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मेरे एहसास इस मंदिर मे अंकित हैं...जीवन के हर सत्य को मैंने इसमे स्थापित करने की कोशिश की है। जब भी आपके एहसास दम तोड़ने लगे तो मेरे इस मंदिर मे आपके एहसासों को जीवन मिले, यही मेरा अथक प्रयास है...मेरी कामयाबी आपकी आलोचना समालोचना मे ही निहित है...आपके हर सुझाव, मेरा मार्ग दर्शन करेंगे...इसलिए इस मंदिर मे आकर जो भी कहना आप उचित समझें, कहें...ताकि मेरे शब्दों को नए आयाम, नए अर्थ मिल सकें ...

28 दिसंबर, 2011

सोच के देखो






मैंने तुमसे कहा -
आकाश पाने के ख्वाब देखो
सूरज तो मिल ही जायेगा ...'
जब कभी किरणें विभक्त हुईं
मैंने उनको हथेली में भरकर
सूरज बना दिया ...
मिलने की अपनी सार्थकता होती है
पर क्या नहीं मिला
क्यूँ नहीं मिला के हिसाब का फार्मूला
बहुत जटिल होता है
तुम उसे सुलझाने में
न उसे सुलझा सकते
न पाने की ख़ुशी जी सकते हो !
ऐसे में -
सूरज भी मायूस पिघलने लगता है ...

आकाश परिपूर्ण है - क्यूँ ?
सूरज , चाँद , सितारे , बादल
ये सब मिलकर उसे पूर्णता देते हैं
वरना आकाश के विस्तार का कोई औचित्य नहीं !
खोना -पाना अपने हाथ में नहीं होता
पर खुद को टूटकर भी जोड़े रखना
अपने हाथ में होता है
...
सीखने के लिए प्रकृति का विस्तार है
सृष्टिकर्ता का चमत्कार है
सूरज ...
ग्रहण के पंजे में भी आता है
चाँद सूक्ष्म से पूर्ण होता है
ग्रहण उसे भी लगता है
सितारे टूटते हैं
फिर भी विश पूरा करते हैं
पेड़ को काट दो
फिर भी हरे पत्ते
उसके अस्तित्व को बताते हैं ....
.....
हमारा अस्तित्व है
समय की पहचान
ख़्वाबों की वो धरती
जहाँ आकाश मुट्ठी में होता है - सूरज नए विश्वास का तेज लिए
पास बिल्कुल पास होता है ...
सोच के देखो
एक मासूम मुस्कान तुम्हारे चेहरे पे होगी
क्योंकि सत्य यही है
बस यही है !

46 टिप्‍पणियां:

  1. सोच के देखो
    एक मासूम मुस्कान तुम्हारे चेहरे पे होगी
    क्योंकि सत्य यही है
    बस यही है !

    बहुत खूब.
    सुन्दर,सार्थक और प्रेरक.

    मेरे ब्लॉग पर आईयेगा.

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  2. आकाश परिपूर्ण है - क्यूँ ?
    सूरज , चाँद , सितारे , बादल
    ये सब मिलकर उसे पूर्णता देते हैं
    वरना आकाश के विस्तार का कोई औचित्य नहीं !


    आकाश परिपूर्ण है क्योंकि ...दिन-रात ...मौसम सब देख रहा है ...और अपने आगोश में सब समेटे हुए है ...!!जीवन से जुडी हुई ..बहुत गहन बातें ...पढ़ कर ...उद्विग्नता जैसे शांति पा रही है ....!
    बहुत सुंदर रचना दी .......!!
    बहुत ही सुंदर ....!!

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  3. सोच को दिशा देती सुन्दर रचना।

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  4. पर क्या नहीं मिला
    क्यूँ नहीं मिला के हिसाब का फार्मूला
    बहुत जटिल होता है


    क्या खूब कहा है निशब्द कर दिया कसम से !

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  5. खोना -पाना अपने हाथ में नहीं होता
    पर खुद को टूटकर भी जोड़े रखना
    अपने हाथ में होता है ...सकारात्मक सोच!!

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  6. खोना -पाना अपने हाथ में नहीं होता
    पर खुद को टूटकर भी जोड़े रखना
    अपने हाथ में होता है

    बेमिसाल कथन...

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  7. खोना -पाना अपने हाथ में नहीं होता
    पर खुद को टूटकर भी जोड़े रखना
    अपने हाथ में होता है ...
    यही अपने हाथ में होता है ...
    एकदम सही सलाह !
    जिंदगी और प्रकृति हमें हर रोज यही सिखाती है !

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  8. खोना -पाना अपने हाथ में नहीं होता
    पर खुद को टूटकर भी जोड़े रखना
    अपने हाथ में होता है
    ...
    क्योंकि सत्य यही है
    बस यही है !
    कितनी सकारात्‍मकता है इन शब्‍दों में .. प्रेरित करती अभिव्‍यक्ति बहुत ही अच्‍छी लगी .. आभार सहित शुभकामनाएं ।

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  9. आशा और विश्वास का संदेश देती, खोने-पाने के गणित से बाहर निकाल पूर्णता का अनुभव कराती सुंदर कविता...

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  10. पाना खोना जो भी होता...
    सब ईश्वर ....आधीन....
    कोई जोर न चलता इस पर...
    मनुष्य रहा पराधीन....

    सुन्दर भाव..नदी सी बहती कवितायेँ....
    आभार...
    दीपक शुक्ल...

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  11. ग्रहण के पंजे में भी आता है
    चाँद सूक्ष्म से पूर्ण होता है
    ग्रहण उसे भी लगता है
    सितारे टूटते हैं
    फिर भी विश पूरा करते हैं
    पेड़ को काट दो
    फिर भी हरे पत्ते
    उसके अस्तित्व को बताते हैं ...bahut prabhaavshali panktiyan.bahut sundar prastuti.

