20 अप्रैल, 2011

आशीर्वचनों का महाग्रंथ



माँ ...
हवा , बादल , धूप , छाँव
बच्चों के लिए पूरी प्रकृति
अपने आँचल में समेट
एक धरोहर बन जाती है ...
जब सारी दिशाएं प्रतिकूल होती हैं
माँ लहरों के विपरीत
संभावनाओं के द्वार खोलती है
... माँ शब्द में ही
एक अदृश्य शक्ति होती है
माँ कहते ही
हर विपदा शांत हो जाती है
माँ लोरियों का सिंचन करती है
एक आँचल में
करोड़ों सौगात लिए चलती है
आशीर्वचनों का महाग्रंथ होती है

41 टिप्‍पणियां:

  1. आदरणीय रश्मि प्रभा माँ
    नमस्कार !
    माँ शब्द में ही
    एक अदृश्य शक्ति होती है
    माँ कहते हीमाँ से बढ़कर कोई नहीं इस दुनिया में
    बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत सुन्दर रचना! आपकी लेखनी की जितनी भी तारीफ़ की जाए कम है!

    उत्तर देंहटाएं
  2. एक आँचल में
    करोड़ों सौगात लिए चलती है
    आशीर्वचनों का महाग्रंथ होती है

    मान के हृदय को उड़ेल दिया है इस कविता में

    उत्तर देंहटाएं
  3. यह एक चिरंतन सत्य है.
    मां
    "एक आँचल में
    करोड़ों सौगात लिए चलती है
    आशीर्वचनों का महाग्रंथ होती है"
    तभी तो सारा विश्व इस सत्ता के समक्ष नत मस्तक रहता है.

    उत्तर देंहटाएं
  4. आशीर्वचनों का महाग्रंथ होती है......
    itni sundar paribhasha maa ki......wah kya kahne.....bemisaal kavita hai.

    उत्तर देंहटाएं
  5. माँ लोरियों का सिंचन करती है
    एक आँचल में
    करोड़ों सौगात लिए चलती है
    आशीर्वचनों का महाग्रंथ होती है

    एकदम सही कहा आपने.

    उत्तर देंहटाएं
  6. मां से बढ़कर कोई नहीं... मां तो बस मां है...
    भगवान् का चेहरा किसने देखा ...वह तो माँ के रूप में साक्षात् हमारे पास होती है बस उस दिव्य स्वरुप को जो समझ गया, उसे फिर किया चाहिए ......
    माँ को सचे मनोभावों से सम्पर्पित रचना पढ़कर बहुत अच्छा लगा...
    हार्दिक शुभकामनाएं

    उत्तर देंहटाएं
  7. Maa kya kya ho sakti hai aur hoti hai, Sabhi kuch to baya kar diya ... ILu Maa...!

    उत्तर देंहटाएं
  8. माँ .............

    'आशीर्वचनों का महाग्रंथ होती है '

    भावपूर्ण प्रस्तुति .......माँ जैसा कोई नहीं |

    उत्तर देंहटाएं
  9. माँ ...
    हवा , बादल , धूप , छाँव
    बच्चों के लिए पूरी प्रकृति
    अपने आँचल में समेट
    एक धरोहर बन जाती है ..
    और ..
    .

    मां कैसे तुम्‍हें,
    एक शब्‍द मान लूं
    दुनिया हो मेरी
    पूरी तुम... बस यही शब्‍द निकलते हैं ... ।

    उत्तर देंहटाएं
  10. सच है .. माँ आकाश होती है जिसके तले सब सुकून से रहते हैं...

    उत्तर देंहटाएं
  11. माँ, बियावान जंगल या रेगीस्तान में मीठे पानी का स्रोत होती है। आशिर्वाद का अनवरत झरना होती है माँ!!
    बचपन में बुरा सा सपना देख जब घबरा उठते थे, माँ की आवाज मात्र भय का निवारण कर देती थी।

    आज का आत्मविश्वास, उर्ज़ा, शक्ति समझ और ज्ञान सब तुझसे ही है, माँ

    उत्तर देंहटाएं
  12. bahut achchhi kavitaa
    mantro se vaaky man ko shaant karti huii si
    badhaaii

    उत्तर देंहटाएं
  13. माँ ईश्वर की सर्वप्रथम अभिव्यक्ति है.
    इसीलिए कहा जाता है "त्वमेव माता ....."
    अति सुन्दर भावपूर्ण अभिव्यक्ति के लिए बहुत बहुत आभार.

    उत्तर देंहटाएं
  14. माँ ऐसी ही होती है..
    बेहद भावपूर्ण रचना.

    उत्तर देंहटाएं
  15. माँ लोरियों का सिंचन करती है
    एक आँचल में
    करोड़ों सौगात लिए चलती है
    आशीर्वचनों का महाग्रंथ होती है

    और ये पंक्तियाँ एक माँ ही लिख सकती है
    मुझे अपना एक शेर याद आ गया
    "कड़ी धूप की सख्तियाँ झेल कर
    वो ममता थी ,मिस्ले शजर हो गई "

    उत्तर देंहटाएं
  16. एक आँचल में
    करोड़ों सौगात लिए चलती है
    आशीर्वचनों का महाग्रंथ होती है
    --
    बहुत सुन्दर!
    माँ शब्द के स्मरण से ही ममत्व की गन्ध आने लगती है!

