं ..."
    जी हाँ भरोसा हो तो कुछ भी कर सकते हैं

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  11. इतनी कि हमारे शहर चलने लगें
    और करीब हो जाएँ
    भरोसा है न खुद पर ?
    "हम कुछ भी कर सकते हैं ...

    कर तो कुछ भी सकते हैं पर करते ही तो नहीं....शहर में पडोसी भी एक दूसरे को नहीं पहचानते...लेकिन आपकी रचना प्रेरणा दे रही है किज़िंदगी को भरपूर जीना है तो आपस में मिलना जुलना करते रहना चाहिए ...अच्छी अभिव्यक्ति

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  12. सुन्दर भाव हैं...बातें करके ही तो करीब आ सकते हैं...

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  13. भरोसा है न खुद पर ?
    "हम कुछ भी कर सकते हैं
    बहुत सुन्दर प्रेरक पाक्तियाँ हैं। भरोसा ही तो सफलता की कूँजी है। बधाई

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  14. चलो खूब बातें करते हैं
    इतनी कि हमारे शहर चलने लगें
    और करीब हो जाएँ
    भरोसा है न खुद पर ?
    "हम कुछ भी कर सकते हैं ..

    कितनी सकारात्मकता कितनी प्रेरणा. ये सच है की यदि कुछ करने की कोशिश की जाय तो वो किया जा सकता है ...अच्छी अभिव्यक्ति

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  15. अच्छी रचना ,,,चित्र लाजवाब, मजेदार ..../ पिछले कुछ दिनों ब्लॉग जगत से दूर रहा ,,,,समय निकालकर पिछली रचनाये भी पढता हूँ ...!!!

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  16. रश्मि जी आपकी रचनाएं हमेशा ही पोजिटिव सोच वाली होती हैं ......कुछ सन्देश देती हुई.............
    अति सुन्दर............

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  17. akele hain to kya gham hai...
    chahe to hamare bas me kya nahi..
    bas ik zara saath ho mka ka...
    ek dusre ke hain hum...kab se mamma.. ilu :)

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  18. मम्मी जी...बहुत खूबसूरत भाव हैं... यह रचना....मन को छू गयी।

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  19. "हम कुछ भी कर सकते हैं ..."

    sach..:)

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  20. स्वयं से जूझ कर आगे निकल पाना केवल अकेलेपन में हो पाता है।

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  21. कई बार अकेलापन खुद को स्पेस देता है ...
    इतनी बातें करें कि शहर करीब हो जाएँ ...
    नया , अनोखा, अनूठा बिम्ब
    विश्वास है ना कि हम कुछ भी कर सकते हैं ...
    है तो ...!

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  22. बहूत सशक्‍त रचना, बधाई।

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  23. भरोसा है न खुद पर ?
    "हम कुछ भी कर सकते हैं ....is bharose ko hi kayam rakhna hai......

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  24. kya kya hai aapki potli mein....Kitne anubhav
    roz thoda thoda baati hai....

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  25. sahi kaha aapne...
    hum kuch bhi kar sakte hain........
    bahut dino se wyast tha blog par samay nahi de paaya...
    maafi chahunga....

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  26. akelepan aur milan ke apne apne sach kee bahut sunder kavita... naya sandarbh naye bimb... adbhud !

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  27. भरोसा है न खुद पर ?
    "हम कुछ भी कर सकते हैं ..."
    जी हाँ भरोसा हो तो कुछ भी कर सकते हैं

    shaandar prastuti DI

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  28. भरोसा है न खुद पर ?
    "हम कुछ भी कर सकते हैं ..."
    जी हाँ भरोसा हो तो कुछ भी कर सकते हैं

    shaandar prastuti DI

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  29. Tu Jo saath hai hamare,
    har manzil aasan hai...
    Tu jo rakh de sir per haath,
    yeh aasmaa hamara hai...
    Bharosha hai khud per khud se jyaada,
    bharosa hai tumko, mujh per mujh se jyaada...ILU...!

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  30. बहुत सुन्दर प्रेरक पाक्तियाँ हैं। भरोसा ही तो सफलता की कूँजी है। बधाई

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  31. न हो साथ कोई अकेले चलो तुम ... सफलता तुम्हारे कदम चूम लेगी ...

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  32. भरोसा है न खुद पर ?
    "हम कुछ भी कर सकते हैं ..."
    जी हाँ भरोसा हो तो कुछ भी कर सकते हैं

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