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  12. जहाँ आकाश मुट्ठी में होता है - सूरज नए विश्वास का तेज लिए
    पास बिल्कुल पास होता है ...

    जिसने आकाश को समेटने का हौसला जुटा लिया उसके पास तो हर मुश्किल का हल होगा ही।

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  13. क्योंकि सत्य यही है
    बस यही है !

    बहुत सुन्दर रचना...

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  14. आशा का प्रकाश फैलाती पंक्तियाँ.

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  15. बहुत सुन्दर!
    "मैंने उनको हथेली में भरकर
    सूरज बना दिया ..."
    वाह! आप तो 'रश्मि' हैं न... और 'प्रभा' भी फिर क्यूँ कर न यह संभव होता आपसे... आप ही कर सकती हैं यह!!!

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  16. हम हैं तो सब है और मुट्ठी में है सारा आकाश ...

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  17. खोना -पाना अपने हाथ में नहीं होता
    पर खुद को टूटकर भी जोड़े रखना
    अपने हाथ में होता है

    waakai yahi satya hai, yahi tathya hai aur yahi saarthakta bhi hai....

    khubsoorat prastuti.

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  18. खूबसूरत रचना...
    ख्वाबों को जिन्दा रक्खे हूँ क्या खबर जिंदगी की सच्चाई का आभास हो जाये, अगर ये गुनाह है तो हां में करता हूँ ख्वाब देखने का गुनाह...

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  19. 2 baar padhna pada bhaav samajhne ke liye :-)
    bahut achhi rachna rashmi ji.

    saadar namaskaar..

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  20. आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल बृहस्पतिवार 29 -12 - 2011 को यहाँ भी है

    ...नयी पुरानी हलचल में आज... जल कर ढहना कहाँ रुका है ?

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  21. सत्य की सटीक परिभाषा..बहुत सुन्दर...

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  22. पेड़ को काट दो
    फिर भी हरे पत्ते
    उसके अस्तित्व को बताते हैं ...

    sundar bhavpoorn rachna.

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  23. आकाश पाने के ख्वाब देखो
    सूरज तो मिल ही जायेगा ...'
    जब कभी किरणें विभक्त हुईं
    मैंने उनको हथेली में भरकर
    सूरज बना दिया ...

    apkaa yahee soch aap ko nirantar aage badhaa rahaa hai

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  24. sundar, satik or prernadayi abhivykti...
    aapki rachnao me bahut gahanta hoti hai..

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  25. वास्तविक सत्य से पहचान करा रही है ये रचना ...
    आपको नव वर्ष २०१२ की बहुत बहुत शुभकामनाएं ..

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  26. पर खुद को टूटकर भी जोड़े रखना
    अपने हाथ में होता है

    सकारात्मक सोच को बिस्तार
    देती रचना बहुत खूब

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  27. सीखने के लिए प्रकृति का विस्तार है
    सृष्टिकर्ता का चमत्कार है ....

    खुबसुरत सकारात्मक सार्थक रचना दी...
    सादर.

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  28. आकाश सी बिस्तृत रचना के लिए बधाई..

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  29. बहुत जटिल और कठिन सी रचना, समझने के लिए कई बार पढ़ना पड़ा.बहुत धरातल पर लिखी गई है.वाह !!!

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  30. कविता भाव सम्प्रेषण के अपने मक़सद में क़ामयाब है। इस सुंदर प्रस्तुति के लिए बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  31. हमारा अस्तित्व है
    समय की पहचान
    ख़्वाबों की वो धरती
    जहाँ आकाश मुट्ठी में होता है - सूरज नए विश्वास का तेज लिए
    पास बिल्कुल पास होता है ...
    सोच के देखो
    एक मासूम मुस्कान तुम्हारे चेहरे पे होगी
    क्योंकि सत्य यही है
    बस यही है !
    एक दम सही बात है। शायद यही जीवन का सच है

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  32. सोच को सकारात्मक रूप देने वाली रचना
    सचमुच ही प्रेरणादायक है।

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  33. सोच के देखो
    एक मासूम मुस्कान तुम्हारे चेहरे पे होगी
    क्योंकि सत्य यही है
    बस यही है !हम सभी को सोचने पर मजबूर करती....

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  34. आकाश परिपूर्ण है - क्यूँ ?
    सूरज , चाँद , सितारे , बादल
    ये सब मिलकर उसे पूर्णता देते हैं
    वरना आकाश के विस्तार का कोई औचित्य नहीं !
    खोना -पाना अपने हाथ में नहीं होता
    पर खुद को टूटकर भी जोड़े रखना
    अपने हाथ में होता है

    bahut saargarbhit baat

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  35. किरणों से लड़कर जीवन का समय निकल जाता है,
    नजर झुका लो इस दुनिया के सूर्य बड़े अलबेले हैं,

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  36. खोना -पाना अपने हाथ में नहीं होता
    पर खुद को टूटकर भी जोड़े रखना
    अपने हाथ में होता है ....
    .....
    खुद को टूटकर जोड़े रखना भी बहुत बड़ी बाजीगिरी का माँग करता है दी ...इतना आसान भी नहीं है ये !!

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  37. आकाश परिपूर्ण है - क्यूँ ?
    सूरज , चाँद , सितारे , बादल
    ये सब मिलकर उसे पूर्णता देते हैं
    वरना आकाश के विस्तार का कोई औचित्य नहीं ! excellent rashmi jee.

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  38. aapki rachna me jivan ka bahut bada darshan hota hai aur seekh bhi...
    खोना -पाना अपने हाथ में नहीं होता
    पर खुद को टूटकर भी जोड़े रखना
    अपने हाथ में होता है

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