    उत्तर देंहटाएं
  17. माँ लोरियों का सिंचन करती है
    एक आँचल में
    करोड़ों सौगात लिए चलती है
    आशीर्वचनों का महाग्रंथ होती है

    और ये पंक्तियाँ एक माँ ही लिख सकती है
    मुझे अपना एक शेर याद आ गया
    "कड़ी धूप की सख्तियाँ झेल कर
    वो ममता थी ,मिस्ले शजर हो गई "

    उत्तर देंहटाएं
  18. दीदी एक एक शब्द ...सच, सार्थक और भाव भरा है ...बिलकुल वैसा ही जैसी की आप हो ! मेरी रश्मि दी ........
    एक आँचल में
    करोड़ों सौगात लिए चलती है
    आशीर्वचनों का महाग्रंथ होती है !!

    उत्तर देंहटाएं
  19. bhav vibhor aur chir saty se ot prot aapkee rachana bahut pyaree hai.........

    उत्तर देंहटाएं
  20. माँ के आशीर्वाद से बढ़कर कुछ भी नहीं.. बढ़िया कविता..

    उत्तर देंहटाएं
  21. कैसी है आरजू ये, मेरी
    कैसी है प्यासे मन की तमन्ना ,

    आज फिर से आँचल में उसकी
    छिप जाने का मन करता है
    माँ के आँचल के लिए आज
    फिर मन ललचा है....(अंजु ..(अनु)

    उत्तर देंहटाएं
  22. माँ शब्द में ही
    एक अदृश्य शक्ति होती है
    माँ कहते ही
    हर विपदा शांत हो जाती है...

    एक एक शब्द किताब का अर्थ देता हुआ...
    एक शेर हाज़िर है-
    मुश्किल हज़ार आईं मगर दूर हो गईं
    मां की दुआ ने की है हर इक बद्दुआ अलग
    (शाहिद मिर्ज़ा शाहिद)

    उत्तर देंहटाएं
  23. नहीं है मंत्र दुनिया में
    'माँ' शब्द जैसा कोई
    आर्तमन से 'माँ' कहते ही
    जगत जननी सुन लेती है
    बरसाती है करूणा कृपा
    दुःख-दर्द हर लेती है |

    उत्तर देंहटाएं
  24. माँ आशीर्वचनों का महाग्रंथ होती हैं ..
    माँ को नमन !

    उत्तर देंहटाएं
  25. और जब संघर्षों के दौर में माँ का साथ रहा, उनका आशीर्वाद मिलता रहा, तो संघर्ष भी तकलीफदेह नहीं लगती...

    हाँ, सही में माँ में एक अदृश्य शक्ति होती है.

    उत्तर देंहटाएं
  26. बस माँ का आशिर्वाद हमेशा बना रहे यही दुआ रहती है…………सुन्दर अभिव्यक्ति।

    उत्तर देंहटाएं
  27. रश्मिप्रभा जी.............बिलकुल दुरुस्त फरमाया है ,आपने .'आशीर्वचनों का महाग्रंथ होती है 'माँ.माँ मात्र एक शब्द नहीं है .....वरन एक समूचा दर्शन है ,हमारी पूर्ण पहचान है........
    मुनव्वर राना साब का एक शेर याद आ रहा है ...
    बाप का रूतबा भी कुछ कम नहीं होता लेकिन
    जितनी माएं हैं फ़रिश्तों की तरह होती हैं

    उत्तर देंहटाएं
  28. एक आँचल में
    करोड़ों सौगात लिए चलती है
    आशीर्वचनों का महाग्रंथ होती है

    बहुत सुंदर ....

    उत्तर देंहटाएं
  29. आशीर्वचनों का महाग्रंथ होती है............कितनी सच्ची बात है !रश्मि प्रभा जी....दिल को छू लेने वाली रचना .मुनव्वर राणा का एक शेर याद आ रहा है.....
    बाप का रूतबा भी कुछ कम नहीं होता लेकिन
    जितनी माएं हैं फरिश्तों कि तरह होती हैं ........

    उत्तर देंहटाएं
  30. bakaul munnavar rana "lab pe jisake kabhi baddua nahin hoti hai, maan jab gusse mein hoti hai to ro deti hai..." maan to bas aashirvaad hi de sakati hai...

    उत्तर देंहटाएं
  31. माँ शब्द ही सम्पूर्ण स्रष्टि है

    उत्तर देंहटाएं
  32. मां तो मां है। "पुत्र कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि माता कुमाता न भवति" कौन नकार सकता है इस बात को……युग प्रभाव से प्रभावित कुछ घटनाओं को छो…॥ सार्थक अभिव्यक्ति।

    उत्तर देंहटाएं

प्रभु

देनेवाले, तेरा दिया तुझे ही देकर सब बहुत खुश हैं ! सोने से तुम्हें सजाकर डालते हैं एक उड़ती दृष्टि अपने इर्दगिर्द और मैं तोते की...