12 सितंबर, 2011

नई कोपलों के निशां फिर कल को दुहराएंगे



कल सारी रात
दर्द से निर्विकार ...
(जाने किसका दर्द था) ! जागती रही
दर्द था या बेचैनी - पता नहीं ...
... जो भी हो -
उस दर्द को चकमा देकर
मैंने कुछ खरीदारी की !
.....
सपनों के बंजर खेत ख़रीदे ...
(बंजर थे तो कीमत कम लगी )
सौदा मेरे पास संचित रकम के अनुसार हुआ !
प्यार के ऐतिहासिक बीज भी
सस्ती कीमत में मिले ...
सुबह की किरणों के स्टॉल पर
सूरज ने मुझे ख़ास खाद दिया
बादलों ने अपनी दुकान में
पर्याप्त जल देने का एग्रीमेंट साईन किया
चिड़ियों ने भी अपने काउंटर से चहचहाकर कहा
' हम तो आयेंगे ही ....
हमारी लुप्त प्रजातियाँ भी आएँगी ...'
....
स्वेद कणों से भरा चेहरा लिए
मैंने सपनों की बंजर ज़मीन को
मुलायम करना शुरू किया .....
तो मेरे साथ चलते अनजाने हमसफ़र ने कहा
'और मैं तो हूँ ही '
सुनते ही
विश्वास से भरी हवाएँ चलने लगीं
अपनी जीत का यकीन लिए मैंने -
एडवर्ड - सिम्सन
अमृता- इमरोज़
हीर- राँझा
सोहणी - महिवाल जैसे
उत्कृष्ट बीज लगाए ...
कौन कहता है , निशां खो जाते हैं
....
नई कोपलों के निशां फिर कल को दुहराएंगे

51 टिप्‍पणियां:

  1. अदभुत और अनुपम प्रस्तुति है आपकी.
    आभार.

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  2. कौन कहता है , निशां खो जाते हैं
    ....
    नई कोपलों के निशां फिर कल को दुहराएंगे

    यकीनन ... ।

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  3. स्वेद कणों से भरा चेहरा लिए
    मैंने सपनों की बंजर ज़मीन को
    मुलायम करना शुरू किया .....
    तो मेरे साथ चलते अनजाने हमसफ़र ने कहा
    'और मैं तो हूँ ही '
    क्या लिखा है आपने माँ .... बहुत ही असुंदर.....दिल को छू गया...

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  4. अपनी जीत का यकीन लिए मैंने -
    एडवर्ड - सिम्सन
    अमृता- इमरोज़
    हीर- राँझा
    सोहणी - महिवाल जैसे
    उत्कृष्ट बीज लगाए ...
    कौन कहता है , निशां खो जाते हैं
    ....
    नई कोपलों के निशां फिर कल को दुहराएंगे
    ........बहुत अलग ढंग से व्याख्या की है अच्छी लगी

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  5. यकीनन नई कोपलों के निशां कल को दौहराते आए है और आगे भी यही होगा... क्यूंकि प्यार करने वाले भले ही ना रहें मगर प्यार खुद कभी मिटता नहीं.... बेहद सुंदर विचार लिए आपकी यह रचना मन को भाई और दिल को छु गई...

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  6. कौन कहता है , निशां खो जाते हैं
    ....
    नई कोपलों के निशां फिर कल को दुहराएंगे

    सकारात्मकता लिए हुए .....जीवन लिए हुए ...सुंदर रचना .....

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  7. किसी का साथ मिलने पर सफ़र बहुत आसान हो जाता है
    बहुत सुन्दर प्रस्तुति

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  8. कौन कहता है , निशां खो जाते हैं
    नई कोपलों के निशां फिर कल को दुहराएंगे ..
    बहुत सुन्दर ...कोमल.शब्दों का मन के गहन भावो से अद्भुत मेल.....आभार

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  9. कौन कहता है , निशां खो जाते हैं
    ....
    नई कोपलों के निशां फिर कल को दुहराएंगे

    ....अद्भूत प्रस्तुति..

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  10. कौन कहता है , निशां खो जाते हैं

    निशां कभी खोते भी नहीं क्योंकि ये वो एहसास होते हैं जिन्हें हम भूलना नहीं चाहते और उनमे हमेशा खोए रहना चाहते हैं।

    सादर

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  11. दर्द के बावजूद उत्साह और आशा का संचार करती रचना....
    ....कौन कहता है , निशां खो जाते हैं ....
    सचमुच.... सुन्दर....
    सादर....

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  12. विश्वास से भरी हवाएँ चलने लगीं
    अपनी जीत का यकीन लिए मैंने -
    एडवर्ड - सिम्सन
    अमृता- इमरोज़
    हीर- राँझा
    सोहणी - महिवाल जैसे
    उत्कृष्ट बीज लगाए ...
    कौन कहता है , निशां खो जाते हैं
    ....
    नई कोपलों के निशां फिर कल को दुहराएंगे


    गहन अनुभूतियों की सुन्दर अभिव्यक्ति ... हार्दिक बधाई

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  13. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

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  14. bahut sundar rachna, anokhe bimb. nai koplon ke nishaan nihsandeh dohraayenge. shubhkaamnaayen.

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  15. यानी संचित रकम से भी इतना कुछ पाया जा सकता है...
    बस खरीदने की समझ होनी चाहिए.

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  16. सुन्दर बिम्ब प्रयोग....

