24 दिसंबर, 2011

शिखर सम्मान




जब हम शरुआत करते हैं कुछ कहने की
तो शब्दों को नापतौल कर उठाते हैं
किसी भी नापतौल में शुद्धता नहीं होती
यानि डंडी मार ही लेते हैं हम
भावनाओं में फेर बदल करके
हम कलम को कमज़ोर बना देते हैं !
पर जिस दिन हम सत्य पर आते हैं
हमारा साहस, हमारे हौसले
नए पदचिन्हों का निर्माण करते हैं ...
पलायनवादी कहते हैं - 'न ब्रूयात सत्यम अप्रियम'
हम भी मानते हैं
अप्रिय सत्य कहने में कटु होता है
पर जब तक यह कटु घटित होता रहता है
सब खामोश रहते हैं
तो जब उस कटुता को कहने से लोग रोकें
तो हमें खामोश रहना चाहिए
और कहने की दिशा से
भटकना नहीं चाहिए ....
याद रखो -
निर्माण सशक्त हो
सत्य अटल हो
तो निर्माण की आलोचना नहीं होती
बल्कि निर्माता की पुख्ता पहचान होती है
शिखर उसकी प्रतीक्षा में
अपना सर झुकाता है
फिर जहाँ शिखर सम्मान हो
वहाँ किसी और सम्मान की क्या ज़रूरत ! ...

38 टिप्‍पणियां:

  1. मेरा तो धंधा ही कड़वे बोलों का है सो, पढ़ कर अच्छा लगा कि चलो किसी ने तो मेरा साथ दिया :)

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  2. डंडी मार , शिखर सम्मान ,अप्रिय सत्य..कितना सुन्दर बिम्ब समेट लेती है आप .

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  3. शिखर उसकी प्रतीक्षा में
    अपना सर झुकाता है
    फिर जहाँ शिखर सम्मान हो
    वहाँ किसी और सम्मान की क्या ज़रूरत.... !
    आज वास्तव में शिखर ,
    आपके सम्मान में ,
    आपके कदमो में है.... !!

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  4. याद रखो -
    निर्माण सशक्त हो ,
    सत्य अटल हो ,
    तो निर्माण की आलोचना नहीं होती ,

    हौसला बढ़ाती पंक्तियाँ.... :):)

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  5. कल 25/12/2011को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  6. निर्माण सशक्त हो
    सत्य अटल हो
    तो निर्माण की आलोचना नहीं होती
    प्रेरणात्‍मक पंक्तियां ... आभार ।

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  7. याद रखो -
    निर्माण सशक्त हो
    सत्य अटल हो
    तो निर्माण की आलोचना नहीं होती

    बहुत सशक्त रचना है ...लेखन का मार्गदर्शन करती हुई ....!!

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  8. बहुत बहुत सुन्दर भावाव्यक्ति...
    प्यारी रचना रश्मि जी .
    सादर.

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  9. याद रखो -
    निर्माण सशक्त हो
    सत्य अटल हो
    तो निर्माण की आलोचना नहीं होती
    बल्कि निर्माता की पुख्ता पहचान होती है

    बहुत सही, निर्माण सत्य और सशक्त हो
    तो अपनी पहचान बना लेता है...

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  10. शिखर पूज्य हो,
    अनजानों से क्या टकराना..

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  11. फिर एक प्रेरणादायक रचना ...!
    बहुत अच्छा लगा !
    आभार !

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  12. सत्य ही तो है .. निर्माण सशक्त हो और सत्य अटल हो .... तो निर्माण की आलोचना नहीं होती .. क्यूंकि तब हमारी आत्मा हमारे साथ होती है ... और इससे बड़ा स्वयं में सम्मान और क्या होगा भला

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  13. सांच को आंच नहीं , यही सत्य है ।

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  14. सच में,फिर किसी और सम्मान की ज़रूरत नहीं होती

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  15. बढ़िया भावों के साथ कटु सत्य भी , आत्म गौरव भी.

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  16. सत्य अटल हो
    तो निर्माण की आलोचना नहीं होती
    बल्कि निर्माता की पुख्ता पहचान होती है !


    क्या बात है ! सुंदर रचना !
    आभार !!

    मेरी नई रचना ( अनमने से ख़याल )

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  17. अप्रिय सत्य कहने में कटु होता है
    पर जब तक यह कटु घटित होता रहता है
    सब खामोश रहते हैं
    तो जब उस कटुता को कहने से लोग रोकें
    तो हमें खामोश रहना चाहिए
    और कहने की दिशा से
    भटकना नहीं चाहिए ....

    bilkul sahee
    किसी प्रश्न के उत्तर में
    या विषय पर
    मौन रहना,सहमती माना जा
    सकता है
    असहमत हो तो,मौन ना रहे
    अपने विचार
    अवश्य प्रकट करने चाहिए
    वो भी इस तरह से कि
    जिससे आप सहमत ना हो
    उसे बुरा नहीं लगे
    27-11-2011-40
    डा राजेंद्र तेला,"निरंतर”

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  18. याद रखो -
    निर्माण सशक्त हो
    सत्य अटल हो
    तो निर्माण की आलोचना नहीं होती

    सुन्दर कोटेशन, बेहतरीन प्रस्तुति

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  19. शब्दों की नाप-तौल तो सही है जी, कतर-ब्यौंत नहीं होनी चाहिए।

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  20. जब उस कटुता को कहने से लोग रोकें
    तो हमें खामोश रहना चाहिए
    और कहने की दिशा से
    भटकना नहीं चाहिए ....

    सार्थक चर्चा करती हुई सशक्त रचना दी....
    सादर.

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  21. बहुत सच्ची सच्ची भावनाये पर सत्य का पंथ हमेशा कंटकों से भरा होता है ..तब अंत में जा कर कही सिखर सम्मान की प्राप्ति हो पाती है
    सारगर्भित पोस्ट आभार

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  22. जब उस कटुता को कहने से लोग रोकें
    तो हमें खामोश रहना चाहिए
    और कहने की दिशा से
    भटकना नहीं चाहिए ....यार्थार्थ को दर्शाती अभिवयक्ति.....

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  23. दी ,आप इतना कड़वा सच इतनी सहजता से कैसे लिख देतीं हैं ...... सादर !

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  24. सत्य अटल हो
    तो निर्माण की आलोचना नहीं होती
    बल्कि निर्माता की पुख्ता पहचान होती है
    शिखर उसकी प्रतीक्षा में
    अपना सर झुकाता है


    हम भी इस भावना के सामने सर झुकाते हैं

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  25. एक यथार्थ, प्रेरक.
    साधु-साधु

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  26. निर्माण सशक्त हो
    सत्य अटल हो
    तो निर्माण की आलोचना नहीं होती
    बल्कि निर्माता की पुख्ता पहचान होती है
    शिखर उसकी प्रतीक्षा में
    अपना सर झुकाता है
    फिर जहाँ शिखर सम्मान हो
    वहाँ किसी और सम्मान की क्या ज़रूरत ! ...
    yathaarth ko chitrit karti rachana.....aabhar...

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  27. शिखर झुकता हो जहाँ ,वहाँ सम्मान तो बहुत छोटी चीज़ है !

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  28. पलायनवादी कहते हैं - 'न ब्रूयात सत्यम अप्रियम'
    हम भी मानते हैं
    अप्रिय सत्य कहने में कटु होता है
    पर जब तक यह कटु घटित होता रहता है
    सब खामोश रहते हैं
    .....
    आपका साहस हम सबको भी साहसी बनाता है दी ...
    मैं जनता हूँ कि मैं एक पुख्ता बुनियाद वाले मकान में हूँ!

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