    आशा का संचरण करती, सुन्दर भावाभिव्यक्ति....

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  17. दिल से, अच्छे सपने बोने पर सबका साथ मिलता है, फूटती है नई कोपलें और इतिहास लौट आता है ...

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  18. कौन कहता है , निशां खो जाते हैं

    नई कोपलों के निशां फिर कल को दुहराएंगे सादर....

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  19. नई कोपलों के निशां फिर कल को दुहराएंगे ...sach kaha aapne

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  20. बंजर लाख थी जमीन सपनों की, किसी खास अपने के साथ होने के विश्वास की मेड पर नन्ही कोपलों को खिलना ही था ...

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  21. नई कोपलों के निशां फिर कल को दुहराएंगे.. bilkl sahi kaha aapne....

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  22. मुझे लगता है प्यार के बीज जिस कीमत में भी मिलें..सस्ते ही होंगे

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  23. अपनों के साथ के विश्वास से बंजर धरती भी लहलहा जाती है ... नए प्रतीक लिए खूबसूरत रचना

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  24. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति आज के तेताला का आकर्षण बनी है
    तेताला पर अपनी पोस्ट देखियेगा और अपने विचारों से
    अवगत कराइयेगा ।

    http://tetalaa.blogspot.com/

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  25. कौन कहता है , निशां खो जाते हैं
    एक लाजवाब प्रस्तुति

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  26. वाह ! एक बार फिर आपकी तिलस्मी कलम ने शब्दों का एक ख्वाब बुना.....

    स्वेद कणों से भरा चेहरा लिए
    मैंने सपनों की बंजर ज़मीन को
    मुलायम करना शुरू किया .....
    तो मेरे साथ चलते अनजाने हमसफ़र ने कहा
    'और मैं तो हूँ ही '

    बहुत सुंदर आशा और विश्वास जगाती कविता !

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  27. बिल्कुल नही खोते जीं जब आपने प्यार के बीज बोये हैं तो विश्वास और सत्य की फसल अवश्य लहलहायेगी ।

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  28. koun kahta hai ki nishan kho jaate hain... wakai kyonki wahi nishan maargdarshak aur utprerak jaise hote hain nai kopalon ke liye...

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  29. बेहद खूबसूरत भाव...बिम्ब, शैली सब मन को मोह गए..अदभुत ...

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  30. बहुत सुंदर..... गहरे सकारात्मक भाव लिए पंक्तियाँ .....

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  31. ohh my God...क्या लिखा है आपने...जानते हो आप...कल से कितनी बार पढ़ चुकी...इस रचना को...फिर भी मन न भरा

    जिनके बीज आप अपने
    बंजर खेतों में बोने चली हो
    उसमें एक बीज मेरे नाम का भी रोप लेना
    भले ही मैं अकेली सही
    पर खुद पर इनता यकीं है
    कि आपके सपनों के खेतों का
    उत्क्रष्ट वृक्ष .... मैं ही बनूँगी
    जब भी कोई पौध डिगने लगेगी अपने पथ से
    हाड़ तोड़ बर्फीली हवाओं के डर से
    तब मैं माँ बन उसे अपने आँचल में छिपा लूंगी
    जब भी कोई झूमती-बलखाती बेल
    तपते सूरज की गर्मी से मुरझाने लगेगी
    मैं पिता बन उसे अपनी छावं में ले लूंगी
    कुछ भी, कैसे भी करके उन्हें
    वख्त से पहले विदा ना होने दूंगी
    जो स्वप्न आपने देखा है अपनी आँखों में
    उसके निशां ना मैं खोने दूंगी

    बस इतनी सी गुज़ारिश है
    बस इतनी सी ख्वाइश है....

    गुन्जन
    १४/९/११

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  32. विलक्षण ... क्या लाजवाब लोइखा है ... प्रेम की कोमल कोंपलें ऐसे ही खिलती रहेंगी ...

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  33. रश्मि जी
    बढ़िया कविता .......
    नई कोपलों के निशां फिर कल को दुहराएंगे
    यह बात काश सब समझ सकते.....---

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  34. नई कोपलों के निशां फिर कल को दुहराएंगे--vaah kya baat hai.

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  35. उत्कृष्ट बीज बोयेंगे तो निसंदेह
    कोपले फुट आएँगी ही शाख-शाख पर !
    बहुत सुंदर ........

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  36. दी ,सच बहुत ही सुंदर और मोहक स्वप्न देखा आपने और आपकी आँखों से हमने भी .....सादर !

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  37. बीज कहीं भी रहे...उचित मौसम देख के अंकुरित हो ही जायेंगे...

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  38. बहुत बहुत बधाई रश्मि जी |

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  39. रश्मि जी नमस्कार्। दर्द की सुन्दर व्याख्या।

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  40. आपको मेरी तरफ से नवरात्री की ढेरों शुभकामनाएं.. माता सबों को खुश और आबाद रखे..
    जय माता दी..

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  41. आपको मेरी तरफ से नवरात्री की ढेरों शुभकामनाएं.. माता सबों को खुश और आबाद रखे..
    जय माता दी..

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प्रभु

देनेवाले, तेरा दिया तुझे ही देकर सब बहुत खुश हैं ! सोने से तुम्हें सजाकर डालते हैं एक उड़ती दृष्टि अपने इर्दगिर्द और मैं तोते की...